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लिफ्ट से चांद पर पहुंचना होगा आसान, चंद्रयान जैसे मिशन की भी जरूरत नहीं?

एक अंतरिक्ष लिफ्ट या स्पेस लिफ्ट एक भौतिक संरचना है जो जमीन को अंतरिक्ष से जोड़ती है. सीधे-सीधे शब्दों में कहें तो जमीन से अंतरिक्ष में जाने के लिए जिस लिफ्ट का इस्तेमाल होगा, उसे ही स्पेस लिफ्ट कहते हैं

अंतरिक्ष में अपने सैटेलाइट को भेजने के लिए दुनिया विमान का सहारा लेती है. वैज्ञानिकों के जरिए तैयार इन विमानों से अंतरिक्ष में जाया जा सकता है. हाल ही में भारत ने अपना चंद्रयान-2 भी अंतरिक्ष में भेजा है. इसकी मदद से भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव की जानकारियां हासिल करेगा. लेकिन दोस्तों, इस तरह के मिशन में खर्चा काफी ज्यादा है. चंद्रयान-2 को अंतरिक्ष में भेजने में ही सैंकड़ों करोड़ रुपयों का खर्च आया है. दोस्तों, इसी के मद्देनजर अब अंतरिक्ष में जाने के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल होने वाला है. चौंक गए न आप, लेकिन ये बात सही है. आने वाले भविष्य में विमान से नहीं बल्कि लिफ्ट के माध्यम से आसान से स्पेस में पहुंचा जा सकता है. दोस्तों, क्या आप इस स्पेस लिफ्ट के बारे में जानते हैं? नहीं जानते हैं तो आइए हम आपको इसकी जानकारी देते हैं लेकिन दोस्तों, अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो नए अपडेट्स पाने के लिए जल्द से जल्द सब्सक्राइब कर लें. आइए शुरू करते हैं.

दोस्तों, एक अंतरिक्ष लिफ्ट या स्पेस लिफ्ट एक भौतिक संरचना है जो जमीन को अंतरिक्ष से जोड़ती है. सीधे-सीधे शब्दों में कहें तो जमीन से अंतरिक्ष में जाने के लिए जिस लिफ्ट का इस्तेमाल होगा, उसे ही स्पेस लिफ्ट कहते हैं. स्पेस लिफ्ट इंसानों को ब्रह्मांड से जोड़ेगी. अगर धरती और अंतरिक्ष के बीच स्पेस लिफ्ट जैसी सरंचना तैयार होती है तो यह आविष्कार भविष्य के लिए काफी अहम माना जाएगा क्योंकि स्पेस लिफ्ट की मदद से अंतरिक्ष पर जाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा. साथ ही स्पेस लिफ्ट की मदद से अंतरिक्ष पर जाने वाले विमानों का खर्चा भी बच जाएगा.

इस लिफ्ट की मदद से धरती से अंतरिक्ष में इंसानों को ही नहीं, बल्कि कई उकरणों को भी ले जाना संभव हो सकेगा. फिलहाल अंतरिक्ष पर भेजे जाने वाले रॉकेट अलग-अलग क्षमता के होते हैं. ऐसे में ज्यादा उपकरणों को अंतरिक्ष में भेजे जाने से लागत भी बढ़ जाती है. साथ ही रॉकेट के फेल हो जाने से मिशन भी अटक जाता है. लेकिन स्पेस लिफ्ट से ऐसी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा. स्पेस लिफ्ट के माध्यम से अंतरिक्ष तक पहुंचने की लागत लगभग 10 डॉलर प्रति किलोग्राम तक कम हो सकती है. हालांकि दोस्तों, वर्तमान में दुनिया की सबसे लंबी इमारत बुर्ज खलीफा है. ऐसे में अंतरिक्ष तक लिफ्ट तैयार करना इंजीनियरिंग के सामने एक चुनौती है. क्योंकि अंतरिक्ष में जाने के लिए काफी लंबी दूरी की लिफ्ट तैयार करनी होगी जो कि आसान प्रक्रिया नहीं है.

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दुनिया में स्पेस एलिवेटर का सपना सदियों से देखा जा रहा है. साल 1895 में रूसी वैज्ञानिक कांस्टेंट (Konstantin Tsiolkovsky) ने पेरिस के एफिल टावर को देखने के बाद पहली बार स्पेस एलीवेटर बनाने का विचार किया था. इस के करीब 120 साल बाद अब अंतरिक्ष तक ले जाने वाली स्पेस एलीवेटर का शुरुआती ट्रायल शुरू हो चुका है. वैज्ञानिकों के मुताबिक साल 2050 तक इस स्पेस एलीवेटर द्वारा अंतरिक्ष की सैर का सपना पूरा होने की उम्मीद है. जापान के साइंटिस्टों ने स्पेस में ले जाने वाली लिफ्ट यानी स्पेस एलिवेटर को विकसित करने पर काम शुरू किया है. जिसका पहला ट्रायल भी हो चुका है.

लेकिन दोस्तों, अब सवाल उठता है कि आखिर स्पेस लिफ्ट तैयार कैसे होगी. तो दोस्तों, कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि भविष्य की स्पेस एलीवेटर धरती पर किसी पोर्ट से लांच होगी और एक कटेंनर की मदद से लोगों को धरती के ऑर्बिट स्टेशन तक ले जाएगी. जिसकी ऊंचाई करीब 36000 किलोमीटर होगी. अंतरिक्ष में ऐलीवेटर केबल को सपोर्ट देने के लिए 2 बिग सैटेलाइट्स मिलकर एक बेस स्टेशन तैयार करेंगे, जो एलीवेटर सिस्टम के पूरे वजन को सहने में सक्षम होगा.

वहीं जापान इस स्पेस एलिवेटर प्रोग्राम का एक छोटा ट्रायल वर्जन टेस्ट कर चुका है. जिसके लिए जापान की सिजुका यूनिवर्सिटी में तमाम टेस्टिंग इक्यूपमेंट विकसित किए गए. शिजूका यूनीवर्सिटी के साथ मिलकर इस स्पेस एलीवेटर प्रोजेक्ट पर काम कर रही कंस्ट्रक्शन कंपनी का कहना है कि इस एलीवेटर के लिए वो कार्बन नैनोट्यूब तकनीक का इस्तेमाल करेंगे, जिसकी मजबूती स्टील से 20 गुना ज्यादा होगी. इससे ही लिफ्ट का मेन शाफ्ट तैयार होगा. इस पर ही खिसकते हुए स्पेस एलीवेटर लोगों को 60 हजार मील यानि करीब 96 हजार किमी ऊंचाई तक ले जाएगी. लिफ्ट के उस एलिवेटर बॉक्स में कैमरे भी लगे होंगे जिससे सैटेलाइट और लिफ्ट की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके.

हालांकि अब सवाल उठता है कि स्पेस लिफ्ट बनाए जाने के लिए क्या-क्या चुनौतियां सामने हैं. तो दोस्तों, चुनौतियां कम नहीं है. क्योंकि एक स्पेस लिफ्ट बनाए जाने के बाद भले ही अंतरिक्ष में जाने की लागत कम आए लेकिन स्पेस लिफ्ट बनाए जाने में लागत काफी आएगी. ये कोई छोटी-मोटी परियोजना न होकर एक अंतरार्ष्ट्रीय स्तर की परियोजना होगी. जिसमें स्पेस लिफ्ट को तैयार करने में काफी आर्थिक सहारे की जरूरत होगी. इसके अलावा स्पेस लिफ्ट के रखरखाव की लागत भी इस पर असर डालेगी. स्पेस लिफ्ट के रखरखाव से ही ये सालों साल टिके रहने में सक्षम होगी.

इसके अलावा एक चुनौती ये भी है कि मौसम से इस लिफ्ट को कैसे सुरक्षित रखा जाए. दोस्तों, खराब मौसम में कहीं स्पेस लिफ्ट डगमगा न जाए, इसके लिए भी उपाय करने की जरूर सामने आएगी. वहीं बारिश और तेज हवाओं में कैसे स्पेस लिफ्ट टिके रहेगी, इसको लेकर भी वैज्ञानिकों को काफी दिमाग खपाना होगी. वहीं स्पेस लिफ्ट को आकाशीय बिजली से भी खतरा हो सकता है. बारिश के वक्त आकाश की बिजली से स्पेस लिफ्ट का बचाव कैसे होगा. ये सवाल भी काफी परेशानी पैदा करने वाली है.

वहीं दोस्तों, प्राकृतिक आपदाएं कहीं स्पेस लिफ्ट को नुकसान न पहुंचा दे, इसके लिए भी उपाय किए जाने जरूरी है क्योंकि कोई भी नहीं चाहेगा कि इतना बड़ा प्रोजेक्ट चुटकियों में धराशायी हो जाए. जापान में वैसे भी सालभर सुनामी और बाढ़ का खतरा रहता है. इसके अलावा भूकंप की मार तो आए दिन जापान झेलता ही रहता है. ऐसे में भूकंप, बाढ़ या सुनामी से स्पेस लिफ्ट को कैसे बचाया जाए, इसका इंतजाम पहले ही कर लिया जाए तो स्पेस लिफ्ट आने वाले दिनों में दुनिया के लिए वरदान साबित हो सकती है.