बच्चे पैदा करने पर लगी रोक, अब बच्चा पैदा करना होगा गैर कानूनी?

संतान का सुख हर दंपति चाहता है, हर किसी की कामना होती है की उनका खुद का बच्चा हो. जिससे वह बच्चे के जन्म होने के पहले से लेकर उसके जन्म होने तक की हर गतिविधियों का सुख हासिल कर सके. पर कभी कभी कुछ ऐसी परिस्तिथियां हो जाती है जिसमे दंपति संतान सुख प्राप्त नहीं कर पाते हैं. लेकिन आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. इसके लिए इस आधुनिक युग में कई तकनीक आ चुकी है जो आपको संतान सुख पाने में मदद करती है. वहीं जिन लोगो को संतान नहीं हो पाती है उनके लिए सरोगेसी एक अच्छा विकल्प है. सरोगेसी को किराए की कोख भी कहा जाता है. ऐसे कपल्स अलग-अलग वजहों से बच्चे पैदा नहीं कर सकते, वो सरोगेसी की मदद लेते हैं. इन कपल्स में होमोसेक्शुअल कपल्स शामिल होते हैं या फिर ऐसी महिलाएं होती हैं जो मेडिकल वजहों से बच्चा कैरी नहीं कर सकती हैं. कई मौकों पर ऐसा भी होता है कि कोई महिला बच्चा तो चाहती है लेकिन निजी कारणों से उसे कैरी नहीं करना चाहती है, ऐसे में वो भी सरोगेसी की मदद लेती हैं.

सेरोगेसी में तीन लोग शामिल होते हैं. एक महिला जिसका egg इस्तेमाल होगा. एक पुरुष जिसका स्पर्म इस्तेमाल किया जाएगा और तीसरी महिला जो अपनी कोख में बच्चे को पालेगी. इस तीसरी महिला को सरोगेट कहते हैं. अब IVF यानी In Vitro Fertilization तकनीक की मदद से स्पर्म का एग्स से फ्यूजन करवा कर उससे बने एंब्रियो को सरोगेट की कोख में डाला जाता है. इस केस में बच्चे का DNA…. स्पर्म और एग्स देने वाले पुरुष और महिला का होता है. लेकिन अब मोदी सरकार ने इस मामले में अपना पेंच फंसा दिया है. जिसके कारण हर कोई सेरोगेसी तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर सकता है.

मोदी सरकार को लेकर जज का बड़ा ऐलान, हिंदू राष्ट्र से भारत बन जाएगा इस्लामिक देश?

हंगामे के बीच लोकसभा ने सरोगेसी विधेयक को मंजूरी दे दी गई. इस बिल के जरिए देश में सरोगेसी को रेगुलेट कर दिया गया है. जिसके चलते इस बिल के पास हो जाने के बाद से देश में कमर्शियल सरोगेसी को गैर कानूनी घोषित कर दिया जाएगा. यानी बच्चे को कोख में रखने के बदले पैसे लेने वाला काम अब गैर कानूनी माना जाएगा. इसके अलावा सरोगेसी रेगुलेशन बिल के मुताबिक सिर्फ वो पति-पत्नी जिनकी शादी को 5 साल या इससे ज्यादा का वक्त हो चुका है, बस वो ही सरोगेसी का लाभ उठा सकते हैं. इसके अलावा इस बिल में एक शर्त ये भी है कि सरोगेट यानी वो महिला जो बच्चे को अपनी कोख में रखेगी, उसे पति-पत्नी का बेहद करीबी रिश्तेदार होना अनीवार्य है. सरोगेसी के लीगल होने के लिए इन दोनों ही शर्तों का माना जाना बेहद जरूरी है. इसके अलावा कोई अगर देश में सेरोगेसी से बच्चे पैदा करना चाह रहा है तो वह कानून अपराध की श्रेणी में आ जाएगा. ऐसे में मोदी सरकार ने इस बिल के जरिए सेरोगेसी के माध्यम से हर जोड़े के जरिए बच्चे पैदा करने पर भी रोक लगा दी है.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने विधेयक पर कहा कि सरोगेसी पद्धति का गलत इस्तेमाल रोकने के साथ नि:संतान दंपतियों को संतान का सुख दिलाना के लिए यह बिल लाया गया है. उन्होंने कहा कि इस विधेयक में एनआरआई दंपतियों को भी शामिल किया गया है, हालांकि इसमें विदेशी नागरिकों के लिए प्रावधान नहीं है. मंत्री ने कहा कि समाज के सभी वर्गों और सभी राजनीतिक दलों की यह राय रही है कि कॉमर्शियल सरोगेसी पर रोक लगनी चाहिए. नड्डा ने कहा कि देश भर में ऐसे बहुत सारे क्लीनिक चल रहे हैं जो कॉमर्शियल सरोगेसी का हब बन गए हैं और अब इस विधेयक के पारित होने के बाद इस पर रोक लगेगी.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि मोदी सरकार का ये फैसला सही है या नहीं?

(Visited 708 times, 1 visits today)

आपके लिए :