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बड़ा अनोखा है पक्षियों का गला, इस वजह से निकलता है इनके गले से गाना

बड़ा अनोखा है पक्षियों का गला, इस वजह से निकलता है इनके गले से गाना
पक्षी कई तरह के होते हैं. कुछ चील और बाज की तरह बड़े होते हैं और साथ ही खतरनाक भी होते हैं. वहीं कुछ पक्षी छोटे होते हैं और उनसे किसी तरह का कोई डर नहीं होता है. हालांकि सभी पक्षियों में आसमान में उड़ने का गुण भी होता है. इसकी मदद से पक्षी अपने पंखों के सहारे आसमान की सैर कर सकते हैं. लेकिन उड़ने के अलावा भी पक्षियों में एक गुण होता है और यह गुण गाने का होता है. पक्षियों के गले से हमेशा ही सुरीली आवाज सुनने को मिलती है. सुबह उठते ही सबसे पहले हमारे कानों में पक्षियों की चहचहाती आवाज पड़ जाए तो मन खुश हो जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पक्षियों की आवाज इतनी सुरीली क्यों होती है? दरअसल पक्षियों की आवाज के सुरीली होने के पीछे कई वैज्ञानिक तथ्य मौजूद हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में... हर एक प्राणी में हार्मोन होते हैं. ठीक वैसे ही पक्षियों में भी हार्मोन पाया जाता है. इन हार्मोन की मदद से पक्षियों में कई सारे बदलाव देखे जाते हैं और इन्हीं बदलावों में एक बदलाव सुरीली आवाज का भी है. पक्षी हार्मोन में बदलाव के कारण ही सुरीली आवाज में गाना गाते हैं. वहीं पक्षियों में मौसम के बदलाव के कारण भी हार्मोन में बदलाव होते रहते हैं. इस बदलाव के कारण भी उनकी आवाज में बदलाव देखा जाता है. वहीं वसंत ऋतु आते ही पक्षियों में गाने को लेकर काफी ललक देखी जाती है. इस मौसम में पक्षी सबसे ज्यादा गाना पसंद करते हैं. साथ ही पक्षियों में सिरिंक्स होता है. जिसकी मदद से उन्हें गाने में मदद मिलती है. अब इन गलत तथ्यों पर न करें भरोसा, जान लीजिए क्या है इनके पीछे की सच्चाई! वहीं एक नए शोध से यह बात सामने आई है कि जैसे इंसानों पर मौसम के कारण काफी बदलवा होता है, ठीक वैसे ही पक्षियों में भी मौसम के कारण शरीर में काफी बदलाव होते हैं. इन्हीं बदलावों में एक पक्षियों के अंदर हार्मोन बदलाव भी होता है. वसंत ऋतु में पक्षियों के हार्मोन में बदलाव होता है. दिन लंबे होने की वजह से हार्मोन में ये बदलाव होता है. अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के एक दल ने पक्षियों के दिमाग में होने वाले बदलाव के बारे में पता लगाया है. जिसमें उन्होंने देखा कि पीयूष ग्रंथि के पास की कोशिकाएं वसंत ऋतु में एक हार्मोन छोड़ती हैं, जो उन्हें संभोग के लिए तैयार करता है. शोधकर्ताओं ने वसंत ऋतु आने पर पक्षियों में मस्तिष्क की सक्रियता की प्रक्रिया के मुख्य तत्व की पहचान कर ली है. इससे पहले इस प्रकार की खोज करना असंभव था, लेकिन अब आधुनिक तकनीकी ने हजारों जींस को स्केन करने में सक्षम बना दिया है, जिससे पता लगा सकते हैं कि मौसम में बदलाव से कौन-सा हिस्सा प्रभावित होता है. शोधकर्ताओं की टीम ने माइक्रो ऐरे नामक एक विशेष जीन चिप का इस्तेमाल कर जापानी क्वेल से लिए गए 28000 जींस को स्केन किया, जिस पर लंबे और छोटे दिनों के अनुसार कम-ज्यादा रोशनी पड़ी. उन्होंने पाया कि मस्तिष्क की सतह पर कोशिकाओं में जींस उस समय सक्रिय हो गए, जब पक्षी को अधिक रोशनी मिली. इसका परिणाम यह हुआ कि कोशिकाओं ने थायरोट्रोफिन नामक हार्मोन छोड़ना शुरू कर दिया. पहले वृद्धि और मैटाबोलिज्म से जुड़े इस हार्मोन ने अप्रत्यक्ष रूप से पीयूष ग्रंथि को सक्रिय कर दिया. इससे पक्षियों के अंडकोष बढ़ना शुरू हो गए और परिणामस्वरूप उन्होंने साथी को आकर्षित करने के लिए पुकारना शुरू कर दिया और इसी प्रक्रिया के साथ पक्षी गाना भी गाने लगे. दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर बताएं कि आपको कौनसा पक्षी पसंद है.