सरकार की नयी चाल – भूखें पेट मोदी, करते रहे दिनभर काम, अंत में हुया ये हाल !

भारतीय राजनीति की यह विशेषता है कि इसमें बॉलीवुड की फिल्मों की तरह मसालों की कोई कमी नहीं होती. ना ही नायकों की कमी है, ना खलनायकों की, ना चरित्र अभिनेताओं की और ना मसखरे विदूषकों की. और बिना बताए ही इनमें से हरेक के एक-दो उदाहरण आपकी आँखों के सामने से गुजर गए होंगे.

अभी 9 अप्रैल को कांग्रेस ने देश के बिगड़ते साम्प्रदायिक सौहार्द और दलितों पर हो रहे अत्याचारों का कारण बताकर एक उपवास का आयोजन रखा. वैसे हमारे देश में उपवास करने की लम्बी प्राचीन परम्परा रही है. लेकिन बदलते दौर में राजनैतिक उपवास आयोजित होने लगे हैं. तो आयोजन के पहले ही जी भरकर छोले-भटूरे खाते हुए कांग्रेसियों के चित्र बहुत वायरल हुए. कांग्रेसी राजकुमार के उपवास आयोजन का समय 10 से 4 बजे तक का था, जिसमें वे स्वयं 1 बजे बाद पहुँचे. घोषित तौर पर राहुल को बैठकर दो घंटे का ‘उपवास’ करना था. नेताओं की इस अव्यवस्था के कारण हमेशा की तरह इस बार के आयोजन को लेकर भी कांग्रेस की काफी भद्द पिटी.

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वहीँ भाजपा को भी बैठे-बैठाए एक बढ़िया मुद्दा मिल गया. उन्होंने भी 12 अप्रैल के दिन देशव्यापी उपवास का आयोजन रखा. इसके लिए विपक्ष का अलोकतांत्रिक रवैया और संसद ना चलने देने के कारण चुने गए. फर्क केवल यह रहा कि उनके इस आयोजन को देशव्यापी रूप देने का गम्भीर प्रयास हुआ. भाजपा के इस उपवास में प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह सहित पूरा मंत्रिमंडल शामिल हुआ. स्वयं प्रधानमंत्री ने जिला मुख्यालयों पर भी अनशन को व्यवस्थित रूप देने के लिए अपील की.

इस अपील का सकारात्मक परिणाम सामने आया. देश भर में विभिन्न स्थानों पर उपवास रखा गया जो कि वास्तव में दिन भर के लिए रहा. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आगामी चुनावी राज्य कर्नाटक में उपवास पर बैठे उनके साथ येदियुरप्पा भी थे. इसी प्रकार मुंबई, रांची, पटना, वाराणसी आदि सभी प्रमुख स्थानों पर विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों, राज्यमंत्रियों, संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उपवास रखा. कांग्रेस के ठीक उलट यह उपवास छोले-भटूरे वाला ना होकर दिन भर का वास्तविक उपवास रहा. बल्कि हुबली में जहाँ अमित शाह उपवास पर थे, वहाँ तो समीप की नाश्ते और खाने-पीने सम्बन्धी दुकानें ही बंद थी.

सबसे बड़ी बात यह रही कि प्रधानमंत्री ने उपवास पर रहते हुए चेन्नई में डिफेंस एक्सपो का उद्घाटन किया. जहाँ उनके साथ रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी उपस्थित थी. उपवास रखते हुए भी मोदी दिनभर अपने पूर्व नियोजित कार्यक्रमों में भाग लेते रहे.

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अलग तरीकों से कामों को करने के लिए प्रसिद्ध मोदी ने उपवास की राजनीति को भी नया रूप दे दिया. मंत्रिमंडल के सरदार के रूप में उन्होंने काम करते हुए उपवास रखा. एक तरफ जहाँ कांग्रेस के आयोजन में उपवास से अधिक खाने-पीने और गंभीरता ना होने की चर्चा मीडिया में छाई रही. वहीँ भाजपा अपने संगठित रूप में इस कमी को दूर करती नजर आई.

अगला वर्ष चुनावी है इसलिए ये तय है कि समय के आगे बढ़ने के साथ हमें अभी कई और नए प्रयोग और आयोजन देखने मिलेंगे. बस इंतजार करते रहिये.

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