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घुसपैठियों से ये भयानक काम करवाएगी मोदी सरकार?

देश में इन दिनों नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए के खिलाफ बवाल मचा हुआ है. इसके साथ ही राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी का मुद्दा भी लोगों के मन में डर पैदा कर रहा है. सीएए और एनआरसी दोनों ही एक दूसरे से काफी जुड़े हुए हैं. लेकिन दोनों ही एक दूसरे से काफी अलग भी हैं. एक तरफ सीएए जहां शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात करता है तो वहीं एनआरसी के जरिए घुसपैठियों का पता लगाया जाता है. शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात तो समझ में आती लेकिन सवाल ये है कि एनआरसी के जरिए सामने आए घुसपैठियों से सरकार क्या करवाएगी? आइए जानते हैं...

डिटेंशन कैंप
दूसरे देशों से अवैध घुसपैठ करने वालों को एनआरसी के जरिए सामने लाने के बाद सरकार उनके डिटेंशन कैंपों में भेज सकती है. डिटेंशन कैंप उन कैंपों को कहा जाता है जहां घुसपैठियों को हिरासत में रखा जाता है. डिटेंशन कैंप में घुसपैठियों को बाहरी दुनिया से बिल्कुल अलग रखा जाता है. इनमें घुसपैठियों को बहुत कम सुविधाएं दी जाती है. डिटेंशन कैंप प्रोपर तरीके से जेल नहीं होती है लेकिन इसे खुली जेल के तौर पर देखा जा सकता है.

घर वापसी
घुसपैठियों का पता लगाने के बाद सरकार उन्हें वो जिस देश से आए हैं उस देश में भेजने की प्रक्रिया को शुरू कर सकती है. इसके साथ ही सरकार घुसपैठियों को अपने देश से निकालकर उनके देश में वापस भेज सकती है. हालांकि ऐसा करना आसान नहीं होता है क्योंकि दूसरे देश उन्हें अपना नागरिक मानने से इनकार कर सकते हैं.

मजदूरी
घुसपैठियों को पकड़ने के बाद सरकार के पास एक और विकल्प सामने आता है. ये ऑप्शन है कि सरकार घुसपैठियों से मजदूरी करवा सकती है. मजदूरी करवाकर सरकार घुसपैठियों को लेबर के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है. ऐसे में सरकार के मजदूरी से जुड़े कई काम आसान हो सकते हैं.

देश निकाला
घुसपैठियों की पहचान करने के बाद सरकार के पास उनको रखने की समस्या तो आएगी ही... ऐसे में सरकार अगर उन्हें डिटेंशन कैंप में नहीं रख पा रही है और मजदूरी की जरूरत भी ज्यादा नहीं है... साथ ही वो जहां के वो नागरिक हैं वही देश उन्हें लेने से इनकार कर दे तो सरकार उनको देश से बाहर खदेड़ सकती है. ऐसे में देश से बाहर निकल जाने का आदेश सरकार के जरिए घुसपैठियों को दिया जा सकता है.

नागरिकता
घुसपैठिया आखिरकार घुसपैठिया ही होता है. हालांकि जरूरी नहीं कि हर घुसपैठिया देश के लिए खतरा ही हो. ऐसे में सरकार घुसपैठियों में से ऐसे लोगों की पहचान कर सकती है जो देश की अर्थव्यवस्था में योगदान कर सकते हैं. ऐसे घुसपैठियों को नागरिकता देने पर भी सरकार विचार कर सकती है. साथ ही सरकार ऐसे घुसपैठियों का भी पता लगा सकती है जो पीड़ित होकर देश में आए हैं और उनका इरादा गलत न हो. सरकार के जरिए पीड़ित लोगों को नागरिकता देने का फैसला भी किया जा सकता है.

दोस्तों, घुसपैठियों की धड़पकड़ के लिए मोदी सरकार अपना कदम बढ़ा चुकी है. ऐसे में आने वाले वक्त में पता चल जाएगा कि घुसपैठियों के साथ सरकार क्या करने वाली है. दोस्तों, कमेंट कर जरूर बताएं कि देश के लिए एनआरसी सही है या नहीं?