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पाकिस्तानी दुश्मन के हाथ की घड़ी का वक्त भी देख लेगा भारत का ये सैटेलाइट

पाकिस्तान पर हुए सर्जिकल और एयर स्ट्राइक पर रीसैट और कार्टोसैट उपग्रहों की मदद ली गई थी. रीसैट के जरिए अंतरिक्ष से जमीन पर 3 फीट की ऊंचाई तक की उम्दा तस्वीरें ली जा सकती हैं. कार्टोसैट-3 का कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर 1 फीट से भी कम की ऊंचाई तक की तस्वीर ले सकेगा.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO ने चंद्रयान-2 को लॉन्च करके एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. भारत के इस मिशन के जरिए दुनिया में भारत का सीना चौड़ा हो चुका है. साथ ही भारतीय भी इस मिशन के कारण गर्व से भरे हुए हैं. इस मिशन के जरिए भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव की जानकारी इकट्ठा करेगा. यह मिशन इस लिए भी जरूरी है कि अभी तक चांद के दक्षिणी ध्रुव पर दुनिया के किसी मिशन को नहीं भेजा गया है. भारत ऐसा पहला देश है जिसने ऐसा कदम उठाया है और चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपना मिशन भेजा है. ऐसे में भारत को कुछ नई जानकारियां वहां से मिलने की उम्मीद है. इतना ही नहीं दोस्तों, इसरो अब एक ऐसे मिशन की तैयारी में जुट गया है जो दुश्मनों को खदड़ने के लिए काफी उपयोगी साबित होगा. जी हां दोस्तों, भारत अब एक ऐसा मिशन लॉन्च करने वाला है जिससे पाकिस्तान के छक्के आराम से बैठकर ही छुड़ाए जा सकते हैं. इस मिशन के जरिए भारत एक ऐसा सैटेलाइट लॉन्च करने वाला है जो दुश्मन के हाथ में पहनी घड़ी का वक्त तक बता सकता है. चौंक गए न दोस्तों आप...लेकिन ये सच है. भारत इस सैटेलाइट की मदद से पाकिस्तान पर नजर बनाए रख सकेगा और कोई भी गड़बड़ होने पर तुरंत उसको जवाब देने में भी सक्षम होगा. आज हम भारत के इसी मिशन और सैटेलाइट के बारे में बात करने वाले हैं.. लेकिन दोस्तों, इससे पहले अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो नए अपडेट्स पाने के लिए जल्द से जल्द सब्सक्राइब कर लें... तो आइए शुरू करते हैं...

दोस्तों, चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग के बाद ही इसरो चीफ के. सिवन ने ये साफ कह दिया था कि चंद्रयान-2 मिशन के बाद इसरो और उसके वैज्ञानिक आराम नहीं करेंगे. वे और बड़े मिशन करेंगे. डॉ. सिवन ने एक अहम घोषणा करते हुए कहा कि वे इस साल एक और बड़ा मिशन लॉन्च करने वाले हैं. इस मिशन के तहत कार्टोसैट-3 को लॉन्च किया जाएगा, इस मिशन से देश के दुश्मनों के होश उड़ जाएंगे. इसरो के सूत्रों के मुताबिक कार्टोसैट-3 को इसी साल लॉन्च किया जा सकता है. दोस्तों, इस सैटेलाइट का काम अंतरिक्ष से भारत की जमीन पर नजर रखना होगा. आपदाओं में और ढांचागत विकास के लिए मदद करने के लिए इसका महत्वा काफी बढ़ जाएगा. लेकिन इसका उपयोग देश की सीमाओं की निगरानी के लिए भी होगा. पाकिस्तान और उसके आतंकी कैंपों पर नजर रखने के लिए यह मिशन देश की तीसरी आंख होगी. यह सीमाओं पर नजर रखेगी. दुश्मन या आतंकियों ने हिमाकत की तो इस आंख की मदद से हमारी सेना उन्हें उनके घर में घुस कर मार सकेगी.

यह सैटेलाइट इतनी ताकवर है कि इससे कई काम बड़े ही आसानी से किए जा सकते हैं. इस सैटेलाइट का नाम Cartosat-3 (कार्टोसैट-3) है. यह कार्टोसैट सीरीज का नौवां सैटेलाइट होगा. कार्टोसैट-3 का कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर 1 फीट से भी कम लगभग 9.84 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीर ले सकेगा. यानी आप की कलाई पर बंधी घड़ी पर दिख रहे वक्त की भी सटीक जानकारी इस सैटेलाइट के जरिए दी जा सकेगी.

दोस्तों, पाकिस्तान पर हुए सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक पर कार्टोसैट उपग्रहों की मदद ली गई थी. इसके अलावा विभिन्न प्रकार के मौसम में पृथ्वी की तस्वीरें लेने में भी ये सैटेलाइट सक्षम है. प्राकृतिक आपदाओं में भी यह मदद करेगा. वहीं इस बार के कार्टोसैट-3 का कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर 0.25 मीटर यानी 9.84 इंच की ऊंचाई तक की साफ तस्वीरें लेकर उन्हें तुरंत आगे बढ़ा सकता है. माना जाता है कि अभी तक इतनी सटीकता वाला सैटेलाइट कैमरा किसी देश ने लॉन्च नहीं किया है. अमेरिका की निजी स्पेस कंपनी डिजिटल ग्लोब का जियोआई-1 सैटेलाइट 16.14 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीरें ले सकता है. वहीं, इसी कंपनी का वर्ल्डव्यू-2 उपग्रह 18.11 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीरें ले सकता है. इसे पृथ्वी से 450 किमी ऊपर की कक्षा में स्थापित किया जाएगा.

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दोस्तों, कार्टोसैट सीरीज का पहला सैटेलाइट कार्टोसैट-1 पांच मई 2005 को पहली बार लॉन्च किया गया था. इसकी लाइफ 5 साल की थी. इसके बाद 10 जनवरी 2007 को कार्टोसैट-2 लॉन्च किया गया. इसके बाद, 28 अप्रैल 2008 को कार्टोसैट-2ए लॉन्च किया गया. 12 जुलाई 2010 को कार्टोसैट-2बी, 22 जून 2016 को कार्टोसैट-2 सीरीज सैटेलाइट, 15 फरवरी 2017 को कार्टोसैट-2 सीरीज सैटेलाइट, 23 जून 2017 को कार्टोसैट-2 सीरीज सैटेलाइट और 12 जनवरी 2018 को कार्टोसैट-2 सीरीज सैटेलाइट लॉन्च किए गए.

दोस्तों, भारत पाकिस्तान को अब हर हाल में करारा जवाब देना चाहता है और आतंक को जड़ से खत्म करना चाहता है. इसलिए भारत कई और भी मिशन भेजने की तैयारी में. पाकिस्तान और उसके आतंकी कैंपों पर नजर रखने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन बड़ी तैयारी कर रहा है. इसरो आने वाले दिनों में 8 उपग्रह छोड़ेगा. इनमें से 5 उपग्रह देश की धरती और पृथ्वी की निगरानी करेंगे. हालांकि ये माना जा रहा है कि इन सभी उपग्रहों का उपयोग देश की सीमाओं की निगरानी के लिए होगा. इन 5 उपग्रहों में से एक कार्टोसैट सीरीज और 4 रीसैट के उपग्रह हैं. बाकी तीन उपग्रह जीसैट सीरीज के हैं. जीसैट उपग्रहों का उपयोग संचार के लिए किया जाता है. साथ ही इनका उपयोग सैन्य बलों की सुरक्षित संचार प्रणाली के लिए भी किया जाता है. फरवरी 2020 तक इन सभी उपग्रहों की लॉन्चिंग पूरी होने की उम्मीद है.

पाकिस्तान पर हुए सर्जिकल और एयर स्ट्राइक पर रीसैट और कार्टोसैट उपग्रहों की मदद ली गई थी. रीसैट के जरिए अंतरिक्ष से जमीन पर 3 फीट की ऊंचाई तक की उम्दा तस्वीरें ली जा सकती हैं. कार्टोसैट-3 का कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर 1 फीट से भी कम की ऊंचाई तक की तस्वीर ले सकेगा. इसरो ने खास मौकों पर रणनीतिक उपयोग के लिए कई ऐसे उपग्रहों को पहले ही लॉन्च किया था. हाइसिस, माइक्रोसैट-आर और एमीसैट जैसी सैटेलाइट को इसरे पहले ही लॉन्च कर चुका है.