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दंगों के समय इंटरनेट बंद होने से क्या नुकसान होता है?

‘नागरिकता संशोधन विधेयक’ के पास होने के बाद से लेकर अब तक देशभर में कई राज्यों में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन को देखा जा रहा है। यह प्रदर्शन इतने हिंसात्मक हो गए है कि जिसे चलते सरकार को वहाँ इंटरनेट सेवाएं बंद करने के अलावा कर्फ्यू लगाना पड़ा।

नागरिकता संशोधन विधेयकके पास होने के बाद से लेकर अब तक देशभर में कई राज्यों में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन को देखा जा रहा है। यह प्रदर्शन इतने हिंसात्मक हो गए है कि जिसे चलते सरकार को वहाँ इंटरनेट सेवाएं बंद करने के अलावा कर्फ्यू लगाना पड़ा।

पूर्वोत्तर के राज्यों की बात की जाये तो असम के 10 जिलों में इंटरनेट सेवा के साथ-साथ मोबाइल सेवाओं को भी बंद किया गया। साथ ही गुवाहाटी और कामरूप जिले में कर्फ्यू लगाया गया। असम ही नहीं दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़, यूपी, बिहार, केरल, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में भी बिल के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे है।

दोस्तों बता दें कि इसके चलते पूरे U.P और कर्नाटक में धारा 144 को लागू कर दिया गया है। यूपी के मऊ में तो प्रदर्शनकारी इतने उग्र हो गए थे कि उन्होंने पुलिस थाने में घुसकर आग लगा दी और साथ ही वहाँ तोड़फोड़ करी। जिसके चलते धारा 144 को लागू करना पड़ा। U.P के करीब 21 जिलों में इंटरनेट सेवा को रोक दिया गया।

हिंसक विरोध प्रदर्शन की खबर आते ही  पुलिस प्रशासन द्वारा सबसे पहले वहाँ की इंटरनेट सेवा को बंद किया जाता है। ताकि आपत्तिजनक मैसेज को रोकने के अलावा अफवाहों पर लगाम कसी जा सके। बढ़ती हिंसा को देख ही गाजियाबाद के डीएम ने मोबाइल कंपनियों से अपील की थी कि वो इंटरनेट सेवा को बंद कर दें।

तो दोस्तों, अब जानते है कि आखिर इंटरनेट सेवा बंद करवाने के पीछे क्या कानून है?  दरअसल, हिंसात्मक दंगो व प्रदर्शनों के समय sms या वॉट्सऐप के माध्यम से बड़ी जल्दी किसी भी प्रकार की अफवाह फैलती है। तो इन्हें रोकने के लिए इंटरनेट सेवा बंद करवा दी जाती है और इसे टेलीकॉम सर्विस (पब्लिक इमरजेंसी या पब्लिक सेफ्टी) नियम, 2017 के अंतर्गत किया जाता है।

टेलीकॉम सर्विस नियम में इस बात का जिक्र है कि देश की एकता और अखंडता को नुकसान से बचाने की दिशा में संचार माध्यमों पर रोक लगाई जा सकती है। वैसे धारा 144 के जरिए भी इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाई जा रही है। एक बात और कि इंटरनेट सेवा बंद करवाने का अधिकार पुलिस के पास नहीं है बल्कि गृहमंत्रालय के सचिव के पास हैं। लेकिन हालत बिगड़ते देख डिप्टी कमिश्नर भी इसका आदेश दें सकता है। जिसके लिए रिव्यू कमिटी को एक written statement देनी होती है और फिर उसके आदेश पर सिर्फ 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवा बंद की जा सकती

अब इसके चलते क्या नुकसान होता है यह भी जान लेते है। आप ऑनलाइन बैकिंग नहीं कर सकते। तो अचानक कोई बड़ी ज़रूरत आ पड़ी तो आप मुश्किल में फंस जाते है। अगर आपके पास cash नहीं है, तो ऑनलाइन payment के चक्कर में बहुत बार छोटे-छोटे काम भी अटक जाते है। जैसे taxi वाले को Paytm करना या online फूड ऑर्डर करते समय दिक्कत या किराने की दुकान से कोई समान खरीदते वक़्त दिक्कत। कोई urgent mail भेजना हो या कोई document download करके उसपर काम शुरू करना हो।

लेकिन दोस्तों, जब देशहित की बात आती है, तो उसके आगे इस तरह की दिक्कतों का सामना करना कोई बड़ी बात नहीं है। सबसे ज़रूरी है कि अफवाहों का शिकार न बना जाए और न किसीको बनाया जाए।

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