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चंद्रयान-2: लॉन्चिंग से पहले इसरो ये टोटका नहीं करता तो मिशन फेल हो जाता?

रूस का कॉस्मोनॉट्स टोटके और अंधविश्वास के मामले में काफी आगे है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग कर दी है. इस लॉन्चिंग के बाद देश के अलावा दुनिया भर के लोगों ने इसरो को इस मिशन के लिए बधाई दी है. इसरो के इस मिशन का उद्देश्य चांद पर पानी की खोज करना है. इसके साथ ही इसरो पता लगाना चाहता है कि क्या चांद पर मानव को भी बसाया जा सकता है नहीं. हालांकि दोस्तों, इन सवालों के जवाब जल्द ही पूरी दुनिया को मिल जाएंगे. दोस्तों एक बात आपने सुनी होगी कि वैज्ञानिक ज्यादातर तथ्यों पर विश्वास करते हैं. अंधविश्वास जैसी चीजों पर वैज्ञानिक ध्यान तक नहीं देते हैं. इसके अलावा भगवान पर भी वैज्ञानिक विश्वास नहीं करते है. वैज्ञानिक का मानना है कि भगवान जैसी कोई चीज दुनिया में नहीं होती है. वहीं वैज्ञानिक टूनों-टोटकों पर जैसी अंधविश्वासी जैसी बातों को भी दरकिनार करके चलते हैं. लेकिन दोस्तों, सच्चाई इससे कुछ अलग है. वैज्ञानिक भी टूने-टोटके करते हैं. कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि मिशन की सफलता के लिए ऐसे टूने टोकने करना फायदेमंद रहता है. यहां आपको एक बात ये भी बता दें कि चंद्रयान-2 के लॉन्चिंग से पहले इसरो ने भी इस मिशन की सफलता के लिए टोटका किया था. जी हां दोस्तों, आइए जानते हैं आखिरी इसरो के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग से पहले क्या टोटका किया. इसके अलावा दोस्तों, हम ये भी जानेंगे कि दुनिया के बाकि जगह स्पेश मिशन से पहले क्या-क्या टोटके किए जाते है. लेकिन दोस्तों, उससे पहले अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो नए अपडेट्स पाने के लिए जल्द से जल्द सब्सक्राइब कर लें. आइए शुरू करते हैं.

दोस्तों, इसरो के चेयरमैन के. सिवन को चंद्रयान 2 के लॉन्चिंग से पहले तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में पूजा करते हुए देखा गया था. के सेवन इस मंदर में पहुंचे और उन्हें मंदिर में पूजा करते हुए देखा गया. इसरो जब भी कोई मिशन करता है तो सबसे पहले पूजा जरूर करता है. पूजा करने के बाद ही इसरो के जरिए मिशन को लॉन्च किया जाता है. इसरो के जरिए किसी भी मिशन के लॉन्च से पहले पूजा करने की परंपरा काफी पहले से चली आ रही है. भगवान बालाजी और अन्य कई जाने माने प्रसिद्ध मंदिरों में इसरो के वैज्ञानिक मिशन से पहले पूजा करते हैं. हालांकि कई लोग इसे टोटका और अंधविश्वास मानते हैं और वैज्ञानिकों के किसी काम से पहले पूजा पाठ करने को लेकर सहमत नहीं हैं. दोस्तों, इसरो के जरिए भले ही ये टोटका हो लेकिन इसके कारण इसरो के मिशन सफल जरूर होते हैं.

इसके अलावा दोस्तों, भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के वैज्ञानिक जब भी किसी मिशन की कामयाबी के लिए भगवान बालाजी के मंदिर में जाकर पूजा करते हैं तो वहां पर रॉकेट का एक छोटा मॉडल भी चढ़ाते हैं. जी हां दोस्तों, इस रॉकेट को मंदिर में चढ़ाकर भगवान से इसरो के वैज्ञानिक सफलता की मांग करते हैं. इसरो के जरिए इतने टोटके ही नहीं किए जाते हैं. भारत में हर किसी चीज की कामयाबी के लिए कुमकुम का काफी महत्व होता है. इसरो भी स्पेश मिशन की कामयाबी के लिए कुमकुम का इस्तेमाल करता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इसरो की मशीनों पर स्पेश मिशन के दौरान कुमकुम भी लगाया जाता है. इसके अलावा कई वैज्ञानिक लॉन्च के दिन नई शर्ट पहनकर भी आते हैं.

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दोस्तों, इसरो के जरिए किए जाने वाले टोटके तो आपने जान लिए लेकिन इस लिस्ट में सिर्फ इसरो नहीं है जो मिशन से पहले टोटके और अंधविश्वास को मानता है दुनिया की तमाम नामी अंतरिक्ष एजेंसियों के नाम इस लिस्ट शामिल हैं और अमेरिका की नासा और रूस की कॉस्मोनॉट्स भी इससे अछूते नहीं हैं. आइए आपको बताते हैं वैज्ञानिकों  के अजीबोगरीब अंधविश्वास और टोटकों के बारे में. सबसे पहले बात नासा की करें तो दुनिया में सबसे मशहूर अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिक किसी भी मिशन को अंजाम देने से पहले मूंगफली खाते हैं. इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है. साल 1960 में रेंजर नाम का नासा का मिशन 6 बार असफल हुआ था. सातवें प्रयास में जब मिशन सफल हुआ तो एक वैज्ञानिक लैबोरेट्री में मूंगफली खा रहा था. बस यहीं से प्रथा चल पड़ी. यह परंपरा नासा में अब भी चलती आ रही है. जब इसरो ने अपना मंगलयान मिशन लॉन्च किया था तो शुभकामनाएं देते हुए नासा ने 'लकी पीनट्स लिखा था' मतलब मूंगफली शुभ हो.

वहीं दोस्तों रूस का कॉस्मोनॉट्स टोटके और अंधविश्वास के मामले में काफी आगे है. रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के टोटको के बारे में बात करें तो एक वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक रूसी अंतरिक्ष यात्री यान में सवार होने से पहले लॉन्चपैड तक ले जाने वाली बस के दाएं पहिए पर पेशाब करते हैं. इसके पीछे भी कहानी है. दरअसल, अप्रैल 1961 में सोवियत रूस के कॉस्मोनॉट्स एजेंसी के यूरी गागरिन दुनिया के पहले अंतरिक्ष यात्रा बने थे. मिशन शुरू होने के दौरान उन्हें पेशाब लगी और उन्होंने बस के पीछे जाकर दाहिने पहिए पर पेशाब की. यूरी का मिशन सफल रहा और इसी के बाद से कॉस्मोनॉट्स के अन्य अंतरिक्ष यात्रियों ने भी इस टोटके को फॉलो करना शुरू कर दिया.

इसके अलावा यूरी गागरिन ने अंतरिक्ष में जाने से पहले गाना सुनने की इच्छा जताई थी और उनके लिए रोमांटिक गाना बजाया गया था. तब से कॉस्मोनॉट्स में सभी अंतरिक्ष यात्री मिशन से पहले वही गाना सुनते हैं जो यूरी ने सुना था. हालांकि दोस्तों रूस 24 अक्टूबर को लॉन्चिंग नहीं करता है. दरअसल 24 अक्टूबर 1960 और 24 अक्टूबर 1963 को लॉन्च से पहले हादसों में कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. रूस इस तारीख को किसी भी अंतरिक्ष मिशन को अंजाम नहीं देता है.

मिशन से पहले यूरी गागलिन ने जिस गेस्ट बुक में साइन किए थे आज के अंतरिक्ष यात्री भी उसी बुक में सिग्नेचर करते हैं. रूस की अंतरिक्ष एजेंसी में हर सफल लॉन्च से पहले पौधे लगाने परंपरा भी है. इसके अलावा लॉन्च के दिन से पहले रूस के अंतरिक्ष यात्री उस रॉकेट को नहीं देखते जिस पर सवार होकर उन्हें अंतरिक्ष में जाना होता है.