कभी सोचा है कि आखिर मुस्लिम महिलाएं बुरका क्यों पहनती है ?

बुरका पर प्रतिबंध लगाने के बारे में बहस अक्सर यह मानती है कि महिलाओं को पुरुषों द्वारा मजबूर किया जाता है। कई मुस्लिम देशों में, महिलाओं की समानता और बुनियादी अधिकारों की कमी होती है। वहीं इस्लामों की सबसे पवित्र किताब क़ुरआन में यह कहा गया है कि महिलाओं और पुरुषों दोनों को बुरका पहनना चाहिए।

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कुछ सबूत हैं कि विशेष रूप से रूढ़िवादी देशों में महिलाओं को मारने, गिरफ्तारी या हत्याओं के डर से बुरका या निकाब पहनने के लिए मजबूर होना पड़ता है। हालाँकि कई इस्लामी देशों और पश्चिमी देशों में इन महिलाओं में से कई ने यह भी खुलकर कहा है कि पूर्ण बुर्का पहनना उनकी पसंद और उनका अधिकार है, यह बात विन्सेंट; क्लार्क-फ्लोरी के अनुसार कही गयी है। उन महिलाओं को कहना है कि वे जब अपने पवित्र पाठ की व्याख्या करते हैं कि उनके चेहरे ढके हुए होने चाहिए।

हालांकि कई महिलाएं यह भी कहती हैं कि हिजाब अपने अधिकार में लाना का साधन नहीं है, बल्कि समानता का साधन हैं। इसके लिए उनका तर्क यह है कि जनता में, उनकी उपस्थिति पर उनका न्याय नहीं होता है। “द ब्यूटी मिथ” के लेखक नाओमी वुल्फ ने सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड के एक संपादकीय में टिप्पणी की कि ये महिलाएं यौन उत्पीड़न से बहुत दूर रही; उन्होंने अपनी यौन अपील को इस तरह लपेटकर रखा कि शादी के बंधन में इसे और अधिक विशेष बनाया गया।

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लेकिन कई बड़े-बड़े लेखकों ने यही कहा है कि इस्लाम की पवित्र पुस्तक कुरआन में यह कहा गया है कि महिलाओं को बुरका इस तरह पहनना चाहिए कि उनका शरीर पूरी तरह से ढका हुआ हो। साथ ही आँख, पैर और हाथों के अलावा कुछ भी दिखना नहीं चाहिए। इस तरह शायद आप भी समझ गए होंगे कि आखिर मुस्लिम महिलाएं बुरका क्यों पहनती है।

इस्लाम धर्म में बुरका पहनना काफी पवित्र और अच्छा माना जाता है लेकिन कई लोगों का मानना है कि उन्हें मजबूरी में पहनना पड़ता है तो कई इसे पूर्ण रूप से बंद भी करवाना चाहते हैं।

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