पुरानी ट्रेनों में इस तरह से चलती थी AC, तरीका देखकर आप भी हैरान रह जाओगे

भारत में अग्रेजों के दौरान ही ट्रेन की शुरुआत हो चुकी थी. अग्रेजों ने पूरे भारत में रेलवे का एक ऐसा जाल बिछा दिया था, जिससे सामान को एक जगह से दूसरे जगह पर ले जाने के साथ ही यातायात भी काफी आसान हो गया. वहीं यातायात के दौरान गर्मी से बचने के लिए ट्रेनों के डिब्बे में एसी कोच का इस्तेमाल पहले भी किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहले की ट्रेनों में एसी कैसे चलती थी? आइए आज इस बात को जान लेते हैं…

सिक्स पैक एब्स बनाने के लिए इन 6 बातों को न करें नजरअंदाज, हर दिन इनके इस्तेमाल से दिखेगा फायदा

आज का दौर और पहले का दौर बिल्कुल अलग था. आज तकनीकि ने काफी प्रगति कर ली है. एक बटन दबाने के साथ ही हमारे कई काम आसान हो जाते हैं. वहीं एयरकंडीशनर एक ऐसी चीज है जो चुटकियों में अपने आस-पास के वातावरण को ठंडा कर देती है. एसी का इस्तेमाल ट्रेनों में भी किया जाता है. बटन के साथ ही हम ट्रेनों में एसी चालू या बंद करने के साथ ही कूलिंग को कम या ज्यादा भी कर सकते हैं. लेकिन पहले के जमाने में ट्रेन में ऐसा नहीं था. पहले बर्फ की मदद से ऐसी कोच में ठंडी हवा उपलब्ध करवाई जाती थी.

दरअसल, पहले की ट्रेनों में ट्रेन के ऊपर रूफ में खांचे बने होते थे. जिनमें बर्क को रखा जाता था और फिर एक ब्लोअर की मदद से जब हवा इन बर्फ पर जाती थी तो वहां से ठंडी हवा वेंड्स के जरिए अलग-अलग बर्थ तक पहुंचती थी. सबसे पहले साल 1934 में एसी कोच ट्रेन का इस्तेमाल किया गया था. इस ट्रेन का नाम फ्रंटियर मेल था. जिसे आज स्वर्ण मंदिर मेल के नाम से जाना जाता है. वहीं एक बार उन खांचों में बर्फ डालने के बाद बर्फ एक निश्चित समय तक हवा दे पाती थी क्योंकि एक समय बाद बर्फ पूरी तरह से पिघल भी जाती थी. ऐसे में ऐसी कोच का टेंपरेचर बनाए रखना भी जरूरी हो जाता था. इसके लिए जब किसी स्टेशन पर ट्रेन रुकती तो उन खांचों में फिर से बर्फ को भरा जाता था और ऐसे ट्रेनों के ऐसी कोच की टेंपरेचर को बनाए रखा जाता.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर बताएं कि आपने सबसे ज्यादा किस ट्रेन से यातायात किया है.

(Visited 78 times, 1 visits today)

सुझाव कॉमेंट करें

About The Author

आपके लिए :