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बिहार के ये खनिज उसे अमीर बना सकता है?

वहीं बिहार में मुख्त तौर से बात करें तो मुंगेर और गया में अभ्रक है तो औरंगाबाद में कोयला मिलेगा. वहीं रोहतास और कैमूर के पठार में चूना पत्थर मिलेगा.

झारखंड के अलग होने के बाद से गरीब मानी जाती रही बिहार की धरती अपने खजानों से जगमगा सकती है. भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण में पाया गया है कि बिहार की धरती में खनिजों का खजाना है. बिहार में इतने खनिज है कि बिहार अपनी गरीबी को दूर भी कर सकता है. लेकिन कई लोगों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं है. तो दोस्तों, आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि बिहार में कौन-कौन से खनिज पाए जाते हैं... लेकिन दोस्तों, उससे पहले अगर आपने हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो सब्सक्राइब जरूर कर लें...

झारखंड के अलग हो जाने के बाद बाद माना जा रहा था कि बिहार में सिर्फ बालू और पहाड़ ही बच गए हैं. सारे खनिज झारखंड में चले गए हैं. लेकिन एक रिपोर्ट में ये बात गलत साबित हुई है. दरअसल, अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए 15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्‍य के रूप में अस्तित्‍व में आया था. इसी दिन बिहार के स्‍वतंत्रता सैनानी बिरसा मुंडा का जन्‍म दिन भी था. झारखंड बनने के बाद बिहार की तरफ से बार-बार इस बात का जिक्र कई मंचों पर किया जाता रहा है कि बिहार की कमाई का बड़ा जरिया झारखंड में चला गया है. इसके पीछे एक बड़ी वजह यह थी कि बिहार के विभाजन के बाद ऐसे क्षेत्र जहां पर कोयले की खान हुआ करती थीं वह झारखंड में चली गईं. वहीं बिहार में खेती की भूमि ज्‍यादा हाथ आई. खनिज के मामले में भी झारखंड आगे रहा. लेकिन बिहार में भी खनिजों की कम कमी नहीं है.

भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बिहार के कई जिलों में अनेक प्रकार की खनिज संपदा पाई जाती है. राज्य के विभाजन के बाद प्रमुख खनिज उत्पाद जैसे- कोयला, बॉक्साइट, क्वार्टरजाईट, अभ्रक, तांबा, अयस्क, ग्रेफाइट का भंडार झारखंड में चला गया. लेकिन इसके बावजूद बिहार में कई मूल्यवान खनिज अभी भी मौजूद है. वर्तमान बिहार में प्रधान रूप से चुना पत्थर, पायराइट, चीनी-मिट्टी, फेल्सपार, सोना, सेट, सजावरी ग्रेनाइट शोरा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है.

नवंबर 200 में राज्य के विभाजन के कारण ज्यादातर खनिज संपदा के झारखंड में चले जाने के बाद बिहार के मुंगेर, भागलपुर और बांका जिले में उपलब्ध तांबा, सीसा, जस्ता, सोना, कीमती पत्थर, टीन और दुर्लभ धातुओ से खनिज संपदा का महत्व और भी बढ़ गया है. एक सर्वेक्षण के मुताबिक राज्य के मुंगेर जिले के खड़कपुर पहाड़ियों में सतह से 100 मीटर नीचे तक करीब 44.9 करोड़ क्वार्टरजाईट का पता लगाया गया है. जिस में सिलिका की मात्रा 97 में से 99 फीसदी है. इसका इस्तेमाल कांच उद्योग में किया गया है और आजकल इसका इस्तेमाल सिलिका की ईंट बनाने में व्यापक रूप से हो रहा है. राज्य के बांका, भागलपुर और जमुई जिलों से गुजरने वाले इसातु बेलबभान बहुधातमिक पट्टी में उपधातु, तांबा, सीसी और जस्ता का पता लगाया गया है. बांका जिला के पिंडारा, ढाबा और बिहार वाड़ी क्षेत्रों में 6.9 लाख टन उप धातु अयस्क का आकलन किया गया है.

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वहीं बिहार में मुख्त तौर से बात करें तो मुंगेर और गया में अभ्रक है तो औरंगाबाद में कोयला मिलेगा. वहीं रोहतास और कैमूर के पठार में चूना पत्थर मिलेगा, साथ ही रोहतास के अंजोर में गंधक भी पाया जाता है. गया में सीलीमेंनाइट और लिथियम भी मिल जाएगा. इसके अलावा भागलपुर में शीशा और कांच पत्थर मिलेगा. मुंगेर के खड़कपुर की पहाड़ियों, खपरा, मेरा, देंगा, सारंग और रोहतास में बॉक्साइट अच्छी मात्रा में पाया जाता है. गया और नवादा में बेरिलियम की भी भरमार है. इसके अलावा गया, देवराज और चकखंद में टिन भी पाया जाता है. भागलपुर के कसरी, पत्थर घाटा, सुमुखिया, झरना, हरंकारी, बांका के कटोरिया और मुंगेर में चीनी मिट्टी की भंडार है. तो वहीं रोहतास के बंजारी में डोलोमाइट पाया जाता है. बिहार के पूर्णिया, कटिहार और निकटवर्ती क्षेत्र में पेट्रोलियम के भी संभावित भंडार देखने को मिल जाएंगे. वहीं रोहतास, सोन नदी की घाटी, बंजारी में पाइराइट और जमुई में क्वार्टज पाया जाता है.

बिहार और झारखंड में फर्क
90 के दशक में, शिबू सोरेन के नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने झारखंड के लिए जन आंदोलन किया. बाद में भाजपा ने छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के साथ झारखंड के गठन का समर्थन किया. राष्ट्रपति के आर नारायणन ने 2000 में बिहार पुनर्गठन बिल को मंजूरी दी और झारखंड भारत के 28 वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया. वहीं झारखंड और बिहार दोनों हिंदी राज्य हैं. भौगोलिक दृष्टि से पास और पहले एक राज्य थे, लेकिन हमेशा सांस्कृतिक, राजनीतिक, भौगोलिक और आर्थिक मतभेद थे. बिहार में सभी भाषाएं भारत-आर्य भाषा समूह से संबंधित हैं. जहां झारखंड में द्रविड़ियाना और प्रागैतिहासिक ऑस्ट्रोलॉइड भाषाएं भी बोली जाती हैं. उदाहरण के लिए कुरुख एक द्रविड़ भाषा है, जहां सांताली भाषा मुंडा में ऑस्ट्रोसिटिक भाषाओं के उप-समूह में है. झारखंड में 26 फीसदी जनजातियां शामिल हैं, जहां बिहार में यह केवल 1फीसदी के करीब ही है और झारखंड मुख्य रूप से पठार है तो वहीं बिहार में गंगा मैदान में है.

इतिहास में बिहार में अच्छी तरह से विकसित प्रांत मगध, मिथिला और भोजपुर शामिल हैं. जहां झारखंड मगध और कलिंग के बीच विभिन्न जनजातियों क्षेत्र के मातृभूमि थे. झारखंड उद्योग और खान राज्य है, और बिहार मुख्य रूप से कृषि राज्य है. वहीं दोस्तों झारखंड में खनिज बहुलता के कारण इसे भारत का रूर भी कहा जाता है जो कि ब्रिटेन के खनिज संपदा से परिपूर्ण एक जगह के नाम रूर से प्रेरित है. सम्पूर्ण भारत में खजिन उत्पादन के मामले में झारखंड को पहला स्थान हासिल है. सम्पूर्ण भारत में खजिन उत्पादन का झारखंड का 40 फीसदी हिस्सा है राज्य को केवल खनन उद्योग से 3000 करोड़ रूपये की कमाई होता है.

झारखंड में मुख्य रूप से कोयला, हेमेटाइट लौह अयस्क, मैग्नेटइट लौह अयस्क, ताम्र अयस्क, चूना पत्थर, बॉक्साइड, कायनाइट, चाइनाक्ले, ग्रेफाइड, क्वार्टज/सिलिका, अग्नि मिट्टी, अभ्रक पाया जाता है. झारखंड के पास इनका प्रचुर मात्रा में भंडार है.