पाकिस्तान और चीन को मोदी ने नए साल पर दिया जोरदार झटका, मोदी की कूटनीति का जवाब नहीं, सदमे में पाकिस्तान और चीन

भारत ने एक बार फिर से कूटनीतिक तरीके से पाकिस्तान और चीन दोनों देशों को मात दे दी है. भारत ने पाकिस्तान और चीन को घेरने का ऐसा प्लान बनाया कि दोनों देश चारों खाने चित हो गए हैं. इसके साथ ही अब भारत भी शक्तिशाली देश बनने की तरफ एक और कदम बढ़ा चुकी है. दरअसल, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए मालवहन की दृष्टि से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ईरान के दक्षिण पूर्वी तट पर स्थित चाबहार बंदरगाह के संचालन की कमान भारत ने संभाल ली है. चाबहार बंदरगाह पर भारत का पहला कदम आगे बढ़ चुका है. इस बंदरगाह को लेकर भारत, ईरान और अफगानिस्तान व्यापार औए पारगमन गलियारे के लिए मार्ग बनाने पर राजी हो गए हैं. वहीं, इस बंदरगाह का परिचालन भारत के कंट्रोल में भी होगा. रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह पर भारत, अफगानिस्तान और ईरान के अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक हुई. जिस दौरान तीन देशों के बीच व्यापार और पारगमन गलियारों के लिए सहमति बनी. विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच संयुक्त सचिव या महानिदेशक के स्तर पर त्रिपक्षीय चाबहार समझौते के कार्यान्वयन के लिए अनुवर्ती समिति की पहली बैठक हुई. इस मौके पर, इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड कंपनी ने अपना कार्यालय खोला और चाबहार में शहीद बेहस्ती बंदरगाह का परिचालन शुरू किया.

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विदेश मंत्रालय ने बताया कि चाबहार पोर्ट के जरिए अंतर्राष्ट्रीय पारगमन और परिवहन के लिए त्रिपक्षीय पारगमन समझौते के पूर्ण परिचालन पर तीनों पक्षों के बीच सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा हुई. उन्होंने तीन देशों के बीच व्यापार और पारगमन गलियारों के लिए मार्गों पर सहमति जताई. इसे जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के लिए पारगमन, सड़कों, रीति-रिवाजों और कांसुलर मामलों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए प्रोटोकॉल पर सहमति हुई. 26 फरवरी 2019 को चाबहार की क्षमता को बढ़ावा देने और इसे लोकप्रिय बनाने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया गया है. रास्ते को आकर्षक बनाने, लॉजिस्टिक लागत को कम करने और चाबहार समझौते के सुचारू संचालन के लिए मार्ग प्रशस्त करने के उपायों के निर्धारण के लिए एक अध्ययन भी शुरू किया जाएगा. सचिवों या उप मंत्रियों के स्तर पर दूसरी समन्वय परिषद की बैठक के बाद अगली अनुवर्ती समिति की बैठक भारत में आयोजित की जाएगी.

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वहीं इससे पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा है. दरअसल, इस बंदरगाह की भौगोलिक स्थिति भारत और अफगानिस्तान के साथ भी व्यापार के लिए बहुत ही अनुकूल हैं. क्योंकि अफगानिस्तान हर तरफ से थल से गिरा हुआ देश है. यहां तक पहुंचने के लिए कोई समुद्री मार्ग नहीं है. ऐसे में अफगानिस्तान के साथ ट्रेड या किसी भी मानवीय सोशल कॉज एंड हेल्प के लिए अफगानिस्तान के साथ भारत सिर्फ थल मार्ग से ही जुड़ सकता है, जो कि पाकिस्तान से होकर गुजरता है और पाकिस्तान इस मार्ग के इस्तेमाल से हमेशा ही मनाही करता रहा है. वहीं हवाई रास्ता काफी मंहगा होता है. ऐसे में भारत के लिए ईरान का ये बंदरगाह ईरान के अलावा अफगानिस्तान के साथ के संबंधो को सुधारने में भी सहायक होगा. अब इस बंदरगाह के कारण भारत को पाकिस्तान के भीतर से होते हुए अफगानिस्तान और ईरान की तरफ जाने की जरूरत नहीं होगी और तीनों देशों के आर्थिक रिश्तों में मजबूती मिलेगी. साथ ही इस बंदरगाह का फायदा सिर्फ भारत, ईरान और अफगानिस्तान को ही नहीं होगा बल्कि अफगानिस्तान में एंट्री को लेकर पाकिस्तान की मोनोपोली खत्म होगी और ऐसे में चाहे अमेरिका हो या कोई भी मध्य एशिया का देश हो, इस रास्ते की वजह से उनके व्यापारिक और सामरिक रिश्तों में मजबूती आएगी.

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