बरसों से चली आ रही है भारत और रूस की दोस्ती, दोनों देशों की यारी में अभी तक नहीं आई कोई खटास

आजादी के वक्त भारत के प्रमुख नेता रूस की समाजवादी सोच से प्रभावित थे और उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में उसे एक हथियार की तरह इस्तेमाल भी किया. दूसरे वर्ल्ड वॉर के बाद विश्व दो महाशक्तियों में बंट चुका था, उस समय भारत ने किसी शक्ति के साथ न मिलकर एक थर्ड वर्ल्ड के रूप में गुटनिरपेक्षता के साथ विकासशील देशों के साथ मधुर संबंध बनाए. एक गुट का नेतृत्व पूंजीवादी अमेरिका कर रहा था, दूसरे की बागडोर सोवियत रूस के हाथ में थी. भले ही भारत ने गुटनिरपेक्षता की निति अपनाई, मगर भारत के रूस के साथ अच्छे संबंध थे. जिसके पीछे कई राजनितिक और आर्थिक कारण थे. न केवल सोवियत संघ ने भारत के साथ मित्रतापूर्ण संबंध रखे बल्कि समय-समय पर रूस ने भारत की आर्थिक और सामरिक रूप से भरपूर मदद भी की. जिसकी वजह से भारत की रूस से दोस्ती पक्की होती गई और भारत-अमेरिका ताल्लुकात खराब होते गए. भारत की आजादी के बाद से ही भारत और रूस के सम्बन्ध बहुत अच्छे बनते गए. भारत और रूस की दोस्ती की कहानी को 70 साल से भी ज्यादा का समय हो चुका है. इस दौरान दुनिया ने कई उतार चढ़ाव देखे लेकिन भारत-रूस के रिश्तों में आज तक कोई खटास देखने को नहीं मिली. भारत की हर मुश्किल में रूस हमेशा ही साथ खड़ा रहा. इस दोस्ती के पीछे कई कारण भी है. आइए जानते हैं इनके बारे में…

कश्मीर मुद्दा
दुनिया की परवाह किए बिना रूस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की दोस्ती निभाता रहा. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस ने 22 जून 1962 को अपने 100वें वीटो का इस्तेमाल कश्मीर मुद्दे पर भारत के समर्थन में किया था. दरअसल, सुरक्षा परिषद में आयरलैंड ने कश्मीर मसले को लेकर भारत के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया था. जिसका अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन जो कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य थे, इनके अलावा आयरलैंड, चिली और वेनेजुएला ने समर्थन किया था. इस प्रस्ताव के पीछे भारत के खिलाफ पश्चिमी देशों की बड़ी साजिश थी. इसका मकसद कश्मीर को भारत से छीनकर पाकिस्तान को देने की योजना थी, लेकिन रूस ने उस वक्त भारत की दोस्ती निभाई और इस साजिश को नाकाम कर दिया.

ऐसे मिलता है रसोई गैस सब्सिडी का फायदा, उठा लें इसका लाभ वरना मौका हाथ से निकल जाएगा

अंतरिक्ष कार्यक्रम
रूस ने अंतरिक्ष कार्यक्रम से लेकर विकास के कामों में भारत का अक्सर साथ दिया है. भारत ने साल 1975 में पहला सैटेलाइट आर्यभट्ट लांच किया था, जिसको रूसी मदद से तैयार किया गया था. साल 1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा रूस के सोयूज टी-11 स्पेश शटल से अंतरिक्ष गए. इसके साथ ही वह अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय बने.

औद्योगिकरण
भारत के औद्योगिकरण में रूस ने अहम योगदान दिया है. बोकारो, भिलाई और विशाखापत्तनम स्थित कारखाने, भाखड़ा-नंगल पनबिजली बांध, दुर्गापुर संयंत्र, नेयवेली में थर्मल पॉवर स्टेशन, कोरबा में विद्युत उपक्रम, ऋषिकेश में एंटीबायोटिक्स प्लांट और हैदराबाद फार्मास्यूटिकल प्लांट की स्थापना में रूस ने भारत की मदद की. मुंबई स्थित भारतीय औद्योगिक संस्थान, देहरादून और अहमदाबाद में रिसर्च इंस्टीट्यूट्स ऑफ पेट्रोलियम इंडस्ट्री की स्थापना में भी रूस ने सहायता की.

रक्षा संबंध
दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा संबंध हैं. भारत-रूस की सेनाओं के बीच हमेशा सैन्य अभ्यास होते रहते हैं. भारत ने रूस की सहायता ब्रह्मोस जैसी मिसाइल बनाई. रूस ने भारत के साथ अपनी सैन्य तकनीक साझा की. भारत ने रूस से कई हथियार भी खरीदें. आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भी रूस और भारत एक साथ नजर आते हैं.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर बताएं कि वर्तमान में रूस के राष्ट्रपति कौन हैं.

(Visited 45 times, 1 visits today)

सुझाव कॉमेंट करें

About The Author

आपके लिए :