ऐसे काम करता है मोटिवेशन का गणित, कभी नहीं कम होगा फोकस

अक्सर हम लोग एक काम को शुरू तो करते है लेकिन कुछ दिन तक उस काम को सही तरीके से करने के बाद उस काम से अपना फोकस लुज कर देते है. यह सिर्फ आपके साथ ही नहीं होता बल्कि सबके साथ होता है. हम लोग जब उस काम की शुरुआत करते हैं तब हम बहुत ज्यादा मोटीवेट होते हैं और पूरी लगन से उस काम को पूरा करते है और फिर धीरे धीरे यह मोटिवेशन खत्म हो जाता है और हम अपने काम से भटक जाते है.

मोटिवेशन का हमेशा बने रहना एक नामुमकिन जैसी चीज है. हमारी लाइफ में बहुत सारे उतार चढ़ाव आते रहते हैं जिसका असर हमारे मोटीवेट रहने पर भी होता है. मोटिवेशन आता-जाता रहता है लेकिन अगर आप मोटिवेशन को खो देते हो और उसे वापस लाने का प्रयास नहीं करते तो आप उस काम के प्रति जो लगन है उसे भी खो सकते हो. इसलिए जब भी आप अपने किसी काम को करने का मोटिवेशन खो देते हैं तो उसे तुरंत वापस लाएं और अपने अंदर से उस काम के प्रति इंस्पायर हो जाए. हमेशा खुद में मोटिवेशन बनाए रखने के लिए कुछ चीजों को अगर आप फॉलो करते हैं तो निश्चित तौर पर आप अपने अंदर मोटिवेशन को बनाए रख सकते हो. तो चलिए उन चीजों को जान लेते हैं.

रिवार्ड
अगर किसी स्टूडेंट से कहा जाए की उसे रोजाना 5 घंटे पढ़ाई करनी है तो हो सकता है कि वह आपके बार-बार कहने से भी रोज पढ़ाई न करे. वहीं अगर उसे कहा जाए कि रोज 5 घंटे पढ़ने पर उसे उसका मनपसंद गिफ्ट दिया जाएगा तो बेशक वो 5 पढ़ने के लिए मोटिवेट होगा. दरअसल, हर इंसान को अगर उसके जरिए किए जाने वाले काम के लिए रिवार्ड मिलता रहे तो वह मोटिवेट रहेगा.

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शुरुआत
कई बार काम की गंभीरता से वाकिफ होते हुए भी हम उसे समय से शुरू नहीं करते. इससे बाहर आने का एक प्रभावी तरीका है काम की शुरुआत कर देना और जिस काम को शुरू किया है उसे पूरा करके ही दम लेना. काम करना उतना मुश्किल नहीं होता, जितना काम की शुरुआत करना होता है, जब इस बाधा को पार कर लेंगे तो जानेंगे कि आपकी इच्छाशक्ति क्या कुछ कर सकती है.

आलस
कुछ लोग आलस को असफलता के साथ जोड़कर देखते हैं. कुछ इसे अतिरिक्त काम से पीछा छुड़ाने का तरीका मानते हैं. सिग्मंड फ्रॉयड का तर्क है कि लोग खुश होने के लिए आलस का सहारा लेते हैं, क्योंकि कुछ नहीं करके उन्हें खुशी मिलती है. कई बार लोग सोचते हैं कि काम करने पर उन्हें अपेक्षित नतीजा नहीं मिलेगा, इसीलिए वे काम टालते रहते हैं. ऐसे लोग यह धारणा विकसित कर लेते हैं कि आलसी होने पर उनका समय बचेगा. यह तरकीब कुछ मामलों में काम कर सकती है, लेकिन लंबे समय तक इसी को अपनाना नुकसान ही करता है. यह समझें कि काम देर से शुरू करना अतिरिक्त कामों से पार पाने का सही तरीका नहीं है. वहीं, अपने डर को आलस के पीछे ना छुपाएं. उसका सामना करें. इससे परेशानियां घटती नहीं, सिर्फ बढ़ती ही हैं और आलस से पार पाते से ही समस्या हल होने लगेगी, जिससे खुद इंसान मोटिवेट होगा.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर बताएं कि आप मोटिवेशन हासिल करने के लिए क्या करते हैं.

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