Home Trending तालिबान को सरकार का दर्जा देने में दो धड़े में बटी दुनिया VM

तालिबान को सरकार का दर्जा देने में दो धड़े में बटी दुनिया VM

by GwriterSK

३१ अगस्त की सुबह अमेरिका अफ़गानिस्तान छोड़कर चला गया. और 20 साल से चल रही लडाई पर फुल स्टॉप लगा दिया है. उसके जाते ही अफगनिस्तान की सड़कों पर लाशों का बोझ बढ़ने लगा है. हर जगह खून बहते हुए दिख रहे हैं. रोज का रोज अफगानियों की जिन्दगी नरक होती जा रही हैं. अमेरिका के साथ काम करने वाले अफगानियों को खोजा जा रहा है और उनकी हत्या कर दी जा रही है. आसमान में भी अब तालिबान ने जहाज उड़ना शुरू कर चूका है. अपनी एयरफ़ोर्स सेना भी बना ली है. ये तो बात हई जो अफ़गानिस्तान में पिछले एक दिन में घटित हुआ है. 

इन सबके बीच दुनिया भर में तालिबान को सरकार का दर्जा देने की बात तूल पकडती जा रही है.और तालिबान को सरकार का दर्जा देने के लिए दुनिया के सभी देश दो धड़े में बट गये हैं. एक ओर अमेरिका के दुशमन देश हैं और दूसरी तरफ अमेरिका के मित्र देश शामिल हैं.

दोस्तों अमेरिका के दुश्मन देशों में चाइना रुश और ईरान शामिल हैं जो बहुत ही जल्द तालिबान को सरकार का दर्जा देने जा रहे हैं. उधर तालिबान भी अपने वादों पर अमल करने की बात कह रहा है. और दुनिया को दिखाना शुरू कर दिया है की वो अब अफ़गानिस्तान को चलाना चाहता है. 

अभी फिलहाल जिन देशों के मान्यता देने की खबर आ रही है उसमें चाइना पकिस्तान और तुर्की शामिल हैं जो  कुछ ही दिनों में मान्यता देने जा रहे हैं

 आपको बता दें दिसम्बर 1996 में तालिबान को सत्ता को संभाले एक महीना ही हुआ था और उस समय भी तीन देशों का समर्थन प्राप्त हो गया था. जिसमें पाकिस्तान सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात वो पहले देश थे जिन्होंने ने सबसे पहले तालिबान को अफगानिस्तान   सरकार की मान्यता दी थी.

और जब तालिबान एक बार फिर से लौटा है तो उसे अभी 15 दिन ही हुए हैं और देशों ने मान्यता देने की कवायद भी शुरू कर दी है.

1996 में भारत वेट एंड वाच की स्थिति में था और उसने किसी भी प्रकार की जल्दी नही दिखायी थी. और इस बार भी भारत अभी वेट एंड वाच की स्थिति में ही नज़र आ रहा है. लेकिन इस बार तालिबान भारत को अपने पक्ष में करने की पूरी जदोजहद में लगा है. भारत के राजदूत और तालिबान के टॉप लीडर के बीच क़तर की राजधानी दोहा में एक अनऔपचारिक बैठक हो चुकी है. जिसमें भारत ने तीन बातें तालिबान के सामने रखी थी जिस पर तालिबान ने अपनी सहमती ज़ाहिर की थी.

 तालिबान भी भारत से अपेक्षा कर रहा की भारत भी उसे सरकार रूप में एक्सेप्ट करें लेकिन अभी फ़िलहाल भारत की ओर से तालिबान को एक सरकार के रूप में मान्यता देने के सम्बन्ध कोई भी बात नही कही गयी है. 

तालिबान अब अपनी इमेज को भी सुधारने में लगा हुआ है. जब भारत के विदेश मंत्रालय ने कानपुर की एक महिला के बारे में बात की जो इस समय अफ़गानिस्तान में फसी हुयी हैं. 

तो तालिबान ने भारत को भरोषा दिलाया की उस महिला से जल्द ही तालिबान सम्पर्क करेंगे और उसे भारत तक सकुशल पहुचाएंगे.

लेकिन फ़िलहाल पंजशीर अभी भी तालिबान के लिए एक मुद्दा बना हुआ है. आपको बता दें कि तालिबान ने सबसे पहले हेरात शहर पर कब्ज़ा किया था जहाँ से वो खून खराबें के सहारे काबुल तक पहुचे थे और धीरे धीरे लगभग पूरे अफ़गानिस्तान पर कब्ज़ा कर लिया था.

तालिबानों को अब केवल पंजशीर को जीतना बाकी रह गया है. जिसके लिए तालिबान कब से बेताब है कि उसका झंडा पंजशीर की सबसे ऊँची चोटी पर कब लहराएगा.

 आपको बता दें कि अभी तक अफ़गानिस्तान को हासिल करने में तालिबान को ज्यादा मसक्कत नही करनी पड़ी थी बहुत आसानी से एक जिले के बाद दूसरा- दूसरे के बाद तीसरा जीतते चले गये थे. अब वो समय आ गया जब तालिबान को अपनी परीक्षा देनी पड़ेगी. 

इस समय पंजशीर और तालिबान के बीच जंग बढती जा रही है और पंजशीर ने दावा किया है कि उन्होंने 350 तालिबानियों को मार गिराया है. साथ ही 40 से अधिक तालिबानियों को बंधक भी बनाया है.  तालिबान ने पंजशीर को गोल बहार से जोड़ने वाले पुल को ध्वस्त कर दिया है.

जिस तरह से पंजशीर और तालिबान के बीच संघर्ष चल रहा है जल्दी समाप्त होता नही दिख रहा है. लेकिन पंजशीर को विदेशी सेना का किसी भी प्रकार की अभी तक कोई सहयोग प्राप्त नही हुआ है. आपको बता दें की 2001 में जब तालिबान और पंजशीर के बीच गृहयुद्ध लड़ा गया था उसमें पंजशीर की सहायता के लिए बहुत से देश सामने आये थे लेकिन इस बार पंजशीर बिलकुल अकेला पड़ गया है इसलिए तालिबान को हराना पंजशीर के लिए इतना आसान नही होगा. आपको बता दें तालिबान को अभी तक अफ़गानिस्तान पर कब्ज़ा करने के लिए किसी भी प्रकार का नुकसान नही उठाना पड़ा था.

अगर बात करें भारत की तो तालिबान सरकार बनने के बाद अगर तालिबान भारत से किये अपने वादें  से उलट गया तो भारत को बहुत भारी नुकसान पंहुचा सकता हैं. आइये आपको बताते हैं अगर तालिबान विश्वास घात करता है तो भारत को कौन कौन से नुकसान उठाने पड़ सकते हैं. 

पहला तो सबसे ज्वलंत मुद्दा जम्मू-कश्मीर को लेकर है, जहाँ भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष चल रहे हैं उसमें तालिबान एक उत्प्रेरक का काम कर सकता है. क्योंकि तालिबान को पाकिस्तान  का सबसे नजदीकी माना जा रहा है लेकिन तालिबान की ओर से यह कहा गया है कि अफ़गानिस्तान की जमीन का उपयोग किसे दूसरे देश के लिए नहीं किया जायेगा. लेकिन तालिबानी प्रमुख पाकिस्तान को अपना दूसरा घर भी कह रहे हैं. यही भारत की उलझनों का एक प्रमुख कारण भी बन सकता है.

अगर तालिबान भारत से किये अपने वायदे पर खरा नही उतरता तो भारत के अरबों रूपये के निवेश जो अफ़गानिस्तान में कर रखे हैं उसको डूबने का खतरा उत्पन्न हो जायेगा.

भारत का तीसरा डर सीमा विवाद से जुड़ा हुआ है.

 भारत का अभी तक केवल पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा विवाद चल रहे थे और भारत अफ़गानिस्तान सीमा को लेकर बेख़ौफ़ था लेकिन तालिबान के कब्जे के बाद भारत की अफ़गानिस्तान की सीमा को लेकर भी चिंता बढ़ी है क्योंकि अभी तक पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच सीमा पूरी तरह से बंद थी लेकिन तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान में पाकिस्तान से आवागमन आसान हो जायेगा जिससे भारत को अब अफ़गानिस्तान सीमा पर अलर्ट रहने की ज़रूरत होगी.

तो इस ख़बर में इतना ही मिलते हैं एक नयी खबर के साथ. आप हमसे जुड़े रहें और देखते रहें planet 4. हा और अभी तक आपने इस विडियो को लाइक नही किया तो लाइक करें और चैनेल को सब्सक्राइब करें.

Related Articles

Leave a Comment