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मोदी की चाल तालिबान पर वार RJ

by GwriterSK

भारत की ताकत का अंदाजा तो तालिबान को पहले ही था लेकिन उसने अब अपने घुटने भी टेकने शुरू कर दिए हैं. भारत के लिए यह यह खबर दोहा से आई जिसे सुनकर आपको अपने देश पर गर्व होने वाला है , बतायेंगे आपको पूरा विस्तार से वो कौन सी तीन बाते हैं जिसे तालिबान ने मानने को मजबूर हो गया है. 

तालिबान और भारत की ये नजदीकियां पाकिस्तान को बहुत परेशान करने वाली है.

कतर की राजधानी दोहा में तालिबान खुद चलकर भारत के राजदूत से मिलने आया है यानी की लोकेशन हमारी थी जगह हमारी थी, शेर मोहम्मद अब्बास खुद भारत के ऑफिस पंहुचा था और रिक्वेस्ट की थी की भारत उसके साथ बात चीत कर. यह खबर जैसे ही हमारे दो पड़ोसी देश पाकिस्तान और चाइना पहुची पूरी आग की तरह फ़ैल गयी. पाकिस्तान तालिबान को अपना भाई मानता है लेकिन उसने तो अब भारत से रिश्तेदारी जोड़नी शुरू कर दी है. और इस बात को ना तो पाकिस्तान हज़म कर पा रहा है ना तो चीन. 

चलिए अब जान लीजिये वो तीन बाते कौन सी हैं.

सबसे पहली बात 

तालिबान ने भारतीय नागरिकों को अफगानिस्तान से सुरक्षित वापसी का भरोसा दिलाया और कहा कि जब तक एक भी भारतीय  अफगानिस्तान में रहेगा तब तक यह तालिबान की जिम्मेदारी है कि उस भारतीय  को किसी भी प्रकार की कोई नुकसान ना पहुचे.

दूसरी बड़ी खबर अफगानिस्तान में रह रहे हिंदुओं और सिखों को लेकर है. तालिबान ने कहा है कि भारत हिंदुओं और सिखों को अफगानिस्तान से बाहर निकाल चाहता है तो इस पर तालिबान को कोई एतराज़ नही होगा. दोस्तों आपकी जानकारी के लिए बता दें की इससे पहले तालिबान अफ़गानिस्तान से किसी भी अफगानी को देश से बाहर नही निकलने देना चाहता था. इसके पीछे उसकी एक साजिश थी कि जितनी बड़ी अफगनिस्तान में आबादी होगी तो गरीबी और भुखमरी भी उतनी ही अधिक होगी जिससे उनको विदेशी फंड मिलेगा ताकि अफगानी नागरिकों की जीवन को बेहतर किया जा सके. ये तो थी दूसरी बड़ी खबर आइये अब आपको बताते हैं तीसरी बड़ी खबर के बारे में.

तीसरी बड़ी खबर जिससे सबसे ज्यादा पाकिस्तान परेशान हुआ है वह खबर है कि तालिबान ने फिर से स्पष्ट किया है अफगानिस्तान की सर जमीन का भारत के खिलाफ किसी भी आतंकी गतिविधियों में प्रयोग नहीं किया जाएगा. इसके पहले पाकिस्तान के टेलीविजनों पर पाकिस्तानी नेता कह रहे थे की पाकिस्तान और तालिबान दोनों मिलकर कश्मीर को भारत से आजाद कराएँगे.

जब तालिबान के टॉप लीडर भारतीय राजदूत से मिलने पहुंचे तो राजदूत ने इन्हीं तीन बड़े मुद्दों को तालिबान के सामने उठाया और तालिबान ने बिना किसी हिचकिचाहट के सहमति जाहिर कर दी.

तालिबान ने अभी अपनी सरकार पूरी तरीके से स्थापित भी नहीं की लेकिन भारत से बातचीत करने की ख्वाहिश जाहिर करना शुरू कर दिया है.

तालिबान लगातार कह रहा है कि हम भारत से बेहतर रिश्ते चाहते हैं, भारत हमारे साथ मिलकर काम कर सकता है. आपको बता दें कि अफ़गानिस्तान में इस वक्त भारत के 500 से अधिक प्रोजेक्ट चल रहे हैं. जिसको लेकर तालिबान से अभी फ़िलहाल कोई बात नही हुयी है.

 भारत भी तालिबान से बात चीत के रास्ते खुले रखना चाहता है. दोस्तों आपको तो पता ही होगा की विदेश नीति में तो कोई स्थायी दोस्त होता है और ना ही कोई स्थायी शत्रु.लेकिन दोस्तों आपको क्या लगता है भारत तालिबान से रिश्ते बनायेगा क्योंकि भारत कि हमेशा विदेश नीति निःशस्तीकरण रही है. और तालिबान ने अफ़गानिस्तान पर कब्ज़ा ही शस्त्र के दम पर किया है. इतना ही नही अफ़गानिस्तान की महिलाओं, बच्चों पर जुल्म होगा तो भारत तालिबान के नजदीक आ पायेगा. ये जवाब तो आने वाला समय ही दे पायेगा.

दोस्तों अब आपको बताते हैं क्यों तालिबान भारत के नजदीक आना चाहता है, क्यों तालिबान पाकिस्तान से ज्यादा भारत को तव्वजों दे रहा है, तो ध्यान से सुनिए 

भारत की तरक्की जितनी रफ़्तार से चल रही है , चाहे अमेरिका हो या रुश सब इस बात को भलीभाँति  समझते हैं और तालिबान को भी पता है यदि हमको सरकार चलानी है तो पडोसी देश से रिश्ते अच्छे बनाकर रखने होंगे. 

भारत अफ़गानिस्तान को सलाना बहुत फंड देता आया है  जिसके कारण अफ़गानिस्तान की इकॉनमी चल पाती है. अभी तालिबान के पास इतने कुशल नेता भी नही हैं कि वो देश की अर्थ व्यवस्था के लिए प्लानिंग कर पायें और उनको सुचारू रूप से चला सकें.

अमेरिका के निकल जाने के बाद अमेरिका की दक्षिण एशिया में स्थिति शून्य हो गयी है. बाईडेन को अभी अपना घर देखना है. तालिबान भी जानता है की चीन चीन और पकिस्तान भरोषे लायक है नहीं तो ऐसे में तालिबान के पास पडोसी मुल्क में भारत के अवलावा और कोई विकल्प रह नही जाता इसलिए तालिबान चाहता है कि किसी भी तरीके से भारत से बात चीत का दौर शुरू हो जाए.

आपको बता दें की अभी भी अफ़गानिस्तान में 200 से अधिक हिन्दू और शिख जो अफगानी नागरिक हैं तालिबान के चंगुल में फसे हुए हैं. जिनको शुरआत में भारत निकलना चाहता था लेकिन तालिबान रोक लगा दिया था. यदि भारत को अफ़गानिस्तान से हिन्दुओं और सिखों को निकलना है तो तालिबान से वार्ता तो करनी पड़ेगी इसलिए भारत ने भी अभी फ़िलहाल तालिबान के खिलाफ़ नरमी दिखा रहा है.

तालिबान अपनी इस मुलाकात में भारत को अपने दूतावास को फिर से खोलने की भी बात कही लेकिन फ़िलहाल भारत का दूतावास काबुल में बंद है और सभी कर्मचारियों को भारत अपने वतन ला चूका है.

आइये अब आपको मोदी से जुड़े कुछ वाक्यों को बताते हैं जिसके बाद आपको मोदी के अफगानिस्तान में क्या इमेज बनी है पता चल जायेगा.

रुश जैसा ताकतवर देश जिसने भी अफ़गानिस्तान पर 80 के दशक में कब्जे ज़माने की कोशिश की थी वो भी मोदी से तालिबान और अफ़गानिस्तान के विषय पर बात करता है. इतना ही नही जर्मनी इटली ब्रेटन भी भारत की अफ़गानिस्तान पर सलाह लेते है. 

लेकिन फ़िलहाल भारत अभी कोई जल्दबाज़ी नही करना चाहेगा क्योंकि तालिबान के बयानों पर अभी भरोषा नही किया जा सकता है. अमेरिका के निकलते ही तालिबान ने अपना असली चेहरा दिखाना शुरू कर दिया है. अमेरिका के साथ काम करने वाले एक इंसान को तालिबानों ने अमेरिकी जहाज में बांधकर आसमान में उडा दिया था जिसके बाद उसकी मौत हो गयी है. उस इंसान ने बस इतनी गलती की थी की वो अमेरिका के सैनिकों के साथ काम करता था.

तालिबान भी अब अफ़गानिस्तान में दिन प्रतिदिन मजबूत होता जा रहा है जिसको केवल पंजशीर पर कब्ज़ा करना रह गया है और अमेरिका की सेना के 31 अगस्त को वापस चले जाने के बाद पंजशीर पर कार्यवाही तेज़ कर दी है. अहमद मसूद के समर्थक और तालिबान के बीच के संघर्ष की तीव्रता बढती जा रही. आपको बता दें की अफ़गानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़ने के बाद अपने आपको राष्ट्रपति घोषित करने वाले अमरुल्ला सालेह भी इस वक्त पंजशीर की घाटी में मौजूद हैं.

15 अगस्त को तालिबान अफ़गानिस्तान पर कब्ज़ा कर लिया था और तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ गनी कब्जे से पहले देश को छोड़ चुके थे. संयक्त अरब अमीरात ने उन्हें शरण दी हुई है. देश छोड़ने के बाद अशरफ गनी ने एक विडियो मैसेज दिया था जिसमें कहा था कि वो अपने देश ज़रूर लौटेगें. 

दोस्तों आपको और एक बात बतातें हैं की तालिबान के कब्ज़े वाले क्षेत्र में लगातार अफीम की खेती बढ रही है जो पड़ोसी देशों के लिए चिंता का विषय है.

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