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भारत के 5 खुफिया जासूस, जिन्होंने जान हथेली पर रखकर की देश सेवा

भारत के 5 खुफिया जासूस, जिन्होंने जान हथेली पर रखकर की देश सेवा
सीक्रेट एजेंट यानी खुफिया जासूस वो लोग होते हैं जो खुद की पहचान छुपा कर देश हित में काम करते हैं. हमारे देश में भी कई खुफिया जासूस रहे हैं जो हमेशा अपनी जान जोखिम में डालकर देश की रक्षा का फर्ज निभाते रहे हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ जासूसों के बारे में... आरएन काव रामेश्वर नाथ काव यानी आरएन काव भारत के पहले जासूस थे और उन्होंने ही खुफिया एजेंसी रॉ की शुरुआत की थी. आजादी के तुरंत बाद वो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को रिपोर्ट करते थे. पाकिस्तान से बांग्लादेश को आजाद कराने में भी उनकी अहम भूमिका रही थी. रिटायरमेंट के बाद वह राजीव गांधी के प्रमुख सलाहकारों की सूची में शामिल हो गए थे. उसी दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सिक्योरिटी गार्ड की शुरुआत की. रविंद्र कौशिक रविंद्र रॉ के खुफिया जासूस थे और उन्हें द ब्लैक टाइगर नाम से भी जाना जाता था. सिर्फ 23 साल की उम्र में ही वह रॉ के साथ जुड़ गए थे. रविंद्र पाकिस्तानी सेना में मेजर जनरल बन थे. रविंद्र को पाकिस्तान भेजने से पहले उर्दू सिखाई गई, साथ ही मुस्लिम धर्म से जुड़ी कुछ किताबें भी पढ़ाई गईं और फिर नबी अहमद शाकीर नाम से वे पाकिस्तानी सेना में दाखिल हो गए. 1979 से लेकर 1983 तक उन्होंने पाकिस्तान में रहकर भारत को बहुत अहम जानकारी मुहैया कराई. इसी वजह से उन्हें द ब्लैक टाइगर नाम दिया गया. अफसोस की आखिरकार रविंद्र का पर्दाफाश हो गया और पाकिस्तान में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. 2001 में न्यू सेंट्रल मुल्तान जेल में उनकी मौत हो गई. अजीत डोभाल अजीत डोभाल ही वह शख्स हैं जिन्होंने 1971 से लेकर 1999 तक भारतीय विमान को अपहरण होने से 15 बार बचाया था. 1999 में कंधार विमान अपहरण के दौरान भी आतंकियो से समझौता करने वालों में अजीत ने मुख्य भूमिका निभाई थी. वह पाकिस्तान के लाहौर में 7 साल जासूस बनकर रहे. एक बार उन्होंने पाकिस्तानी का भेष बनाकर रोमानियन राजनयिक लिविउ राडू को कश्मीरी आतंकियों से बचाया था. आपको स्कूल में भी नहीं पढ़ाए गए होंगे विज्ञान के ये 10 आश्चर्यजनक तथ्य ! सैय्यद आसिफ इब्राहिम सैय्यद आसिफ खुफिया ब्यूरो में काम करने वाले पहले मुस्लिम थे. 2013 में यासीन भटकल की गिरफ्तारी के लिए बनाए गए प्लान का वह भी हिस्सा थे. रिटायरमेंट के बाद प्रधानमंत्री मोदी के जरिए उन्हें काउंटर आतंकवाद और अतिवाद मामले में प्रधानमंत्री का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है. एके वर्मा 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद एके वर्मा को चीन भेजा गया, ताकि दोनों देशों के संबंधों में सुधार हो सके. उनके प्रयासों की बदौलत ही भारत और चीन ने आखिरकार दोस्ती का हाथ बढ़ाया था. खालिस्तानी आतंवादियों से निपटने के लिए उन्होंने काउंटर इंटेलिजेंस टीम-एक्स बनाई थी. दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि बॉलीवुड फिल्म राजी में किस हिरोइन ने मुख्य करिदार निभाया था.