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सिर्फ 5 लाख रुपये से CCD के मालिक सिद्धार्थ ने कैसे खड़ा किया अरबों का कारोबार?

वीजी सिद्धार्थ, भारत के सफल कारोबारियों में एक ऐसा नाम थे, जिनकी पहचान नाम से अधिक काम से होती थी. कैफे कॉफी डे के फाउंडर ने कभी 5 लाख रुपये के साथ अपने सफर की शुरुआत की और आज वह भारत के 'कॉफी किंग' कहे जाते हैं.

मशहूर कैफे चेन सीसीडी यानी Cafe Coffee Day के फाउंडर वीजी सिद्धार्थ ने हाल ही नदी में कूद कर अपनी जान दे दी. नदी में कूदने के 36 घंटे के बाद उनका शव मिल. जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया. कर्नाटक के पूर्व सीएम एसएम कृष्णा के दामाद पहले लापता थे. लापता होने से पहले अपने आखिरी लेटर में उन्होंने कर्ज में डूबे होने की बात लिखी थी. उन्होंने लिखा था कि वह एक उद्यमी के तौर पर असफल रहे. हालांकि, उनके सफर पर नजर डालें तो इसमें सफलताओं की कमी नहीं है और असफलता दूर-दूर तक कहीं भी दिखाई नहीं देती है.Cafe Coffee Day के फाउंडर वीजी सिद्धार्थ आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन आइए जानते हैं कि आखिर कैसे उन्होंने सिर्फ पांच लाख रुपये की मदद से Cafe Coffee Day जैसी एक कंपनी खड़ी कर दी. लेकिन दोस्तों, उससे पहले अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो जल्द से जल्द सब्सक्राइब कर लें. आइए शुरू करते हैं...

वीजी सिद्धार्थ, भारत के सफल कारोबारियों में एक ऐसा नाम थे, जिनकी पहचान नाम से अधिक काम से होती थी. कैफे कॉफी डे के फाउंडर ने कभी 5 लाख रुपये के साथ अपने सफर की शुरुआत की और आज वह भारत के 'कॉफी किंग' कहे जाते हैं. 1 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति के मालिक सिद्धार्थ का कारोबारी सफर बेहद रोचक और प्रेरक है. कर्नाटक के चिकमंगलुरु में वीजी सिद्धार्थ का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जो लंबे समय से कॉफी उत्पादन से जुड़ा हुआ था. मैंगलुरु यूनिवर्सिटी से इकनॉमिक्स में मास्टर डिग्री लेने वाले सिद्धार्थ चाहते तो विरासत में मिली खेती से आराम से जिंदगी गुजार सकते थे. लेकिन युवा सिद्धार्थ काफी महत्वाकांक्षी थे और अपने दम पर कुछ करना चाहते थे. 

महज 21 साल की उम्र में जब उन्होंने पिता से कहा कि वह मुंबई जाना चाहते हैं तो उन्हें पिता ने 5 लाख रुपये के साथ यह छूट भी दी कि अगर वह असफल हो जाएं तो वापस आकर परिवार का कारोबार संभाल सकते हैं. लेकिन वीजी सिद्धार्थ कुछ अलग ही करना चाहते थे. जिसके बाद पांच लाख रुपयों में से वीजी सिद्धार्थ ने 3 लाख रुपये में जमीन खरीदी और 2 लाख रुपये बैंक में जमा कर लिए. इसके बाद वह मुंबई आ गए और जेएम फाइनैंशल सर्विसेज जिसका नाम अब जेएम मॉर्गन स्टैनली है, उसमें मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में काम की शुरुआत की. यहां वह 2 साल रहे और इस दौरान उन्होंने शेयर बाजार की अच्छी समझ हासिल कर ली. 

सिद्धार्थ की नौकरी अच्छी चल रही थी, लेकिन वह अपना कारोबार शुरू करना चाहते थे. इसी सपने को पूरा करने के लिए वह नौकरी छोड़कर बेंगलुरु वापस आ गए और बचे हुए 2 लाख रुपये से वित्तीय कंपनी खोलने का फैसला किया. उन्होंने सिवान सिक्यॉरिटीज के साथ अपने सपने को साकार किया. बाद में यह कंपनी साल 2000 में way2wealth securities ltd बनी. सिद्धार्थ इसे बेहद सफल निवेश बैंकिंग और स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी बनाने में सफल रहे. लेकिन उनको असली पहचान कैफे कॉफी डे से मिली.

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दोस्तों, 1993 में उन्होंने कॉफी ट्रेडिंग के लिए अमलगमेटेड बीन कंपनी यानी ABC की स्थापना की. वह हर साल करीब 28000 टन कॉफी निर्यात करने लगे. उनकी कॉफी कारोबार में लगी कंपनी अमलगमेटेड बीन कंपनी का सालाना कारोबार अब 2500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. वह ग्रीन कॉफी निर्यात करने वाली भारत की सबसे बड़ी कंपनी है. उनके पास करीब 12000 एकड़ का कॉफी प्लांटेशन है. करीब एक दशक तक फाइनैंशल सर्विसेज में हाथ आजमाने के बाद सिद्धार्थ ने 1996 में कॉफी कैफे डे की शुरुआत की. उनका यह कारोबार बेहद सफल रहा और इसने भारत में कॉफी के बिजनस को नई दिशा दी. कर्नाटक में 1996 में ही उन्होंने युवाओं के हैंगआउट के लिए कैफे कॉफी डे की शुरुआत की. ऐसा पहला आउटलेट बंगलौर में खोला गया. उनका यह कॉन्सेप्ट युवाओं में काफी लोकप्रिय रहा. आज पूरे भारत में करीब 1750 कैफे कॉफी डे हैं. कैफे कॉफी डे में हर दिन करीब 50,000 विजिटर्स आते हैं.  

भारत के अलावा ऑस्ट्रिया, कराची, दुबई और चेक रिपब्लिक में भी कंपनी के आउटलेट हैं. इनमें 50 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है. सीसीडी ऑर्गनाइज्ड कैफे सेगमेंट की मार्केट लीडर है. आज सीसीडी को हर कोई जानता हैं. खासकर युवाओं के बीच में सीसीडी काफी लोकप्रिय है. युवा फुरसत के लम्हों में सीसीडी में वक्त बिताना पसंद करते हैं. वहीं पिछले कुछ सालों से कॉफी का मतलब सिर्फ और सिर्फ कैफे कॉफी डे बन चुका था.

दोस्तों, सीसीडी के अलावा वीजी सिद्धार्थ ने माइंडट्री, ग्लोबल टेक्नॉलजी वेचर्स लिमिटेड, डार्क फॉरेस्ट फर्नीचर कंपनी, SICAL लॉजिलिस्टिक्स में अच्छा निवेश किया था. उन्होंने 3000 एकड़ जमीन पर केले के पेड़ लगाए और केले का निर्यात भी करने लगे. माइंडट्री में सिद्धार्थ की करीब 21 फीसदी हिस्सेदारी थी, उन्होंने अपने शेयर पिछले दिनों एलऐंडटी को बेच दिए. इस सौदे से उन्हें करीब 2,858 करोड़ रुपये का फायदा हुआ था. वह करीब एक दशक से इस कंपनी में निवेश कर रहे थे और 18 मार्च 2019 को उन्होंने एलऐंडटी से 3,269 करोड़ रुपये का सौदा किया. 

सिद्धार्थ ने साल 2000 में ग्लोबल टेक्नोलॉजी वेंचर्स लिमिटेड GTV की स्थापना की जो टेक्नोलॉजी की भारतीय कंपनियों में निवेश करती है. जीटीवी ने अब तक करीब 24 स्टार्टअप में पैसा लगाया है. इसके अलावा उनकी वे2वेल्थ ब्रोकर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी लोगों को इनवेस्टमेंट सलाह देती है. उन्होंने Daffco Furniture या डार्क फॉरेस्ट फर्नीचर कंपनी ने कर्नाटक के चिकमगलूर में 6 लाख वर्ग फुट का कारखाना स्थापित किया है. इसके लिए लिए लकड़ी लैटिन अमेरिकी देश रिपब्लिक ऑफ गुयाना से आता है, जहां कंपनी ने लीज पर 18.5 करोड़ हेक्टेयर जंगल लिया है. साल 2011 में वी जी सिद्धार्थ को फोर्ब्स इंडिया के जरिए 'नेक्स्टजन आंत्रप्रेन्योर' अवॉर्ड मिला. वित्त वर्ष 2018-19 में कंपनी की आय 4,624 करोड़ रुपये और मुनाफा 128 करोड़ रुपये था. इसकी सब्सिडियरी कंपनी कॉफी डे ग्लोबल लिमिटेड (CDGL) को 1,468 रुपये की आय हुई. 

लेकिन दोस्तों, सीसीडी को किसी भी तरह से एक असफल कारोबार नहीं कहा जा सकता है. क्योंकि कंपनी को पिछले कुछ सालों से लगातार हर साल मुनाफा होता आया है. कंपनी वित्त वर्ष 2016-17, 2017-18 और 2018-19 में मुनाफे में रही है. इन तीन सालों में कंपनी को करोड़ों का मुनाफा हआ है. वास्तव में वित्त वर्ष 2017-18 में कंपनी के शुद्ध मुनाफे में 509 फीसदी की बढ़त हुई थी. हालांकि इन सब के बावजूद कंपनी के ऊपर कुल 6547 करोड़ रुपये का कर्ज है. जिसकी वजह से कंपनी के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ ने हार मान ली और नदी में कूदकर जान दे दी.