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क्या होती है Z Plus सुरक्षा और इस पर कितना खर्चा आता है?

भारत में अति विशिष्ट व्यक्तियों, नेताओं, खिलाड़ियों और फिल्मी सितारों को 'जेड प्लस' श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई जाती है.

भारत में प्रतिष्ठित व्यक्तियों के लिए यानी VIP के लिए किसी प्रकार का जान का खतरा ना हो इसलिए उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाती है. दोस्तों, भारत में नेताओं या बड़ी शख्सियतों को मुख्य तौर पर चार प्रकार की सुरक्षा दी जाती है. इन चार प्रकार की सुरक्षा को जेड प्लस, जेड, वाई और एक्स श्रेणी में बांटा गया है. किसी नेता या अधिकारी को कौनसी सुरक्षा प्रदान करनी है, ये इसी श्रेणी के आधार पर तय किया जाता है. देश में VIP सुरक्षा का ध्यान रखकर ये सुरक्षा प्रदान की जाती है. किसी राजनीतिक व्यक्ति को या किसी खास व्यक्ति को यह सुरक्षा दी जाती है. किसी VIP पर खतरा ना हो इसके लिए यह सुरक्षा दी जाती है. इनमें से कुछ को Z Plus सुरक्षा मिलती है. Z Plus सुरक्षा श्रेणी भारत में सबसे उच्च दर्जी की सुरक्षा मानी जाती है. इस सुरक्षा श्रेणी में सुरक्षा में लगने वाले सुरक्षाकर्मियों की संख्या, सुरक्षा के मानक और गुणवत्ता टॉप क्लास के होते हैं. हालांकि देश की आम जनता इस उच्च स्तर की सुरक्षा के बारे में ज्यादा डिटेल से नहीं जानती हैं. तो आइए दोस्तों, आज हम आपको बताते हैं कि आखिर ये Z Plus सुरक्षा है क्या.... लेकिन दोस्तों, इससे पहले अगर आपने हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो तुरंत सब्सक्राइब करें...

दोस्तों, आजादी के बाद अनेक फोर्स भारत में आई पर जब लोगों को अपनी जान का खतरा सताने लगा तो अनेक अन्य बलों को गठन किया गया था . इसी कड़ी में Z Plus Security भी सामने आई. इसका गठन 8 अप्रैल 1985 में किया गया था. इसमें शामिल किये जाने वाले जवानों को एक विशेष रूप की ट्रेनिंग दी जाती है. जिसके बाद ही भारत के प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री को SPG कमांडों का सुरक्षा कवच मिलता है. एक अन्य बात यह भी जाननी जरूरी है कुछ चंद गिने चुने लोगों को ही ये सुरक्षा दी गई है.

जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा देश की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है. यह वीवीआईपी श्रेणी की सुरक्षा मानी जाती है. सभी प्रकार की सुरक्षा मानकों में इसे सबसे मजबूत और सुरक्षित माना जाता है. इस सुरक्षा में जवानों को SPG यानी Special Protection Group, NSG यानी National Security Guard, ITBP  यानी Indo- Tibetan Border Police और CRPF यानी Central Reserve Police Force से चुना जाता है.  Z Plus सुरक्षा में SPG, NSG, ITBP और CRPF के जवना ही होते हैं. ऐसा माना जाता है कि जेड प्लस सुरक्षा के बीच परिंदा भी पर नहीं मार सकता. इस तरह की सुरक्षा अति महत्वपूर्ण और सुरक्षा की दृष्टि से अति संवेदनशील व्यक्ति को प्रदान की जाती है. इस श्रेणी की सुरक्षा में 36 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं. इसमें एनएसजी और एसपीजी के कमांडो शामिल रहते हैं. इस सुरक्षा में पहले घेरे की जिम्मेदारी एनएसजी की होती है जबकि दूसरी परत एसपीजी कमांडो की होती है. इसके अलावा आईटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान भी जेड प्लस सुरक्षा श्रेणी में शामिल रहते हैं. 

Z Plus सुरक्षा प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री के अलावा बेहद खास और बड़ी शख्सियतों को मिलती है. इसमें इन्हें SPG कमांडो सुरक्षा कवच प्रदान करते है. जेड प्लस सुरक्षा में सुरक्षाकर्मी वीवीआईपी शख्स को अंग्रेजी अक्षर ‘Z’ के रणनीति के तहत सुरक्षा घेरे में रखे रहते हैं और किसी भी तरह की खतरे की स्थिति में हमला होने के साथ ही सुरक्षाकर्मी VIP को सुरक्षित स्थान तक पहुंचा देते हैं. इस सुरक्षा श्रेणी में 8 घंटे की ड्यूटी के आधार पर 24 घंटे में 108 जवान सुरक्षा में तैनात होते हैं. इस वीवीआईपी सुरक्षा श्रेणी में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड विशेष रूप से तैनात किए जाते हैं.

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कैसे मिलती है सुरक्षा?
सुरक्षा हासिल करने के लिए सुरक्षा की मांग करने वाले को संभावित खतरा बता कर सरकार के सामने आवेदन करना होता है. यह आवेदन उसे अपने घर के नजदीक करना पड़ता है. फिर राज्य सरकार उस व्यक्ति के बताए खतरे का पता लगाने के लिए खुफिया एजेंसियों को केस सौंपती है और रिपोर्ट मांगती है. जब खतरे की पुष्टि हो जाती है तब राज्य में गृह सचिव, महानिदेशक और मुख्य सचिव की एक समिति यह तय करती है कि उस व्यक्ति को किस श्रेणी की सुरक्षा दी जाए. इसके बाद औपचारिक मंजूरी के लिए इस व्यक्ति का ब्यौरा केंद्री.य गृह मंत्रलय को भी दिया जाता है. गृह सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति खुफिया रिपोर्ट को देखकर ये तय करती है कि किसी व्यक्ति को कितना खतरा है और उसे किस श्रेणी की सुरक्षा दी जानी है. 

भारत में अति विशिष्ट व्यक्तियों, नेताओं, खिलाड़ियों और फिल्मी सितारों को 'जेड प्लस' श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई जाती है. वहीं राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट जज, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, प्रमुख नेता और देश के किसी प्रसिद्ध कलाकार को भी ये सुरक्षा मिल सकती है. एनएसजी बड़े पैमाने पर 'जेड प्लस' श्रेणी की सुरक्षा वीआईपी और वीवीआईपी को देती है. कई एनएसजी जवान स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के तहत प्रधानमंत्री की सुरक्षा करते हैं. दोस्तों, अगर किसी व्यक्ति को जेड प्लस श्रेणी की सुविधा दी गई है तो उसे पूरे देश में यह सुविधा मिलेगी. इसके लिए एक मैकेनिज्म होता है. जेड प्लस श्रेणी कि सुरक्षा में एनएसजी या सीआईएसएफ के जवान तैनात रहते है, लेकिन जब वह व्यक्ति राज्य से बाहर जाता है तो कुछ ही जवान उसके साथ रहते हैं, बाकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उस राज्य की होती है, जहां वह व्यक्ति जा रहा होता है. इसके लिए वीआईपी को अपने दौरे की पूर्व सूचना राज्य को देनी होती है. सुरक्षा इंतजामों की इस प्रक्रिया को कतई उजागर नहीं किया जाता है.

वहीं दोस्तों, इस सुरक्षा के लिए सरकार को एक बड़ा बजट भी निर्धारित करना होता है. इस सुरक्षा में सरकार का हर साल अरबों रुपए खर्च होता है. वहीं अगर हम बात करें तो सिर्फ एक व्यक्ति को जेड प्लस की सुरक्षा देने में ही हर महीने 25 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च आता है. वहीं सालाना तौर पर 250 से 300 करोड़ रुपए का बजट इस सुरक्षा के लिए खर्च किया जाता हैं.