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दूसरों ग्रहों पर होते हैं खतरनाक मौसम, कहीं होती है तेजाब की तो कहीं हीरों की बारिश

दूसरों ग्रहों पर होते हैं खतरनाक मौसम, कहीं होती है तेजाब की तो कहीं हीरों की बारिश
हम जिस ग्रह पर रहते हैं वह धरती के नाम से जाना जाता है. यहां साल भर में कई बार मौसम बदलते रहते हैं. साथ ही बदलते मौसम के कारण धरती पर आंधी, तूफान, सूनामी, भूंकप जैसी खतरनाक प्राकृतिक आपदाएं भी देखने को मिलती हैं. इन आपदाओं के कारण धरती पर रहने वाले लोगों के जान माल को काफी नुकसान पहुंचता है. धरती पर सर्दी, गर्मी, बारिश जैसे कई मौसम से हम बखूबी जानकार होंगे लेकिन क्या आप दूसरे ग्रहों के मौसम के बारे में जानते हैं. जी हां, दूसरे ग्रहों पर भी मौसम होते हैं. लेकिन दूसरे ग्रहों के ये मौसम जानलेवा भी साबित हो सकते हैं. कई बार तो इनके बारे में जानकर ही लोगों के पसीने छूटने को तैयार रहते हैं. ऐसे में आइए आज हम जानेंगे, दूसरे ग्रहों पर होने वाले खतरनाम मौसमों के बारे में... तेजाब की बारिश हमारी पृथ्वी के साइज के लगभग बराबर का एक ग्रह है जिसे हम वीनस यानी शुक्र कहते हैं. गनीमत है कि हम इस ग्रह पर नहीं रहते हैं क्योंकि यहां आसमान से पानी नहीं बल्कि तेजाब बरसता है. वीनस का वातावरण बहुत घना है. यहां का वातावरण इतना घना है कि वीनस प्लेनेट की सरफेस से आसमान नहीं दिखाई पड़ेगा और न ही कोई दूसरे तारे दिखेंगे. यहां पर सिर्फ घने और खतरनाक तेजाब के बादल दिखाई देंगे. यहां एटमोस्फियरिक प्रेशर पृथ्वी से 93 गुना ज्यादा है. यहां सल्फ्यूरिक एसिड की बारिश होती है. वीनस ग्रह पर टेंपरेचर 479 डिग्री सेल्सियस होता है. इसलिए बारिश में बरसा हुआ सल्फ्यूरिक एसिड प्लेनेट की सरफेस तक पहुंचने से लगभग 25 किलोमीटर ऊंचाई पर ही वापस गैस बन जाता है. भारत में पाए जाते हैं ऐसे अनोखे पक्षी, आपने कभी इनक बारे में सुना भी नहीं होगा… ग्रेट रेड स्पॉट क्या आप कभी इतने बड़े तूफान की कल्पना कर सकते हैं, जो पूरी धरती को लील सकता हो, यानी पूरी की पूरी पृथ्वी उसमें समा सकती हो, और जो इतना शक्तिशाली हो कि 350 साल से लगातार चल रहा हो. जी हां, ऐसा ही तूफान है बृहस्पति ग्रह यानी ज्यूपिटर का ग्रेट रेड स्पॉट. बृहस्पति ग्रह पर बीते 350 साल से अधिक समय से एक भयंकर तूफान आया हुआ है. इसे वैज्ञानिकों ने 'ग्रेट रेड स्पॉट' नाम दिया गया है. यह एक चक्रवाती तूफान है. हीरें सैटर्न यानी शनि ग्रह पर वह चीज आसमान से बरसती है जिसके लिए लोग धरती पर एक दूसरे की जान भी ले सकते हैं. दरअसल, यहां हीरों की बरसात होती है. हर साल लगभग एक हजार टन हीरों की बरसात शनि ग्रह पर होती है. बहुत ज्यादा तेज इलेक्ट्रिक तूफान मीथेन को कार्बन में बदल देते हैं जो जमा होकर ग्रेफाइट बन जाता है और प्रेशर के कारण ग्रेफाइट हीरे में बदल देता है. ग्रेफाइट को हीरें में बदलने के लिए बहुत ज्यादा प्रेशर की जरूरत होती है जो पृथ्वी पर नहीं है. हालांकि हीरों की बारिश अगर हमारे यहां होची तो लोगों के सिर पर हीरे गिरने से उनकी मौत भी हो सकती थी. अगर आपको हीरे चाहिए तो आप इस प्लेनेट का रुख कर सकते हैं. चट्टानों की बारिश कोरोट एक्सपी 7 बी नाम का एक प्लेनेट है, जिसका साइज धरती से 2 गुना है. इस प्लेनेट का एक साइड हमेशा सूरज की तरफ रहता है और इस साइड का टेंपरेचर 2326 डिग्री सेल्सियस तक रहता है. इसकी गर्मी चट्टान को भाप में बदल सकती है. इसीलिए जब यहां मौसम बदलता है तो पत्थरों की बरसात होती है. दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर बताएं कि धरती पर बारिश के दौरान आसमान से क्या बरसता है.
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