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डिप्रेशन क्या होता है? क्यों होता है?

by Gwriter

बॉलीवुड के उभरते सितारे सुशांत सिंह राजपूत ने सुसाइड कर लिया. 34 साल की उम्र में सुशांत के पास दौलत, शोहरत सब थी लेकिन फिर भी सुशांत ने अपने गले में फांसी का फंदा लगा लिया. इस सुसाइड की वजह डिप्रेशन को माना जा रहा है. लेकिन दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि आखिर ये डिप्रेशन क्या होता है….? क्यों होता है…? और किसे होता है…?

सबसे पहले समझते हैं कि डिप्रेशन क्या है. दोस्तों, हमारी लाइफ में कई ऐसी घटनाएं होती है जिनका हमारे मेंटल हेल्थ पर गहरा असर होता है. कुछ बातें होती हैं जो अंदर ही अंदर खाए जाती हैं. डिप्रेशन के लक्षणों को उदासी, नुकसान या ऐसे गुस्से के रूप में समझा जा सकता है, जिससे किसी इंसान की रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ता है. डिप्रेशन का इलाज नहीं किया गया तो यह हमारे मेंटल हेल्थ पर काफी बुरा असर डाल सकता है. कुछ लोग खुद को जिंदगी से हारा हुआ समझने लगते हैं. जिसके कारण लोग सुसाइड तक कर लेते हैं.

अब जानते हैं कि डिप्रेशन क्यों होता है? दोस्तों, हम में से ज्यादातर लोग किसी एक ऐसी बात को लेकर उलझ जाते हैं, जिससे बाहर निकलना मुश्किल सा लगता है. डिप्रेशन हमें अंदर से खोखला कर सकता है. डिप्रेशन ज्यादातर ऐसे लोगों को होता है जिनकी जिंदगी में कोई बहुत बड़ा हादसा हुआ हो या जिसके पास दुखी होने की बड़ी वजहें हों. ये वजहें घरेलू हो सकती हैं खुद कि निजी हो सकती हैं. वहीं माना जाता है कि कुछ हद तक हमारे शरीर में हार्मोन में बदलाव होने से भी व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो जाता है. यही वजह है कि डिप्रेशन में आप चाहकर भी खुश नहीं रह पाते. नौकरी जाना, बिजनेस में घाटा होने के कारण भी इंसान को डिप्रेशन हो सकता है. इसके अलावा दोस्तों, मन चाहा प्यार न मिलने के कारण, या इमोशंस हर्ट होने के कारण भी डिप्रेशन हो सकता है. आपकी लव लाइफ या या मैरिज लाइफ किस तरह की चल रही या आपके रिलेशनशिप में कोई समस्याएं आ रही हैं तो ये भी डिप्रेशन को पैदा कर सकती हैं. किसी काम में अगर उम्मीद के मुताबिक कामयाबी न मिले या वह काम बिगड़ जाए या कर्ज में डूबने की स्थिति में भी इंसान डिप्रेशन में चला जाता है.

आपने किसी ऐसे इंसान को देखा होगा, जो अपने आप से बातें करता रहता है या फिर कोई ऐसा जो हमेशा मरने की बातें करता है. हर छोटी-छोटी बात पर रो देता है. आप उन खुशमिजाज लोगों से भी मिले होंगे, जो अचानक से किसी ऐसी चिंता में चले जाते हैं जिससे बाहर निकलना उन्हें मुश्किल लगता है. ऐसे लोग डिप्रेशन या मानसिक परेशानी के शिकार होते है. दोस्तों, डिप्रेशन एक हंसते खेलते इंसान को भी हो सकता है. लेकिन जरूरत है सही वक्त पर डिप्रेशन का इलाज कराने की. अगर आपको खुद में या अपने जान पहचान के लोगों में कुछ भी डिप्रेशन जैसा लगे तो सायकाइट्रिस्ट या मनोचिकित्सक के पास जाएं. सलाह लेने में कोई कोताही न बरतें. सायकाइट्रिस्ट की बताई दवाओं के नियमित रूप से सेवन करें.

इसके अलावा आप कई तरीकों को अपनाकर भी अपना डिप्रेशन दूर कर सकते हैं. डिप्रेशन दूर करने के लिए आठ घंटे की नींद लें. नींद पूरी होगी तो दिमाग तरोताजा होगा और नकारात्मक भाव मन में कम आएंगे. इसके अलावा रोजाना सूरज की रोशनी में कुछ देर बैठें. बाहर टहलने जाएं. दोस्तों से बातें करें. अपने काम का पूरा हिसाब रखें. दिन भर में आप कितना काम करते हैं और किस एक्टिविटी को कितना समय देते हैं इस पर जरूर गौर करें. इससे आपको सभी गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने में आसानी होगी. योग को दिनचर्या में शामिल करें. मेडिटेशन से भी काफी ज्यादा आराम महसूस होगा.

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