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इसरो की कमाई कैसे होती है? कहां से आता है करोड़ों रुपया ?

दुनिया की टॉप फाइव स्पेस एजेंसियों में से एक है भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान यानि इसरो के बारे में शायद ही कोई ऐसा हो जो जानता नहीं हो. इसरो का एक बड़ा ढांचा देशभर में काम कर रहा है. काम करने वाली संस्थाओं में युवाओं की पहली पसंद इसरो ही है. इसरो में सैलरी के साथ युवाओं को अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि इसरो को पैसे कहां से मिलते हैं? हजारों करोड़ों रुपए इसरो एक रिसर्च पर खर्च कर देती है तो इन रिसर्चों के लिए पैसे कहां से आते है? चलिए जानते हैं.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान यानि इसरो भारत देश की स्पेस एजेंसी है. यह स्पेस में हो रही घटनाओं को और अन्य ग्रहओं पर जीवन की तालाश करती है. देश के विकास जैसे किसानों को खेती में उत्तम तकनीकी, बीज के अपग्रेड आदि चीजों को इसरो के अलग अलग सेंटरों में विकसित किया जाता है. अब सवाल यह कि इसरो को पैसे कहां से मिलते हैं?

दोस्तों, इसरो का सारा खर्च आम आदमी की पॉकेट यानि जैब से जाता है. अब सवाल यह कि आम आदमी की पॉकेट से कैसे? तो दोस्तों इसरो एक सरकारी संस्था है. इसरो को सारी सुविधाएं और  रिसर्च के पैसे सरकार उपलब्ध कराती है. सरकार वो पैसे भारतीय नागरिकों से टैक्स के रूप में लेती है. ऐसे में इसरो को बतौर खर्च दिए जाने वाले पैसे हमारी जैब से ही दिए जाते हैं. सभी सरकारें अपने हर साल के बजट का एक हिस्सा रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए रखती हैं. वह पैसा जरूरत और प्रोजेक्ट के हिसाब से इसरो को दिया जाता है. हमारी देश के सरकारें हजारों करोड़ रुपए अपनी रिसर्च टीम पर खर्च करती है. चंद्रयान-2 मिशन पर भी सरकार का ही करोड़ो का फंड लगा था.

इसरो की इमेज पेशेवर और सम्मानजनक  वैज्ञानिक संस्थान की रही है. जो लगातार नए मापदंड स्थापित कर रहा है. इसरो फिलहाल दुनिया की टॉप फाइव स्पेस एजेंसीज में शामिल है. ऐसे में स्वाभाविक है कि हमें उसकी नौकरी, सुविधाएं और कामकाजी माहौल के बारे में भी पता हो. अब जब सरकारें इसरो पर इतना पैसा देती हैं तो यह भी जानना जरूरी है कि हमारे वैज्ञानिकों को कैसी सुविधाएं और कितनी सैलरी मिलती है.

इसरो खुद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के जरिए हर साल वैज्ञानिकों की अपनी टीम तैयार करता है लेकिन बाहर से भी वैज्ञानिकों के साथ दूसरी भूमिकाओं में कई लोगों को नियुक्ति मिलती है. इसरो केवल वैज्ञानिक ही नहीं बल्कि बहुत सारे अन्य पदों पर भी क्षमता वाले लोगों की भर्ती करता है. सभी का सेलरी पैटर्न अलग है. वैसे यहां जब किसी नए साइंटिस्ट की नियुक्ति होती है तो उसे केंद्रीय सरकार के सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन मिलता है और साथ में भत्ते और दूसरी सुविधाएं भी मिलती है.

सुविधाओं की बात करें तो इसरो की कैंटीन काफी सस्ती है. आवास और परिवहन सुविधाएं हैं. बच्चों की पढाई मुफ्त है. हेल्थ कवर और छुट्टियां बेहतर हैं. यानि कहा जा सकता है कि ये ऐसी जगह है जहां कामकाज के बाद आपके पास परिवार के लिए भी काफी समय है. दोस्तो इसरो की इन सभी सुविधाओं के लिए सरकार हर साल बजट का एक हिस्सा संस्थान को देती ही है. दोस्तों, कमेंट कर जरूर बताएं चंद्रयान-2 को किस उपग्रह पर भेजा गया था.