Home Trending कोरोना के खिलाफ जंग में रेलवे ने वो कर दिखाया, जो कोई भी नहीं कर सका

कोरोना के खिलाफ जंग में रेलवे ने वो कर दिखाया, जो कोई भी नहीं कर सका

by Gwriter

दोस्तो, दुनिया में कोरोना वायरस ने कोहराम मचा कर रख दिया है. दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश छूटा होगा, जहां कोरोना वायरस ने इंसानों को अपनी चपेट में न लिया हो. दुनिया में अब तक लाखों लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं तो वहीं सैंकड़ों-हजारों लोगों की कोरोना वायरस के कारण जान भी जा चुकी है. कोरोना वायरस भारत में भी अपना कहर बरसा रहा है और लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर आम जनता तक सभी लोग इस महामारी में अपने लेवल पर योगदान दे रहे हैं. 22 अप्रैल को लगाए गए जनता कर्फ्यू के बाद से देश रूक गया. पीएम मोदी के 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा से लोगों को परेशानियां तो हो रही हैं लेकिन इस महामारी से लड़ने वाले सभी लोगों के साथ पूरा देश एक साथ खड़ा हुआ है. लॉकडाउन के चलते बस सेवाएं बंद पड़ी है. ट्रेनों को यात्रियों के लिए बंद कर दिया गया है. लेकिन ट्रेनों का इस्तेमाल इस महामारी से लड़ने में किया जा रहा है. दोस्तों, भारतीय रेलने का इतिहास हमेशा से गर्व करने वाला रहा है. अंग्रेजों के समय से साल 2020 तक यह पहली दफा होगा कि रेल सेवाओं को आम लोगों के लिए बंद किया गया है. लेकिन आपको जानकर गर्व महसूस होगी कि मौजूदा वक्त में ट्रेनों को बतौर अस्पताल के रूप में तैयार किया जा रहा है. इन ट्रेनों का इस्तेमाल कोरोना से लड़ाई में किया जाएगा. लेकिन रेलवे ने लॉकडाउन होने से पहले से कोरोना से लड़ने के लिए तैयारी शुरू कर दी थी. चलिए जानते हैं कि कोरोना से लड़ रहे देश को लेकर रेलवे ने क्या-क्या तैयारियां कर रखी हैं?

भारतीय रेलवे का इतिहास बेहद पुराना है. लकड़ियों के रेलवे ट्रेक से कांक्रीट की रेल पटरियों तक के इस 165 साल के सफर में यह पहली बार है कि ट्रेनों को बंद किया गया है. कोरोना जैसी भयानक बीमारी से बचाव के लिए रेलवे ने यह फैसला लिया है. लॉकडाउन के कारण रेलवे को यात्रियों के लिए बंद कर दिया गया है. लेकिन अगर आप सोच रहे हैं कि रेलवे पूरी तरह से बंद है तो आप गलत है. दरअसल रेलवे नें यात्रियों के लिए सुविधाएं बंद की हैं लेकिन कोरोना से लड़ने के लिए रेलवे पीछे के दरवाजे से एक बेहतरीन तैयारी कर रहा है. हाल ही में रेलवे मंत्रालय की ओर से जारी कुछ तस्वीरों को देखकर ऐसा लगता है कि रेलवे इस वायरस के तीसरे स्टेज को लेकर काफी सक्रिय है. रेलवे अपनी पुरानी गाड़ियों को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील कर रहा है. कुछ ट्रेनों को कोरोना की आपातकाल स्थिति के लिए तैयार किया जा रहा है. रेलवे के जरिए कुछ मोबाइल अस्पताल भी तैयार किए गए हैं. लेकिन यह पहली बार नहीं कि रेलवे ने देश के लिए इतनी शानदार तैयारी की है. रेलवे के जरिए हमेशा किसी न किसी रूप में देश की सेवा की गई है. चलिए जानते हैं कि लॉकडाउन से पहले रेलवे द्वारा किस तरह से सावधानियां बरती जी रही थी.

दोस्तों, भारतीय रेलवे ने कोरोना से लड़ने में पहले दिन से देश का साथ दिया है. रेलवे ने अपने इकॉनोमी को पीछे छोड़कर लोगों के भले के लिए कई तरह की सुविधाओं को बंद भी किया था. चाइन से फैले इस वायरस से संक्रमित लोगों की खबरें भारत से आने के तुरंत बाद रेलवे ने कड़ा रुख अपनाया और अपनी कई सारी पैसेंजर ट्रेनों को कैंसिल कर दिया. दोस्तों, भारत में सबसे ज्यादा भीड़ पैसेंजर ट्रेनों में ही होती है इसके मद्देनजर रेलवे ने पहली कैंची पैसेंजर ट्रेनों पर ही चलाई. इसके बाद रेलवे ने अपनी सुविधाओं, जिनके कारण यह संक्रमण बढ़ सकता था, उसको बंद करना शुरू किया. ट्रेन के एसी कोच में दी जाने वाली चादरों, तकियों, और पर्दों को अमूमन 3-4 दिनों में बदला जाता है. ऐसे में इन सब सुविधाओं के चलते भी कोरोना संक्रमण के मामले में बढ़ोत्तरी हो सकती थी. इसलिए रेल मंत्रालय ने एसी कोच में मिलने वाली लगभग सभी सेवाओं को बंद कर दिया. इसी के साथ रेलवे ने यात्रियों से अपील की कि अपनी चादरें आप खुद ला सकते हैं.

भारतीय रेलवे स्टेशनों को काफी साफ माना जाता है. लेकिन कोरोना की खबर मिलते ही रेलवे ने अपनी साफ-सफाई वाली प्रक्रिया में भी बदलाव किया. प्लेटफॉर्म की सफाई जहां दिन में 1-2 बार होती थी उसे बढ़ा कर 3-4 बार कर दिया गया. रेलवे कर्मचारियों द्वारा भी इस बात का खास ख्याल रखा गया कि किसी भी तरह की गंदगी स्टेशन पर न मौजूद रहे. दोस्तों, भारत में एक चलन है. यदि कोई व्यक्ति घर से कहीं जा रहा है तो घर के सभी सदस्य उसे छोड़ने स्टेशन और एयरपोर्ट पर जाते हैं. इस चलन के चलते भी लोगों के संक्रमित होने का खतरा ज्यादा था. ऐसे में रेलवे ने इस चलन में कटौती करने के लिए 10 रुपए में मिलने वाले स्टेशन टिकट को 50 रुपए कर दिया. इसी के साथ बेवजह स्टेशन पर घूम रहे लोगों को पकड़ने और उनका चालान करने का अभि3यान भी तेज कर दिया.

दोस्तों, पैसेंजर ट्रेनों के कैंसिल होने के बाद भीड़ को बढ़ता देख रेलवे ने ट्रेनों को भीड़ भाड़ वाले रूटों पर डाइवर्ट करना शुरू कर दिया. इससे लोगों को जल्दी अपने गंतव्य पर पहुंचने में मदद मिली. साथ ही ट्रेनों में भीड़ भी अमूमन कम नजर आने लगी. कोरोना के चलते लॉकडाउन से पहले ट्रेनों के समय पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा. आमतौर पर ट्रेनों का लेट होना आम बात थी लेकिन कोरोना के चलते ट्रेनों को सही समय से निकाला और सही समय से अपने स्थान पर पहुंचाया जाने लगा. जिससे लोगों को ज्यादा समय के लिए ट्रेन में रहने से बचाया जा सके. दोस्तों, कोरोना की तैयारी को लेकर लॉकडाउन के महीना भर पहले से ही हर स्टेशन पर कोरोना संबंधित चेतावनी और बचाव के तरीकों की जानकारी लोगों को दी जाने लगी. ट्रेन के एनाउंसमेंट के साथ रेलवे द्वारा लोगों को बचाव की जानकारी दी जाती थी. मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना और सफर में किसी से हाथ न मिलाने की खास चेतावनी दी जाती थी.

दोस्तों, मेट्रो प्लेटफॉर्म पर जाने से पहले तो आपने कई बार अपनी चेकिंग करवाई होगी लेकिन छोटे स्टेशनों पर भी कोरोना को लेकर रेलवे द्वारा यह व्यवस्था देखने को मिली. हर स्टेशन पर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही स्टेशन के अंदर जाने की परमिशन मिलती थी. इसी के साथ वहां खड़े जवानों द्वारा मास्क लगाने की सलाह दिए जाने लगी. लॉकडाउन से एक हफ्ते पहले से बाहर से यानि दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर और चेन्नई से आने वाले यात्रियों की खास स्क्रीनिंग की जाने लगी. रेलवे विभाग ने अपनी टीम और पुलिस जवानों के साथ मिलकर स्टेशन से बाहर निकलने वाले हर व्यक्ति की जांच करनी शुरू कर दी थी. इन सभी बातों का मतलब यह है कि रेलवे ने कोरोना की खबर आते ही अपनी तैयारियां शुरू कर दी थी. लॉकडाउन से एक दिन पहले तक सभी ट्रेनों और यात्रियों को इसी सुरक्षा चक्र के साथ सफर करवाया जाता था. लेकिन दोस्तों क्या आप जानते हैं कि लॉकडाउन के दौरान रेलवे की तैयारी कैसी है.

दोस्तों, भारतीय रेलवे ने कभी भी अपने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर समझौता नहीं किया. कोरोना के शुरूआती समय से ही एहतियात बरतना शुरू कर दिया था. लॉकडाउन के दौरान भी रेलवे विभाग शांत नहीं बैठा. लॉकडाउन के दौरान रेलवे द्वारा कोरोना से लड़ने की पुरी तैयारी की जा रही है. रेलवे ने अपने पुराने रेल डिब्बों को बतौर अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड की तरह तैयार किया है. जिन डिब्बों को इस्तेमाल रेलवे अपने यात्रियों के लिए नहीं करता है उन डिब्बों में चादर लगाकर और बीच वाली सीट निकालकर उसे मिनी वार्ड में तब्दील कर दिया गया है. हाल ही में रेलवे ने ट्रेनों के डिब्बों में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड की तस्वीरें अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर भी जारी की थी.

दोस्तों, भारतीय रेलवे दुनिया के चौथे सबसे बड़े रेल नेटवर्क के स्थान पर है. ऐसे में लोगों के लिए इससे अच्छी सुविधा और कुछ नहीं हो सकती है कि उनके निकटतम रेलवे स्टेशन पर उनका इलाज किया जाए. हालांकि रेलवे द्वारा पूरे देश भर में 125 रेलवे अस्पताल चलाए जा रहे हैं. लेकिन संक्रमण के भयानक रूप को लेकर रेलवे ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी हैं. हमारे देश में 10 लाख वेंटीलेटर्स की सुविधा है. इसी के मद्देनजर रेलवे ने पहले से ही तैयारी करते हुए अपने हॉस्पिटल बेडों की संख्या में बढ़ोत्तरी की है. दोस्तों, कुल मिलाकर आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि रेलवे कोरोना से लड़ाई में हमें साफ सुथरी और रिकवर करने के लिए अच्छी जगह देने की तैयारी में है. रेलवे के एक अधिकारी ने यह ट्वीट किया है कि रेलवे द्वारा आने वाले दिनों में 5000 आइसोलेशन वार्ड तैयार कर लिए जाएंगे. साथ ही आने वाले जरूरत के हिसाब से और आइसोलेशन वार्ड बना दिया जाएंगे.

दोस्तों, कोरोना से बचाव के लिए ट्रेन के एक डिब्बे में नर्स, डॉक्टर और सभी मशीनों के साथ लगभग 16 मरीजों का एक साथ ट्रीटमेंट किया जा सकता है. रेलवे ने मरीजों की सुविधा को देखते हुए कई तरह के इंतजाम किए हैं. रेलवे ने मरीजों को मच्छर से बचाव के लिए मच्छरदानी से लेकर हाथ धोने के लिए सैनिटाइजर तक को ट्रेन की बोगियों में रखवाया है. इसी के साथ सरकार ने रेलवे फैक्ट्रियों को स्ट्रेचर, मास्क, ट्रोली, वेंटीलेटर, एपरन आदि बनाने के निर्देश जारी कर दिए है. इन सभी चीजों का कोरोना से बचाव में सरकारी और रेलवे अस्पताल में इस्तेमाल किया जाएगा.

दोस्तों, इसी के साथ रेलवे ने अपने आपातकाल ट्रेनों को भी तैयार कर दिया है. आपातकाल ट्रेनों का इस्तेमाल 1991 में पहली बार किया गया है. इन ट्रेनों को खासकर आपदा से लड़ने के लिए ही बनाया गया है. इन ट्रेनों ने अभी तक 18 राज्यों में सेवाएं दी है. साथ ही 10 लाख लोगों के इलाज में मदद भी की है. दोस्तों, इन ट्रेनों को लॉकडाउन के दौरान कोरोना से लड़ने के लिए खास तौर पर तैयार किया गया है. जिससे अगर मामलों के बढ़ने, बिस्तरों की कमी या अस्पताल की कमी होने की स्थिति में उन्हें उस जगह पर भेजकर लोगों का इलाज किया जा सकें. दोस्तों, रेलवे की इन ट्रेनों में अस्पताल जैसी सेवाएं दी जाती है. इसी के साथ यहां पर मरीजों को रिकवर होने में भी मदद मिलती है.

भारतीय रेलवे ने सभी तरह की ट्रेनों को काम पर लगा रखा है. रेलवे ने भले ही सभी ट्रेनों को यात्रियों के लिए बंद कर दिया है. लेकिन लोगों की सेवा में अभी भी कई ट्रेनें लगी हुई हैं. दोस्तों, दूध एक ऐसी आम जरूरत है जिसे किसी भी हाल में बंद नहीं किया जा सकता है. ऐसे में दूध का उत्पाद और व्यापार करने वाली मदर डेयरी के प्लांट तक दूध पहुंचाने के लिए रेलवे ने दूध दूरंतों ट्रेने शुरू की है. दोस्तों, मदर डेयरी का दूध कई राज्यों से आता है. ऐसे में उसे दूसरे राज्यों में लाने के लिए ट्रेनों का इस्तेमाल किया जाता था. लेकिन लॉकडाउन के चलते सभी ट्रेनें बंद होने के बाद दूध लाने की परेशानी बढ़ गई. ऐसे में रेलवे मंत्रालय ने दूध के लिए दूध टेंकर वाली ट्रेनों की अनुमति दे दी. इन ट्रेनों की खास बता यह है कि यह एक चलती थर्मस की तरह हैं. एक राज्य से दूसरे राज्य तक दूध को 2 डिग्री के तापमान पर ये ट्रेनें ला सकती है. जिससे दूध खराब न हो और लॉकडाउन में भी लोगों को दूध की पूर्ति की जा सके. दोस्तों, रेलवे द्वारा लॉकडाउन के दौरान भी काफी कुछ काम किया जा रहा है. ऐसे में एक सवाल और उठता है कि लॉकडाउन के बाद रेलवे का कोरोना को लेकर क्या योगदान होगा. या फिर किस तरह की सेवाएं और सुविधाएं दी जाएंगी? चलिए जानते हैं.?

दोस्तों, कोरोना संक्रमण के बढ़ते आंकड़ो को देखकर लगता है कि लॉकडाउन के बाद रेलवे अपनी सुरक्षा में और भी ज्यादा बढ़ोत्तरी करेगा. रेलवे द्वारा चेकिंग प्रणाली को और भी ज्यादा सख्त किया जा सकता है. किसी भी स्टेशन के इंट्री और एक्सिट गेट पर आपको सैनिटाइजिंग मशीन के जरिए गुजरना पड़ सकता है. रेलवे द्वारा मास्क और हैंड गल्ब्स को लेकर भी सख्ती की जा सकती है. इसी के साथ एसी कोच में मिलने वाली सुविधाएं जैसे तकिया, पर्दे और कंबल को फिलहाल के लिए बंद ही रखा जाएगा. इसी के साथ रेलवे अस्पतालों को सुचारू रूप से चलाए जाने की उम्मीद है. लॉकडाउन के बाद रेलवे अपने यात्रियों की स्क्रीनिंग के बाद ही ट्रेने में चढ़ने की अनुमति देगा. साथ ही हर कोच को रोजाना सैनिटाइज भी किया जा सकता है. दोस्तों, रेलवे ने हमेशा से देश को गौरवान्वित किया है. कोरोना से बचाव में रेलवे जैसा काम शायद ही कोई कर रहा हो. दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि यात्रियों की सुरक्षा और कोरोना से बचाव को लेकर रेलवे की ओर से किए जा रहे प्रयासों में सबसे बेहतर कोशिश आपको कौन सी लगी है.

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