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आखिर क्यों झारखंड बिहार से अलग हुआ था ?

झारखंड भारत का एक स्वतंत्रत राज्य है और इसकी राजधानी राँची है। यह राज्य कभी बिहार राज्य का हिस्सा हुआ करता था। झारखंड की सीमाएँ बिहार, पश्चिम में उत्तर प्रदेश एवं छत्तीसगढ़, दक्षिण में ओड़िशा और पूर्व में पश्चिम बंगाल से सटी है। दोस्तों, यहाँ हम आपको बताने जा रहे है कि आखिर किन कारणों से झारखंड को बिहार से अलग किया गया।

झारखंड भारत का एक स्वतंत्रत राज्य है और इसकी राजधानी राँची है। यह राज्य कभी बिहार राज्य का हिस्सा हुआ करता था। झारखंड की सीमाएँ बिहार, पश्चिम में उत्तर प्रदेश एवं छत्तीसगढ़, दक्षिण में ओड़िशा और पूर्व में पश्चिम बंगाल से सटी है। दोस्तों, यहाँ हम आपको बताने जा रहे है कि आखिर किन कारणों से झारखंड को बिहार से अलग किया गया। 

दोस्तों, बता दें कि 1930 में जयपाल सिंह मुंडा ने ही सबसे पहले झारखंड को एक अलग राज्य बनाए जाने की मांग रखी थी। जोकि एक भारतीय हॉकी कप्तान, संविधान सभा के सदस्य, पत्रकार, लेखक व संपादक के साथ-साथ झारखंड आंदोलन के सर्वोच्च नेता थे। हैरानी वाली बात यह है कि यह मांग उन्होंने देश की आज़ादी से पहले ही उठाई थी। लेकिन बिहार से अलग होते-होते और अपनी आज़ादी को पाते-पाते एक लंबा वक़्त बीत गया और 15 नवम्बर 2000 में जाकर झारखंड बिहार से अलग हुआ और स्वतंत्र राज्य बना।

झारखंड के इतिहास पर एक नज़र डाली जाए तो पता चलता है कि मध्यकाल में इस क्षेत्र में चेरा राजवंश और नागवंशी राजवंश राजाओं का शासन हुआ करता था।  वर्ष 1658 से 1674 तक राजा मेदिनी राय ने वहाँ शासन किया था। जब यहाँ चेरो राजवंश कमजोर पड़े, तो नॉर्थ ईस्ट इंडिया कंपनी ने हमला बोल दिया। जिनके शासनकाल में यहाँ काफी अत्याचार हुए और जिसके विरोध में कई विद्रोह भी हुए।

साइमन कमीशन द्वारा साल 1929 में अलग झारखंड की मांग को reject कर दिया गया था। यहाँ तक कि देश की आज़ादी से पहले प्रधान मंत्री नेहरू ने भी इस मांग को खारिज कर दिया था। 90 के दशक में शिबू सोरेन के नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने झारखंड के लिए जन आंदोलन किया था। 

बता दें कि झारखंड में बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजाति और दूसरी आदिवासी जातियाँ रहती है। तो आदिवासियों की आबादी ज्यादा होने के कारण यहाँ के आदिवासियों ने अलग झारखंड की मांग की थी। लेकिन अँग्रेजी शासनकाल में दबाव के चलते विरोध को ज्यादा सफलता नहीं मिली, पर विरोध फिर भी रुका नहीं। साल 1949 में में जयपाल सिंह मुंडा ने झारखंड पार्टी’ का गठन किया।

देश की आज़ादी के बाद जब ‘राज्य पुनर्गठन आयोग’ बना तब झारखंड को एक अलग राज्य बनाने की मांग उठी थी। लेकिन राज्य पुनर्गठन आयोग ने यह प्रस्ताव खारिज कर दिया था। जिसका कारण था कि वहाँ कोई एक भाषा आम नहीं है। जब साल 1950 आया तो तब बिहार के आम चुनाव में ‘झारखंड पार्टी’ बड़ी विपक्षी पार्टी बनकर उभरी और साल 1963 में इस पार्टी का कांग्रेस पार्टी में विलय हो गया था।

साल 1991 में चुनाव के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस मुद्दे को अपना समर्थन दिया था। इस तरह अलग झारखंड का मुद्दा देशभर में छा गया था। साल 2000 आते-आते बीजेपी सरकार ने ही संसद में इसको लेकर बिल पेश किया था। जिसके बाद आखिरकार 15 नवम्बर 2000 में जाकर झारखंड एक अलग स्वतंत्र राज्य बन सका।

तो दोस्तों, यह थी पूरी कहानी कि आखिरी कैसे एक लंबी जंग के बाद झारखंड देश का 28वां अलग राज्य बना।

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