स्वदेशी गगनयान के बारे में इस तथ्य से है हर कोई अनजान…!

साल 2018 के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को लालकिले से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि 2022 से पहले भारत का कोई बेटा या बेटी अंतरिक्ष में स्वदेशी गगनयान से पहुंचेगा. प्रधानमंत्री ने गगनयान मानवसहित स्पेसप्रोग्राम की घोषणा की.
हालांकि इस प्रकार के मिशन के लिए अधिकतम तकनीक R&D फंड से बनती है. वहीं आम नागरिक इस तथ्य से अनजान है कि इसके लिए करीब 10 हजार करोड़ रुपये का फंड चाहिए होगा. प्रधानमंत्री के इस ऐलान का इसरो ने भी तहेदिल से स्वागत किया है. पीएम की इस घोषणा पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अपनी प्रतिबद्धता जताई है. इसरो के चेयरमैन ने कहा है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर जुट जाने की जरूरत है.
पीएम ने 2022 का लक्ष्य दिया है और इसरो पहले से ही इस मिशन पर काम कर रहा है. कई टेक्नॉलजी जैसे कि क्रू मॉड्यूल और एस्केप सिस्टम पर काम पूरा हो चुका है. प्रॉजेक्ट पर वैज्ञानिक जुटे हुए हैं. अब लक्ष्य हासिल करने की दिशा में प्राथमिकता के साथ काम करने की जरूरत है.
हालांकि लक्ष्य हासिल करने के आगे कुछ चुनौतियां भी हैं. इसके लिए तकनीक को बेहतर करना होगा. डेडलाइन मुश्किल तो है लेकिन भारत के पास निश्चित रूप से इसको हासिल करने की क्षमता है. वहीं भारत के आगे एक बड़ा रॉकेट और अंतरिक्ष यात्रा के लिए ट्रेनिंग दो प्रमुख चुनौतियां हैं.
बता दें कि मंगलयान से लेकर अब तक भारत के वैज्ञानिकों ने अपनी ताकत का परिचय करवाया है. अब मानव सहित गगनयान लेकर अंतरिक्ष में जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. अगर भारत इसमें कामयाब होता है कि भारत तब विश्व के अंदर ऐसा करने वाला चौथा देश होगा.
दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर बताएं कि भारत में स्वतंत्रता दिवस किस तारीख को मनाया जाता है…? इस सवाल का सही जवाब देने वाले 10 लकी विजेताओं को मिल सकता है एक सरप्राइज गिफ्ट…!

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