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बिहार का कन्हैया कुमार कैसे बना देशद्रोह का आरोपी?

कन्हैया कुमार का जन्म बिहार के बेगुसराय जिले के एक गांव में हुआ था. उसका गांव तेघरा विधानसभा क्षेत्र में आता है. जहां उसे सीपीआई का समर्थन हासिल है.

9 फरवरी 2016 को भारत की राजधानी दिल्ली में एक घटना हुई. घटना ऐसी थी कि पूरा भारत इस घटना की निंदा करने लगा था. दरअसल, इस दिन दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में अफजल गुरु की बरसी पर आयोजित हुए एक कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से देशद्रोही नारे लगाए गए. इस मामले में पुलिस ने जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया. इस मामले से कन्हैया कुमार को पूरे देश में पहचान मिली. कन्हैया साल 2019 के लोकसभा चुनाव में चुनाव भी लड़ रहे हैं. लोकसभा चुनाव 2019 में जिन संसदीय क्षेत्रों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है उनमें से एक बिहार का बेगूसराय है. यहां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के ‘पोस्टर बॉय’ कहे जा रहे कन्हैया कुमार और केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद गिरिराज सिंह के बीच सीधी टक्कर है. बेगूसराय में भूमिहारों की आबादी सबसे ज्यादा है और यह सब जानते हैं कि बिहार में चुनाव जीतने के लिए जाति बहुत बड़ा फैक्टर है. गिरिराज सिंह और कन्हैया कुमार दोनों ही भूमिहार जाती से आते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर कन्हैया कुमार है कौन? आइए जानते हैं कौन है देशद्रोह का आरोप झेल रहा कन्हैया कुमार...

कन्हैया कुमार का जन्म बिहार के बेगुसराय जिले के एक गांव में हुआ था. उसका गांव तेघरा विधानसभा क्षेत्र में आता है. जहां उसे सीपीआई का समर्थन हासिल है. उसका परिवार जिले के बरौनी प्रखंड के बीहट में रहता है. उसके पिता जयशंकर सिंह लकवा ग्रस्त हैं जबकि मां आंगनबाड़ी सेविका है. कन्हैया का बड़ा भाई एक निजी कंपनी में काम करता है. कन्हैया की पढ़ाई बरौनी के आरकेसी हाई स्कूल में हुई. यह इलाका इंडस्ट्री से भरा हुआ है. कन्हैया को बचपन से ही अभिनय का शौक रहा था और वह इंडियन पीपल्स थियेटर एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य था. कन्हैया ने 2002 में पटना के कॉलेज ऑफ कॉमर्स में दाखिला लिया था. यहीं से उसने राजनीति की शुरुआत की. पटना में पढ़ाई करते हुए ही कन्हैया अखिल भारतीय छात्र फेडरेशन का सदस्य बना. 

दोस्तों, क्या कन्हैया कुमार देश की राजनीतिक को बदल कर रख सकते हैं? कमेंट बॉक्स में कमेंट कर हमें अपनी राय जरूर बताएं. 

पटना में मास्टर कोर्स खत्म करने के बाद दिल्ली के जेएनयू में अफ्रीकन स्टडीज के लिए पीएचडी में दाखिला लिया था. यहां वह 2015 में छात्रसंघ का अध्यक्ष चुना गया. 2015 में कन्हैया कुमार ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के ऐसे पहले सदस्य बने जो जेएनयू में छात्र संघ के अध्यक्ष पद के लिए चुने गए. उन्होंने इस पद के लिए एआईएसए, एबीवीपी, एसएफआई और एनएसयूआई के सदस्यों को हराया. कन्हैया को एक बेहतरीन वक्ता के तौर पर भी जाना जाता है. जेएनयू छात्रसंघ चुनाव से एक दिन पहले दी गई उनकी स्पीच को ही उसकी जीत का कारण माना जाता है. वहीं जब कन्हैया साल 2016 में देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार हुआ था तो उसके पिता जयशंकर ने कहा था कि राजनीतिक द्वेषता के कारण उनके बेटे को फंसाया गया है क्योंकि जेएनयू में एबीवीपी की करारी हार हुई थी. इसलिए खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली बात बीजेपी सरकार चरितार्थ कर रही है.