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JNU हमेशा विवादों में क्यूँ रहता है?

JNU यानि ‘जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय’ का विवादों से बड़ा गहरा रिश्ता है। अगर बात की जाए कि वो कौन सा वक़्त था जब जेएनयू ने अचानक मीडिया के बीच सुर्खियां बटोरने का काम किया, तो ऐसे में साल 2016 में हुई एक खास घटना को ज़रूर याद करना होगा। यह वोहि घटना थी जिसके अंतर्गत जेएनयू के कुछ students ने देश विरोधी नारे लगाए थे। दरअसल, पूरा मामला यह था कि जेएनयू के कुछ छात्रों ने इस साल 9 फरबरी वाले दिन भारतीय संसद हमले के दोषी अफज़ल गुरु की फांसी की तीसरी बरसी पर एक कार्यक्रम को आयोजित। यह छात्र मुख्य रूप से दोषी अफ़जल गुरू को मौत की सज़ा दिए जाने के ख़िलाफ़ थे।

JNU यानि ‘जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय’ का विवादों से बड़ा गहरा रिश्ता है। अगर बात की जाए कि वो कौन सा वक़्त था जब जेएनयू ने अचानक मीडिया के बीच सुर्खियां बटोरने का काम किया, तो ऐसे में साल 2016 में हुई एक खास घटना को ज़रूर याद करना होगा।

यह वोहि घटना थी जिसके अंतर्गत जेएनयू के कुछ students ने देश विरोधी नारे लगाए थे। दरअसल, पूरा मामला यह था कि जेएनयू के कुछ छात्रों ने इस साल 9 फरबरी वाले दिन भारतीय संसद हमले के दोषी अफज़ल गुरु की फांसी की तीसरी बरसी पर एक कार्यक्रम को आयोजित। यह छात्र मुख्य रूप से दोषी अफ़जल गुरू को मौत की सज़ा दिए जाने के ख़िलाफ़ थे।  कार्यक्रम का नाम “बिना डाक-घर वाला देश” रखा गया। इस नाम से ही देशद्रोह वाली बू आती है।

इस कार्यक्रम में मूल रूप से ब्राह्मणवादी विचारधारा का विरोध और अफज़ल गुरु और मकबूल भट्ट की न्यायिक हत्या के खिलाफ विरोध दिखाए जाने की योजना था। जिसके लिए कवियों, कलाकारों, गायकों, लेखकों, विद्यार्थियों, और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं को invite किया गया था। लेकिन जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव सौरभ कुमार शर्मा द्वारा इस कार्यक्रम का विरोध हुआ और उन्होंने विश्वविद्यालय के उप-कुलाधिपति जगदीश कुमार को एक letter भी लिखा दिया था। ताकि प्रोग्राम को रोका जा सके। कमाल की बात है कि इससे शांति भंग होने के पूरे आसार थे, तो कार्यक्रम की इजाजत नहीं दी गई।

इसके बावजूद भी कुछ छात्रों के समूह ने इसको किया और कार्यक्रम में भारत की बर्बादी तक, जंग लड़ेंगे, जंग लड़ेगे, 'कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा' – जैसे देश विरोधी नारे लगाए गए। इसके बाद क्या था, पूरे मीडिया के बीच खबर आग के जैसे फैल गई। देश के हर नागरिक के दिल में ऐसी नारे-बाजी को लेकर गुस्सा भर गया। इसकी हर तरफ कड़ी आलोचना हुई। घटना के बाद कन्हैया कुमार और उमर ख़ालिद के ऊपर राजद्रोह का आरोप लगा व उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था।  कन्हैया कुमार का नाम इस घटना के बाद ही लोगों के सामने आया। इस व्यक्ति का नाम आज भी याद किया जाये तो, बस वोहि देश विरोधी नारों की घटना दिमाग में घूम जाती है।   

इसके बाद दूसरी घटना पर आते है। जो 2016 की ही है। इस घटना के तहत ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन’ की अगुवाई में वाम दलों के छात्र संगठनों ने मनु स्मृति के पन्नों को जला दिया था। जिसका कारण बताया गया कि इसमें महिलाओं के विरोध में कई बातें लिखी गई हैं। कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर हुआ था। यहां भी जेएनयू प्रशासन की ओर से कार्यक्रम को हरी झंडी नहीं मिली थी। फिर भी छात्रों से इसे पूरा किया। 

इसके बाद अब एक नया मुद्दा उछला है, जोकि जुड़ा है हॉस्टल फीस में हुई बढ़ोतरी को लेकर। इस कारण जेएनयू प्रशासन और छात्रों के बीच टकराव शुरू हो गया। छात्रों ने इस फैसले के खिलाफ JNU  से संसद तक मार्च निकालने का ऐलान कर दिया था। इस विरोध को देखते हुए ही सांसद के आस-पास धारा 144 लगानी पड़ी। छात्रों के विरोध को देखते हुए जेएनयू प्रशासन ने बढ़ी फीस के मामले पर उन्हें कुछ राहत देने की घोषणा की।

वैसे विरोध-प्रदर्शन, नारे-बाजी का यहां होना आम बात है, जिसके चलते ही JNU को विवादों का अड्डा या देशद्रोही गतिविधियों का केन्द्र कह दिया जाता है।

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