पीएम मोदी को जाना पड़ेगा जेल? राहुल गांधी का राफेल डील पर बड़ा खुलासा, बीजेपी वाले खौफ में?

देश में इन दिनों राफेल मामले को लेकर बवाल मचा हुआ है. आए दिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल मामले को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते रहते हैं. वहीं अब एक बार फिर से राहुल गांधी ने राफेल डील को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साध दिया है. राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राहुल गांधी ने इस विमान सौदे में भ्रष्टाचार होने का आरोप फिर दोहराया और कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार बताए कि इस मामले पर कैग की रिपोर्ट कहां है जिसका उल्लेख सुप्रीम कोर्ट में किया गया है.

राहुल गांधी ने इस मामले की संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी से जांच की मांग करते हुए कहा कि अगर ये जांच हो गई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम ही सामने आएगा. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पीएसी यानी लोक लेखा समिति को कैग रिपोर्ट दी गई है, जबकि पीएसी को कोई रिपोर्ट नहीं मिली. ये कैसे हो सकता है कि जो कैग रिपोर्ट फैसले की बुनियाद है वो पीएसी में किसी को नहीं दिखी लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दिखी? उन्होंने कहा, जब कोई झूठ बोलता है तो वह कहीं न कहीं नजर आ जाता है. अब सरकार हमें बताए कि सीएजी रिपोर्ट कहा हैं? हमें यह दिखाएं.

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साथ ही राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी जी ने संस्थाओं की धज्जियां उड़ा दी हैं. सच्चाई यह है कि यहां पर 30 हजार करोड़ रुपए की चोरी हुई है. देश का चौकीदार चोर है. प्रधानमंत्री जी ने अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपए की चोरी कराई है. राहुल गांधी ने कहा कि मोदी जी जितना छिपना है, छिप लें. जिस दिन जेपीसी की जांच हो गई उस दिन दो नाम निकलेंगे एक अनिल अंबानी और दूसरा नरेंद्र मोदी.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के मामले में नरेन्द्र मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी. साथ ही कोर्ट ने सौदे में कथित अनियमितताओं के लिए सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज किया. सीजेआई रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने कहा कि अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है. ऑफसेट साझेदार के मामले पर तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि किसी भी निजी फर्म को व्यावसायिक लाभ पहुंचाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है.

वहीं सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इन याचिकाओं में मोटे तौर पर चिंता के तीन मुद्दे उठाये गये थे. पहला, निर्णय लेने की प्रक्रिया, दूसरा, विमानों की कीमत और तीसरा, भारतीय आफसेट साझीदार का चयन. पीठ ने कहा कि 36 लड़ाकू विमान खरीदने जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कोर्ट के लिए हस्तक्षेप की कोई वजह नहीं है. पीठ ने कहा कि भारतीय वायु सेना को उन्नत श्रेणी के लड़ाकू विमानों की जरूरत है क्योंकि देश ऐसी स्थिति में तैयारीविहीन या कम तैयार रहना सहन नहीं कर सकता जब आपके विरोधी चौथी और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हासिल कर चुके हों और इनमे से हमारे पास कोई नहीं है.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर बताएं कि आपको क्या लगता है राफेल डील में सरकार ने कोई घपलेबाजी की है या नहीं?

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