जीन एडिटिंग से इंसानों में किया जा सकता है बदलाव, काफी विवादास्पद भी है यह प्रक्रिया

हमारा शरीर रहस्यों से भरा हुआ है. अभी तक इंसान अपने शरीर के सारे रहस्यों का पता नहीं लगा पाया है. वैज्ञानिक भी शरीर के रहस्यों को जानने के लिए जुटे हुए हैं, जिसके कारण आए दिन शरीर से जुड़े कई नए रहस्य उजागर होते रहते हैं. वहीं हमारे शरीर में जीन काफी महत्वपूर्ण होते हैं. हमारा शरीर बहुत सारी छोटी-छोटी कोशिकाओं से मिलकर बना हुआ है और कोशिका में केन्द्रक पाया जाता है. इस केन्द्रक में गुणसूत्र होते हैं. ये गुणसूत्र या क्रोमोसोम आनुवंशिक गुणों को निर्धारित भी करते हैं और उन्हें संचारित भी करते हैं. कोशिकाओं पर पाए जाने वाले इन क्रोमोसोम्स पर डीएनए पाया जाता है जिसका आकार घुमावदार सीढ़ी की तरह होता है. इसी डीएनए का बहुत छोटा सा खंड जीन होता है जो आनुवंशिकता के बुनियादी घटक होते हैं और आनुवंशिक लक्षणों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का काम करते हैं. जीन कोशिकाओं को विशेष प्रकार के प्रोटीन का निर्माण करने के लिए निर्देश भी देते हैं. दोस्तों, आपने यहां जीन के बारे में तो जान लिया की जीन क्या होते हैं लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि ‘जीन एडिटिंग’ किसे कहते हैं. नहीं जानते तो आइए जान लेते हैं…

डिजायनर बेबी का कॉन्सेप्ट विवादास्पद है. लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि इसके पीछे का विज्ञान बहुत क्रांतिकारी है. जीन एडिटिंग पर दुनिया के कई देशों में काम चल रहा है. वैज्ञानिकों का एक धड़ा मानता है कि भविष्य में जीन थैरेपी के जरिए ही मानव शरीर के खराब हो चुके अंग बदले जाएंगे. दरअसल, जीन एडिटिंग एक प्रकार की जेनेटिक इंजीनियरिंग है, जिसमें एक जीव के जीनोम में डीएनए डाला जाता है, नष्ट किया जाता है या बदल दिया जाता है. इसके लिए इंजीनियर्ड न्युक्लिएजों या ‘आणविक कैंची’ का उपयोग किया जाता है.

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इन दिनों दुनिया में इस बात पर काफी बहस हो रही है कि क्या इंसानों के जीन में फेरबदल करके ‘डिजाइनर बच्चे’ बनाए जाने चाहिए? डिजाइनर से मतलब ये कि आप अपने बच्चे में जो खूबियां देखना चाहते हैं वो उसके जीन में फेरबदल करके डाल दी जाएं वो भी कुदरत के नियम कायदों से छेड़खानी करते हुए. जीन एडिटिंग इसीलिए अस्तित्व में आई है. इसकी मदद से इंसानों के डीएनए में बदलाव किया जा सकता है. इसके जरिए, किसी भी होने वाले बच्चे के जीन में वो खूबियां डाली जा सकती हैं, जैसी उसके मां-बाप की ख्वाहिश है.

जीन एडिटिंग CRISPR-Cas9 के नाम से जानी जाने वाली तकनीक की मदद से की जाती है. CRISPR-Cas9 तकनीक असल में कैंचियों के जोड़े की तरह काम करती है. यह बीमारी के लिए जिम्मेदार जीनोम के खास हिस्से को काट देती है. कटिंग से खाली हुई जगह को नए डीएनए से भर दिया जाता है. हालांकि जीन एडिटिंग पर काफी विवाद भी होते हैं. गंभीर आनुवांशिक बीमारियां दूर करने में सक्षम समझी जाने वाली इस तकनीक के दुरुपयोग की भी आशंका है. वैज्ञानिकों के एक वर्ग को लगता है कि जीन एडिटिंग की मदद से एक जैसे डिजायनर बच्चे विकसित किए जा सकते हैं. फिलहाल नैतिक बहस के बीच सिर्फ कुछ ही देशों में इस पर परीक्षण चल रहा है.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर बताएं कि एक हाथ में कितनी ‘अगुंलियां’ होती है…?

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