नरेंद्र मोदी ने 2000 रुपए के नोट पर लिया शानदार फैसला, देश की जनता को दी राहत!

देश में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से कई सारे फैसले किए गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़े फैसले लेने से भी घबराते नहीं है. देश हित में अगर कोई फैसला किया जाना है तो नरेंद्र मोदी में इतनी ताकत है कि उस फैसले को बिना देर किए लोगों के हित के लिए लागू कर देते हैं. वहीं नरेंद्र मोदी के साल 2014 में सत्ता संभावने के बाद भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या के रूप में सामने था. लेकिन नरेंद्र मोदी एक ऐसे प्रधानमंत्री के तौर पर सामने आए जिनके सामने कोई भी समस्या बड़ी नहीं है. दोस्तों, अगर आप नरेंद्र मोदी को पसंद करते हैं तो कमेंट बॉक्स में Modi The Great जरूर लिखें. दोस्तों, भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भी नरेंद्र मोदी ने बड़े फैसले लिए. इन फैसलों से पूरे देश में एक बार तो उथल पुथल ही मच गई थी. इन्हीं बड़े फैसलों में नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए नोटबंदी जैसे बड़ा फैसला किया. नोटबंदी के फैसले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काफी हिम्मत वाला काम किया था क्योंकि कोई भी सरकार नोटबंदी जैसा फैसला करने से कतराती, लेकिन पीएम मोदी ने देश हित के लिए और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए नोटबंदी जैसा फैसला भी किया. इसके तहत पीएम मोदी ने 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों को चलन से बाहर का रास्ता दिखा दिया. वहीं पीएम मोदी के इस फैसले के बाद 2000 रुपए का नोट अस्तित्व में आया. गुलाबी रंग का ये 2000 रुपए का नोट फिलहाल भारत में मुद्रा को तौर पर सबसे बड़ी अमाउंट की मुद्रा है. वहीं अब 2000 रुपए के नोट को लेकर काफी चौंकाने वाली खबर सामने आई है. इस खबर को जानकर कोई भी हैरान रह सकता है.

देखें वीडियो-

दो साल पहले नोटबंदी के बाद जारी किये गये 2000 रुपये के करेंसी नोट की छपाई न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है. वित्त मंत्रालय के एक शीर्ष ने इस बात की जानकारी दी. नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद सरकार ने 2000 रुपये का नया नोट जारी किया था. सरकार ने आठ नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलन से हटा दिया था. उसके बाद रिजर्व बैंक ने 500 के नए नोट के साथ 2000 रुपये का भी नोट जारी किया. दोस्तों, अगर पीएम मोदी के जरिए की गई नोटबंदी से आप खुश हैं तो इस वीडियो को लाइक जरूर करें. आपका एक लाइक पीएम मोदी को और भी बेहतर फैसले लेने के लिए प्रेरित करता रहेगा.

वहीं एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रिजर्व बैंक और सरकार समय-समय पर करेंसी की छपाई की मात्रा पर फैसला करते हैं. इसका फैसला चलन में मुद्रा की मौजूदगी के हिसाब से किया जाता है. जिस वक्त 2000 का नोट जारी किया गया था तभी यह फैसला किया गया था कि धीरे-धीरे इसकी छपाई को कम किया जाएगा. 2000 के नोट को जारी करने का एकमात्र मकसद प्रणाली में त्वरित नकदी उपलब्ध कराना था. अधिकारी ने बताया कि 2000 के नोटों की छपाई काफी कम कर दी गई है. 2000 के नोटों की छपाई को न्यूनतम स्तर पर लाने का फैसला किया गया है.

मिडिल क्लास के लोगों को मोदी ने पांच सालों तक दिया धोखा, अब लोकसभा चुनाव में कटेंगे वोट!

रिजर्व बैंक के आंकड़ों में मार्च 2017 के अंत तक 328.5 करोड़ इकाई 2000 के नोट चलन में थे. 31 मार्च 2018 के अंत तक इन नोटों की संख्या मामूली बढ़कर 336.3 करोड़ इकाई पर पहुंच गई. मार्च 2018 के अंत तक कुल 18,037 अरब रुपये की करेंसी चलन में थी. इनमें 2000 के नोटों का हिस्सा घटकर 37.3 प्रतिशत रह गया. मार्च, 2017 के आखिर तक कुल करेंसी में 2000 के नोटों का हिस्सा 50.2 प्रतिशत पर था. इससे पहले नवंबर 2016 में 500 और 1000 रुपये के जिन नोटों को बंद किया गया, उनका कुल मुद्रा चलन में 86 प्रतिशत तक हिस्सा था.

दोस्तों, अगर आप 2019 में फिर से पीएम मोदी को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं तो इस वीडियो को शेयर करना न भूलें और साथ ही कमेंट बॉक्स में दो बार नमो नमो जरूर लिखें.

(Visited 2012 times, 1 visits today)

आपके लिए :