जानिए कैसे होता है गर्भधारण और गर्भ में कैसे बनता है बच्चा

प्रेमसंबंध स्थापित करने से आनंद की प्राप्ति होती है मगर जब इन्हीं प्रेमसंबंधों के बाद महीला गर्भधारण करती है तो पति-पत्नि में खुशी की लहर दौड़ पड़ती है. सेक्स करने के बाद गर्भधारण करना अपने आप में एक सुखद अनुभव होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गर्भधारण कैसे होता है और पेट में बच्चा कैसे बनता है…? नहीं जानते तो आइए जानते हैं…

किसी पुरुष के साथ यौन संबंध बनाने के बाद ही कोई महिला गर्भवती होती है. यौन संबंध बनाने के बाद ejaculation होने पर पुरुष के लिंग से महिला की योनि में एक तरल पदार्थ गिरता है जिसे semen कहते हैं. सीमन में पुरुष के शुक्राणु भी होते हैं जो योनि में गिरने के बाद महिला के अंडे से निषेचन करके भ्रूण का निर्माण करते हैं. इस स्थिति को प्रेगनेंसी या गर्भावस्था कहा जाता है.

जब अंडा स्पर्म कोशिकाओं के संपर्क में आता है तो स्पर्म कोशिकाएं उसके साथ मिलकर निषेचन की क्रिया करती हैं. लेकिन निषेचन तुरंत नहीं होता है. चूंकि सेक्स के बाद करीब 6 दिनों तक स्पर्म गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब में रहता है इसलिए वह इन छह दिनों के बीच में ही निषेचन करता है. अगर स्पर्म कोशिकाएं अंडे से जुड़ नहीं पाती हैं तो निषेचित अंडा गर्भाशय की ओर फैलोपियन ट्यूब में चला जाता है. वहां यह अधिक से अधिक कोशिकाओं में विभाजित हो जाता है और विकसित होकर एक बॉल बनाता है. बॉल कोशिकाएं जिसे ब्लास्टोसिस्ट कहते हैं निषेचन के तीन से चार दिनों बाद गर्भाशय में जाता है.

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बॉल की कोशिकाएं भी गर्भाशय में दो से तीन दिन तक टहलती रहती हैं और जब बॉल की कोशिकाएं गर्भाशय की दीवार की परत से जुड़ जाती हैं तो इस क्रिया को प्रत्यारोपण कहा जाता है. इसके बाद सही मायनों में गर्भधारण यानि प्रेगनेंसी शुरू होती है. जब निषेचित अंडे गर्भाशय में प्रत्यारोपित हो जाते हैं तो ये प्रेगनेंसी हार्मोन्स स्रावित करते हैं जिससे महिला गर्भवती हो जाती है और उसका मासिक धर्म रूक जाता है. इसके बाद धीरे-धीरे गर्भ में बच्चा बनने लगता है.

इसके बाद पहले महीने में दिमाग और तंत्र-तंत्रिका बनने लगते हैं. लिंग का निर्धारण होना शुरू होने लगता है. नाक,कान, आंख के जगह पर डॉट जैसे निशान बनने लगते हैं. दूसरे महीने में नाल बनने लगते हैं. नाखून और उंगली बनने शुरू हो जाती है. लीवर और कीडनी का विकास होना चालू हो जाता है. इस दौरान शिशु का वजन लगभग 15-30 ग्राम होता है. तीसरे महीने में शिशु का वजन 190 ग्राम के आस पास हो जाता है. इस महीने में बच्चा पैरों से लात मारने लगता है, उंगीलियां बन जाती है और हाथों से Movment होची है. मुट्ठी बनने लगती है.

चौथे महीने में शिशु की धड़कने सुनाई देने लगता है. लंबाई, वजन बढ़ने लगता है. सिर पर बाल दिखाई देने लगते हैं. पांचवे महीने में शिशु हिलने डुलने लगता है. वजन 550 ग्राम के आस-पास हो जाता है. छठे महीने में शिशु इतना बड़ा हो जाता है कि हाथ रखने और कान लगाकर सुनने से बच्चे का आभास होने लगता है. आंखे बन गई होती हैं. सातवें महीने में वजन 1500 ग्राम हो जाता है. सोने और जागने का समय निश्चित हो जाता है. आठवें महीने में आंखे खोल लेता है और अंगूठा चूसने लगता है. नौवें और आखिरी महीने में वजन 3 से 3.5 किलो हो जाता है. लंबाई 20 इंच हो जाती है और बाहर आने के लिए तैयार होता है.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर बताएं कि लिंग कितने प्रकार के होते हैं.

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