मोदी सरकार को लेकर जज का बड़ा ऐलान, हिंदू राष्ट्र से भारत बन जाएगा इस्लामिक देश?

देश में इन दिनों कई मुद्दें चर्चा में बने हुए हैं. इन मुद्दों में से एक एनआरसी का मुद्दा भी काफी तूल पकड़ रहा है. वहीं इस मुद्दे को लेकर एक जज ने अनोखी अपील भी मोदी सरकार से कर दी है. केंद्र की मोदी सरकार भारत को इस्लामिक देश होने से बचाए. यह अपील एक जज ने की है. दरअसल, मेघालय हाईकोर्ट के जज ने एक मामले की सुनवाई के दौरान ऐसी टिप्पणी की जिसका केस से कोई संबंध नहीं था. मेघालय में हाईकोर्ट के एक जज ने कहा कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी यानी एनआरसी दोषपूर्ण है क्योंकि इस वजह से कई विदेशी भारतीय बन गए हैं और किसी को भी भारत को एक इस्लामिक देश बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

देखें वीडियो-

न्यायाधीश एसआर सेन ने एक व्यक्ति की याचिका का निपटारा करते हुए एक आदेश में कहा कि उन्हें विश्वास है कि नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में इस मुद्दे की गंभीरता से समझा जाएगा. संबंधित व्यक्ति को मेघालय का नागरिकता सर्टिफिकेट नहीं मिला है. न्यायाधीश ने कहा कि पाकिस्तान ने आजादी के बाद खुद को इस्लामिक देश घोषित कर दिया था. भारत को भी खुद को एक हिंदू देश घोषित कर देना चाहिए था लेकिन वह धर्मनिरपेक्ष बना रहा.

इसी दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, पारसियों, ईसाइयों, खासी, जैनियों और गारो को इस देश में शांतिपूर्वक रहने देने के लिए एक कानून बनाने की मांग की और साथ ही कहा कि इसके लिए समय सीमा की पाबंदी नहीं होनी चाहिए. जज ने कहा, ‘एनआरसी दोषपूर्ण है क्योंकि कई विदेशी भारतीय बन गए और वास्तव में भारत में रहने वाले लोग इस सूची से बाहर हो गए.’

बीजेपी नेता ने ही खोल दी पार्टी की हार की पोल, बीजेपी की हार की ये बड़ी वजह जानकर देश में बवाल मच गया है…?

जज सेन ने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सिर्फ यह सरकार इस मुद्दे की गंभीरता को समझ सकती है और जैसा कि ऊपर आग्रह किया गया है, वह करेंगे और हमारी मुख्यमंत्री ममता जी राष्ट्रीय हित में इस समर्थन करेंगी.’ इसके अलावा उन्होंने कहा कि हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, इसाई, खासी, जैन और गारो जनजाति जो अभी बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में रह रहे हैं उन्हें बिना किसी सवाल या 21 दस्तावेजों को पेश किए हुए नागरिकता दी जानी चाहिए.

हालांकि उनके अनुसार वे उन मुसलमान भाइयों और बहनों के विरोधी नहीं है जो सदियों से यहां रहते आ रहे हैं और भारत के कानून का पालन कर रहे हैं. वे यहां शांति से रह रहे हैं इसलिए उन्हें यहां रहने की इजाजत दी जाए. हालांकि उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि सभी भारतीय नागरिकों की खातिर एकसमान कानून बनाया जाए, ताकि उन पर देश के कानून और संविधान का पालन करने का दबाव हो. जज ने कहा कि भारत के कानून और संविधान का विरोध करने वाले किसी व्यक्ति को भारत का नागरिक नहीं माना जा सकता है. हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि पहले हम भारतीय हैं और फिर अच्छे मनुष्य की श्रेणी में आते हैं. इसके बाद जिस समुदाय से भी हमारा संबंध है, वह उसके बाद आता है.

यही नहीं, जज ने निर्देश दिया कि यह आदेश मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय और मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक और उनके सहकर्मियों तक पहुंचाई जाए.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि किसी विदेशी को भारतीय नागरिकता मिलनी चाहिए या नहीं?

(Visited 255 times, 1 visits today)

सुझाव कॉमेंट करें

About The Author

आपके लिए :