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सऊदी अरब में अमेरिकी सैनिक क्यों है तैनात ?

सऊदी अरब और ईरान के बीच के रिश्तों की क्या हालत है, इसको तो अब पूरी दुनिया जान चुकी है। तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार को लेकर अक्सर दोनों देशों के बीच संघर्ष और युद्ध का माहौल बना रहता है। तो दोस्तों, चलिए जानते है कि अब ऐसी क्या नई बात हो गई जिसके चलते इस बार अमेरिका ने सऊदी अरब में अपने 3000 सैनिकों को तैनात कर दिया।

सऊदी अरब और ईरान के बीच के रिश्तों की क्या हालत है, इसको तो अब पूरी दुनिया जान चुकी है। तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार को लेकर अक्सर दोनों देशों के बीच संघर्ष और युद्ध का माहौल बना रहता है। तो दोस्तों, चलिए जानते है कि अब ऐसी क्या नई बात हो गई जिसके चलते इस बार अमेरिका ने सऊदी अरब में अपने 3000 सैनिकों को तैनात कर दिया।

जी हाँ, हाल ही में अमेरिका की तरफ से सऊदी अरब में 3000 सैनिकों की तैनाती की गई है। जिसके पीछे कारण दिया गया है कि अमेरिका ने यह कदम सऊदी अरब में अमेरिका के हितों की रक्षा के लिए उठाया है। इस बात की पुष्टि उस पत्र से हुई जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस को लिखा था।

पत्र के माध्यम से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि यह कदम सऊदी अरब में अमेरिका के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है। दोस्तों, दूसरा कारण यह भी दिया गया कि इस कदम से ईरान द्वारा बढ़ाए जा रहे खतरों से निपटा जा सकेगा। October महीने की ही बात की जाए, तो इन दोनों देशों के बीच तनाव का स्तर काफी ऊपर आ गया था। जिसका मुख्य कारण था सऊदी अरब के तटीय इलाके के पास ईरान के एक ऑयल टैंकर में हुआ बड़ा धमाका। जोकि सऊदी के शहर जेद्दाह के पास हुआ था।

इस घटना के बाद शक की सुई ईरान की ओर गई, लेकिन ईरान ने इस धमाके के पीछे अपना हाथ होने से साफ इनकार कर दिया था। एक न्यूज़ agency ने हमले को आतंकी हमला भी बताया। लेकिन ईरान पर शक जाने का कारण था कि कुछ वक़्त पहले ईरान समर्थक हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के दो तेल संयंत्रों को निशाना बनाया था। जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। अमेरिका और सऊदी अरब दोनों पहले भी ईरान पर आरोप लगा चुके थे कि ईरान ने सऊदी अरब के कुछ तेल संयंत्रों पर ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश करी थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब अमेरिका को यह कदम उठाना पड़ा। पत्र में इस बात का भी जिक्र हुआ कि अमेरिका द्वारा उठाए इस कदम से ईरान के आक्रामक नीति को मुहतोड़ जवाब मिलेगा। जिससे इलाके में स्थिरता भी आएगी। पत्र से इस बात की भी पुष्टि हुई है कि अधिकांश सैनिकों को सऊदी अरब भेजा जा चुका है। बाकियों को भी जल्द तैनात कर दिया जाएगा।

इसके अलावा अगर सितंबर महीने की बात की जाए तो उस समय भी अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर की तरफ से एक बयान आया था। जिसके अनुसार अमेरिका ने खाड़ी देश में बढ़ते तनाव को देखते हुए सऊदी अरब में लगभग 200 सहायता सैनिकों और मिसाइल रक्षा उपकरणों को तैनात करने की बात कही थी। मार्क एस्पर ने बयान जारी किया था कि अमेरिका एक पैट्रियट मिसाइल सिस्टम बैटरी, चार सेंटिनल रडार और लगभग 200 सहायता सैनिकों को भेजेगा। 
दोस्तों, सऊदी अरब और ईरान के बीच क्षेत्रीय प्रभुत्व को लेकर दशकों पुरानी इस जंग का परिणाम क्या निकलेगा, इसका जवाब कोई नहीं दे सकता। दोनों देश के बीच जंग का एक पहलू धर्म है, तो दूसरा पहलू तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार पर आधिपत्य जमाना। जोकि आज के समय की एक बड़ी मांग बन चुका है। 

 
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