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जिंदगी में हताश और निराश हैं तो एक बार इधर ध्यान जरूर दीजिए, आपकी किस्मत बदल सकती है

जिंदगी में हताश और निराश हैं तो एक बार इधर ध्यान जरूर दीजिए, आपकी किस्मत बदल सकती है
जिंदगी में लोगों को सफलता की चाह होती है लेकिन लोगों को कई बार हर मोड़ पर नाकामी का सामना करना पड़ता है. नाकामी मिलने के बाद लोग हताश और निराश हो जाते हैं. साथ ही असफलता लोगों को डिमोटिवेट भी कर देती है. ऐसे में लोगों को मोटिवेशन कम ही तरीके से मिल पाता है. लेकिन अब आप मत घबराइए. अगर आप खुद को मोटिवेट करना चाहते हैं तो बस अपनी आंखें बद कीजिए और एक बार निदा फाजली की ये कविता सुनते जाइए... 40 लाख रुपए की महंगी गाड़ी को लोगों ने बना दिया कूड़ादान, जानिए क्या रही इसके पीछे की वजह दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए यूँ तो क़दम क़दम पे है दीवार सामने कोई न हो तो ख़ुद से उलझ जाना चाहिए झुकती हुई नज़र हो कि सिमटा हुआ बदन हर रस-भरी घटा को बरस जाना चाहिए चौराहे बाग़ बिल्डिंगें सब शहर तो नहीं कुछ ऐसे वैसे लोगों से याराना चाहिए अपनी तलाश अपनी नज़र अपना तजरबा रस्ता हो चाहे साफ़ भटक जाना चाहिए चुप चुप मकान रास्ते गुम-सुम निढाल वक़्त इस शहर के लिए कोई दीवाना चाहिए बिजली का क़ुमक़ुमा न हो काला धुआँ तो हो ये भी अगर नहीं हो तो बुझ जाना चाहिए सोहनलाल द्विवेदी ने भी अपनी कलम से लोगों का सही मार्गदर्शन किया है. उन्होंने लिखा है.. न हाथ एक शस्त्र हो न हाथ एक अस्त्र हो, न अन्न, नीर, वस्त्र हो, हटो नहीं, डटो वहीं, बढ़े चलो! बढ़े चलो! रहे समक्ष हिमशिखर, तुम्हारा प्रण उठे निखर, भले ही जाए तन बिखर, रुको नहीं, झुको नहीं बढ़े चलो! बढ़े चलो! घटा घिरी अटूट हो, अधर में कालकूट हो, वही अम्रत का घूँट हो, जिये चलो, मरे चलो, बढ़े चलो! बढ़े चलो! गगन उगलता आग हो, छिड़ा मरण का राग हो, लहू का अपने फाग हो, अड़ो वहीं, गड़ो वहीं, बढ़े चलो! बढ़े चलो! चलो नई मिसाल हो, जलो नई मशाल हो, बढ़ो नया क़माल हो, झुको नहीं, रुको नहीं बढ़े चलो! बढ़े चलो! अशेष रक्त तोल दो, स्वतन्त्रता का मोल दो, कड़ी युगों की खोल दो, डरो नहीं, मरो वहीं, बढ़े चलो! बढ़े चलो! अपनी आंखें अभी भी बंद ही रखिए क्योंकि अभी रूह में हिम्मत बढ़नी शुरू हुई है. इस बीच निदा फाजली की ये एक और कविता आपको आगे बढ़ने के लिए आपकी मदद करेगी.. सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता मुझे गिरा के अगर तुम सँभल सको तो चलो कहीं नहीं कोई सूरज धुआँ धुआँ है फ़ज़ा ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो अगर आपकी जिंदगी भी निराशाओं से भरी हुई है तो परेशान मत होइए क्योंकि किसी ने सही कहा है कि होके मायूस न यूं शाम से ढलते रहिये, जिन्दगी भोर है सूरज सा निकलते रहिये। दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि आप अपनी जिंदगी से निराशाओं को कैसे दूर करते हो?
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