इस विधि से करें नवरात्र में कलश स्थापना, पूरे साल बनी रहेगी माता की कृपा!

त्योहारों के देश भारत में 365 दिन ही हर्षोल्लास के साथ कुछ न कुछ पर्व मनाया जाता रहता है. इन पर्वों में एक पर्व नवरात्र का भी होता है जो साल में दो बार मनाया जाता है. इसे एकबार चैत्र नवरात्रि तो दूसरी बार शारदीय नवरात्रि के तौर पर जाना जाता है. नौ दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है. नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करने से लोगों को हर मुश्किल से छुटकारा मिल जाता है. वहीं नवरात्र में कलश स्थापना का भी विशेष महत्व होता है. नवरात्रि के पहले दिन घर में कलश स्थापित किया जाता है. माना जाता है कि अगर पूरे विधि विधान के साथ नवरात्र में कलश स्थापना की जाए तो माता की कृपा पूरे साल भर बनी रहती है. आइए यहां जानते हैं कि नवरात्र में कलश स्थापना और माता की अराधना कैसे करें…

हिन्दू शास्त्रों में किसी भी पूजन से पहले भगवान गणेश की आराधना का प्रावधान बताया गया है. माता की पूजा में कलश से संबंधित एक मान्यता के अनुसार, कलश को भगवान विष्णु का प्रतिरुप माना गया है. इसलिए सबसे पहले कलश का पूजन किया जाता है. कलश स्थापना करने से पहले पूजा स्थान को गंगा जल से शुद्ध किया जाना चाहिए. पूजा में सभी देवताओं आमंत्रित किया जाता है.

कलश में हल्दी की गांठ, सुपारी, दूर्वा, मुद्रा रखी जाती है और पांच प्रकार के पत्तों से कलश को सजाया जाता है. इस कलश के नीचे बालू की वेदी बनाकर कर जौ बौए जाते हैं. जौ बोने की इस विधि के जरिए अन्नपूर्णा देवी का पूजन किया जाता है. जोकि धन-धान्य देने वाली हैं और माता दुर्गा की प्रतिमा पूजा स्थल के बीच में स्थापित कर रोली ,चावल, सिंदूर, माला, फूल, चुनरी, साड़ी, आभूषण और सुहाग से माता का श्रृंगार करना चाहिए. इस तरह से कलश स्थापना करने के बाद सभी देवी देवताओं की अराधना की जाती है और साथ ही नौ दिन के व्रत की शुरुआत हो जाती है.

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वहीं नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा करने और व्रत रखने का विधान होता है. नवरात्र के नौ दिन सुबह शाम गणेश जी की और देवी मां की आरती की जाती है. माता को प्रातः काल फल और मिष्ठान का भोग और रात में दूध का भोग लगाना चाहिए और पूर्ण वाले दिन हलवा पूरी का भोग लगाना चाहिए. इस दिन से ‘दुर्गा सप्तशती’ या ‘दुर्गा चालीसा’ का पाठ शुरू किया जाता है. पाठ पूजन के समय अखंड दीप जलाया जाता है जोकि व्रत के पारण तक जलता रहना चाहिए.

कलश स्थापना के बाद, गणेश जी और मां दुर्गा की आरती से नौ दिनों का व्रत प्रारंभ किया जाता है. कलश स्थापना के दिन ही नवरात्रि की पहली देवी, मां दुर्गा के शैलपुत्री रूप की आराधना की जाती है. इस दिन सभी भक्त उपवास रखते हैं और सायंकाल में दुर्गा मां का पाठ और विधिपूर्वक पूजा करके अपना व्रत खोलते हैं.

मान्यता है कि इन नौ दिनों में माता की पूजा अर्चना करने से सुख, शांति, यश, वैभव और मान-सम्मान हासिल होता है. 9 दिनों की पूजा के बाद 9 कन्याओं की पूजा का भी विशेष महत्व होता है.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर बताएं कि नवरात्र में किस देवी की पूजा की जाती है.

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