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क्या आदित्य ठाकरे सीएम बनने के लायक है?

बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन बेहद पुराना है। इन दोनों पार्टियों के अलग होने की बात की जाये तो शायद किसी के लिए इस बात पर यकीन करना आसान नहीं होगा। यकीन करना तो छोड़िए कोई ऐसा सोच भी नहीं सकता। लेकिन कहते है न कि राजनीति एक ऐसा क्षेत्र है, जहां कभी भी किसी का भी पासा पलट सकता है।

बीजेपी  और शिवसेना का गठबंधन बेहद पुराना है। इन दोनों पार्टियों के अलग होने की बात की जाये तो शायद किसी के लिए इस बात पर यकीन करना आसान नहीं होगा। यकीन करना तो छोड़िए कोई ऐसा सोच भी नहीं सकता। लेकिन कहते है न कि राजनीति एक ऐसा क्षेत्र है, जहां कभी भी किसी का भी पासा पलट सकता है। यहाँ खेल बदलते देर नहीं लगती और वैसे भी यह हमेशा से माना जाता है कि राजनीति में कोई किसी का नहीं होता है। अपने-अपने फायदे के लिए पार्टियां आपस में जुड़ती है और फिर मतलब पूरा होने पर साथ छोड़ किसी और खेमे में शामिल हो जाती है। यह सब घटनाएँ बड़ी आम है।

लेकिन बीते दिनों सबसे हैरान करने वाली खबर आई महाराष्ट्र राज्य से। जहां बीजेपी  और शिवसेना के इतने पुराने गठबंधन के टूटने के आसार बनते दिखे। जिसका कारण है आदित्‍य  ठाकरे को राज्य का मुख्यमंत्री बनाए जाने की शिवसेना की मांग। बता दें कि इन दोनों पार्टियों का गठबंधन साल 1989 का है।

उद्धव ठाकरे ने बेशक पिता बाला साहब ठाकरे के बाद महाराष्ट्र की कमान अच्छे से संभाली और वहीं बीजेपी के साथ अपने गठबंधन को भी संभाला। पर अब बेटे को सीएम बनाने को लेकर पेंच अटक गया। आदित्‍य ठाकरे के सीएम बनने की क्षमता पर नज़र डाले तो वो पिता से राजनीति का गुण सीख रहे है। इनके राजनीति रिपोर्ट कार्ड को देखे तो आदित्‍य पिछले कुछ सालों में पार्टी की छात्र इकाई के प्रमुख रहे हैं। बीते कुछ महीनों में इन्होंने राज्‍य में पांच हजार किलोमीटर से अधिक की यात्रा करके लोगों के साथ जुडने का काम किया है। जोकि सराहनीय काम है। इन सबके चलते वो काफी वक़्त से चर्चाओं में दिख रहे है। अब उन्हें सीधे-सीधे तौर पर राज्य का सीएम बनाने की मांग शिवसेना की तरफ से उठी है।

इस मांग को लेकर काफी दाव-पेंच खेला गया। वैसे आदित्य ठाकरे चाहे राजनीति को जीतने भी अच्छे तरीके से समझते हो, पर अभी वो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के जितना परिपक्व नहीं हुए। है। आदित्य ठाकरे को सीएम बनाने की मांग पर देवेंद्र फडणवीस ने यह कटाक्ष किया कि “सपने देखने का हक सभी को है और इस हक को कोई नहीं छीन सकता है”। इतना ही नहीं अपनी जीत को लेकर भी वो बोले कि “इस बार हम पिछली बार से भी ज्यादा सीटें जीत कर रिकॉर्ड कायम करेंगे”। हालांकि, एक वक़्त पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे ने सीएम पद के लिए 50-50 का फॉर्मूला बताया था।

शिवसेना ने अपनी इस मांग के चलते दूसरी पार्टियों की ओर भी रुख किया ताकि गठबंधन हो सके। लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकार पार्टी के ही एक नेता ने बयान देकर तस्वीर को साफ किया। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि ‘बीजेपी के साथ शिवसेना का गठबंधन टूटा नहीं है’। उन्होंने यह भी कहा कि ‘व्यक्तिगत फायदा मायने नहीं रखता, राज्य जरूरी है’। इस बयान से साफ समझ आता है कि दोनों पार्टियों से साथ रहने का कोई तरीका खोज लिया है, लेकिन क्या आदित्य ठाकरे सीएम बनने के लायक है? इसका जवाब तो आगे चलकर ही पता चलेगा।

 

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