मोदी ने छिन ली लोगों की रोजी-रोटी? देश के सबसे लंबे रेलरोड पुल में सामने आई सबसे बड़ी गफलत?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में डिब्रूगढ़ के पास बोगीबील में ब्रह्मपुत्र नदी पर देश के सबसे लंबे रेल-सह-सड़क पुल का उद्घाटन किया. डिब्रूगढ़ पहुंचने के बाद मोदी ने एक हेलिकॉप्टर से सीधे बोगीबील के लिए उड़ान भरी और नदी के दक्षिणी किनारे से 4.94 किलोमीटर लंबे डबल-डेकर पुल का उद्घाटन किया. विशाल ब्रह्मपुत्र नदी पर बना, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण यह पुल अरुणाचल प्रदेश के कई जिलों के लिए कई तरह से मददगार होगा. डिब्रूगढ़ से शुरू होकर इस पुल का समापन असम के धेमाजी जिले में होता है. यह पुल अरुणाचल प्रदेश के भागों को सड़क के साथ-साथ रेलवे से जोड़ेगा. असम समझौते का हिस्सा रहे बोगीबील पुल को 1997-98 में मंजूरी दी गई थी. ऐसा माना जा रहा है कि यह पुल अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पास रक्षा गतिविधियों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

वहीं एशिया के दूसरे सबसे लंबे रेल-सड़क पुल बोगीबील की मियाद कम से कम 120 साल है. मुख्य अभियंता मोहिंदर सिंह ने बताया कि ब्रह्मपुत्र नदी पर बना 4.9 किलोमीटर लंबा पुल देश का पहला पूर्णरूप से जुड़ा पुल है. उन्होंने बताया कि पूरी तरह से जुड़े पुल का रखरखाव काफी सस्ता होता है. इस पुल के निर्माण में 5900 करोड़ रुपए का खर्च आया है और इसकी मियाद 120 साल है. इससे असम से अरुणाचल प्रदेश के बीच की यात्रा दूरी घट कर चार घंटे रह जाएगी. इसके अलावा दिल्ली से डिब्रूगढ़ रेल यात्रा समय तीन घंटे घट कर 34 घंटे रह जाएगा. इससे पहले यह दूरी 37 घंटे में तय होती थी. बोगीबील पुल असम के डिब्रूगढ़ जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिण तट को अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती धेमाजी जिले में सिलापाथर को जोड़ेगा.

यह पुल और रेल सेवा धेमाजी के लोगों के लिए अति महत्वपूर्ण होने जा रही है क्योंकि मुख्य अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और हवाई अड्डा डिब्रूगढ़ में हैं. इससे ईटानगर के लोगों को भी लाभ मिलेगा क्योंकि यह इलाका नाहरलगुन से केवल 15 किलोमीटर की दूरी पर है. साथ ही कुल 4.9 किलोमीटर लंबे इस पुल की मदद से असम के तिनसुकिया से अरुणाचल प्रदेश के नाहरलगुन कस्बे तक की रेलयात्रा में लगने वाले समय में 10 घंटे से अधिक की कमी आने की आशा है. पूर्वोत्तर फ्रंटियर रेलवे के प्रवक्ता नितिन भट्टाचार्य ने बताया कि मौजूदा समय में इस दूरी को पार करने में 15 से 20 घंटे का समय की तुलना में अब इसमें साढ़े पांच घंटे का समय लगेगा.

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हालांकि इस पुल की सबसे बड़ी खामी ये है कि ब्रह्मपुत्र नदी में नौकाओं से लोगों और उनके सामान को आर-पार पहुंचाने में मदद करने वाले नाविक बोगीबील पुल को अपनी रोजी-रोटी के लिए खतरा मान रहे हैं. ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी और दक्षिणी तट से करीब 40 नौकाओं का संचालन होता है. इन नौकाओं के जरिए लोगों के साथ ही दोपहिया वाहनों और कार आदि सामान को भी दूसरी पार पहुंचाया जाता है. दो नौकाओं का संचालन राज्य सरकार करती है जबकि बाकी का संचालन निजी तौर पर होता है. प्रत्येक नौका के संचालन में तीन लोग लगे होते हैं. इस पुल के उद्घाटन से वाहनों की सुगम आवाजाही के साथ ही धेमाजी के लोगों को बड़े अस्पताल, शैक्षाणिक संस्थान और डिब्रूगढ़ एयरपोर्ट जाने में बहुत आसानी होगी. वहां नाव चलाने वाले लोगों का कहना है कि नाव से नदी पार करने पर 45 मिनट से दो घंटे तक का समय लगता है, लेकिन पुल के खुल जाने से एक ओर से दूसरी ओर जाने में महज दस मिनट का समय लगेगा. समय के साथ ही पैसे की भी बचत होगी. वहीं राज्य जल परिवहन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक कुछ नौकाओं को दूसरे घाट पर भेजा जाएगा. लेकिन, निजी नौका संचालकों को डर है कि वहां पर उतना काम नहीं रहेगा.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि पीएम नरेंद्र मोदी ने इस पुल का उद्घाटन कर सही काम किया या गलत किया?

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