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आखिर चीन के लोग जापान से क्यों घृणा करते है? जाने दोनों देशों के बीच दुश्मनी का कारण?

इतिहास के पन्नों को खोलकर देखा जाए तो पता चलता है कि दोनों देश के बीच विवाद का दौर दूसरे विश्व युद्ध से पहले ही शुरू हो गया था। जापान चीन की सीमा में घुसकर खुद के क्षेत्र और शक्ति का विस्तार करने का इरादा रखता था। जिसके चलते ही उसने साल 1931 में चीन के मंचूरिया में आक्रमण कर दिया था।

आज के समय में विश्व के सभी देश काफी आगे निकल आए है। वैसे भी वक़्त के साथ विकास की दर में बदलाव आता ही है। लेकिन हम यहाँ किसी एक देश की विकास दर या development पर बात नहीं कर रहें है। बल्कि बात तो होने जा रही है चीन और जापान देश की। जिनकी स्थिति आज के समय में काफी मजबूत है और वो बाकी देशों को कड़ी टक्कर देते है।

लेकिन इन दोनों देशों की कहानी पहले ऐसी नहीं थी। अगर इतिहास में झांक के देखा जाए तो विश्व के कई देशों ने अपनी स्वतन्त्रता से पहले गुलामी के बुरे दौर को झेला है। आज़ादी की लड़ाई में ना जाने कितनों ने ही अपनी बलि दी है। दोस्तों, अब जानते है कि आखिर जापान ने चीन के साथ ऐसा क्या किया था कि चीन के लोगों को उनसे नफरत हो गई।

इतिहास के पन्नों को खोलकर देखा जाए तो पता चलता है कि दोनों देश के बीच विवाद का दौर दूसरे विश्व युद्ध से पहले ही शुरू हो गया था। जापान चीन की सीमा में घुसकर खुद के क्षेत्र और शक्ति का विस्तार करने का इरादा रखता था। जिसके चलते ही उसने साल 1931 में चीन के मंचूरिया में आक्रमण कर दिया था। जिसके लिए उसने जापानी नियंत्रण वाली रेलवे लाइन के पास एक जोरदार विस्फोट किया। अचानक हुए इस विस्फोट के आगे चीनी सैनिक संभल नहीं पाए। इस तरह ये इलाका जापान के हाथ में चला गया। उस समय वैसे भी चीन कम्युनिस्टों और राष्ट्रवादियों के गृह युद्ध में फंसा हुआ था। जिसका फायदा जापान ने उठा लिया।  

जापान ने चीन पर जितनी जगह भी हमले या आक्रमण किए उनमें से 1937-38 के बीच नानकिंग नामक जगह पर हुआ हमला काफी विवादित रहा। बता दें कि चीन के राष्ट्रवादी नेता च्यांग काई-शेक ने इस जगह यानि नानजिंग को राष्ट्रीय राजधानी घोषित कर दिया था। इस घटना को इतिहास के काले दिनों मे से एक माना जा सकता है।

 

नानकिंग में हुए आक्रमण के दौरान जापानी सैनिकों ने ऐसी क्रूरता को दुनिया के सामने पेश किया, जिसको कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। इस आक्रमण में लाखों चीनियों का नरसंहार हुआ था और लाखों चीनी महिलाओं का बलात्कार किया गया था। जो सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा था। इतना ही नहीं जापानियों ने पूरे शहर को लूटने के बाद उसे जला भी दिया था। हालांकि इस आंकड़ों में भी हेर-फेर करने की कोशिश की गई थी। जापान ने बेशक अपनी इस गलती को स्वीकार किया पर उनके अनुसार नानकिंग में बलात्कार के पीड़ित और मारे गए लोगों की संख्या लाख से नीचे थी। लेकिन चीनियों के अनुसार यह संख्या लगभग 5 लाख के आस-पास थी। इस हादसे के बाद अब हर साल 13 दिसंबर को चीन में उन मरे लोगों की याद में छुट्टी रखी जाने लगी।

दोस्तों, बता दें कि तोकोकिची नागाता नाम के एक जापानी व्यक्ति ने चीनियों के खिलाफ हुए जुल्म पर अपना इकरारनामा पेश किया था। जोकि एक चिकित्सक के तौर पर जापानी सेना में भर्ती हुआ था। नागाता ने खुद स्वीकार किया था कि एक बार उसने चिकित्सा में काम आने वाली छुरी से दो चीनी किसानों को चीर कर मार डाला था। जिसके पीछे इरादा था उनकी dead body से study करना। 

इस दौर का अंत बेशक द्वितीय विश्व युद्ध के बाद खतम हो गया था, लेकिन क्रूरता और हिंसा से भरे इस वक़्त की याद चीनियों के दिमाग से कभी नहीं जा सकेगी। जिसके चलते ही वो जापानियों से घृणा करते है। चीन अब बकायदा इतिहास के इस लम्हे की चर्चा अपने पाठ्य-पुस्तकों के माध्यम से आने वाली पीढ़ी को भी देते रहता है।

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