जियो बंद होने वाला है? मुकेश अंबानी ने कर डाला हैरान करने वाला ऐलान, जीयो के ग्राहकों को झटका!

रिलायंस जियो ने मार्केट में आन के बाद तहलका मचा दिया था. टेलिकॉम कंपनियां रिलायंस जियो के कारण घाटे में चलने लगी थी क्योंकि रिलायंस जियो ने लोगों को अपने सस्ते ऑफर और सस्ते इंटरनेट की ओर आकर्षित किया. वहीं लोग भी जियो की सस्ती कॉलिंग और इंटरनेट से खुश नजर आए कि लोगों ने धड़ाधड़ तरीके से जियो के सिम ले लिए. लेकिन अब जियो यूजर के लिए अब बुरी खबर सामने आई है. जियो इस्तेमाल करने वाले इन यूजर को रातों रात झटका लग सकता है और जियो बंद हो सकता है. जी हां, हम कोई मजाक नहीं कर रहे हैं. अब जियो के करोड़ों यूजर के सामने एक बड़ी दिक्कत सामने आ गई है. जिसके कारण जियो से सस्ते में इंटरनेट और कॉलिंग करना एकदम से बंद हो सकता है. दरअसल, मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो इंफोकॉम की अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस से स्पेक्ट्रम खरीद डील को लेकर बातचीत चल रही है. लेकिन अब इस डील पर तलवार लटकती नजर आ रही है. रिलायंस जियो इंफोकॉम अगर रिलायंस कम्युनिकेशंस से स्पेक्ट्रम नहीं खरीद सकी और अनिल अंबानी की कंपनी इनसॉल्वेंसी की तरफ चली जाती है तो दिल्ली, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में जियो के सब्सक्राइबर्स को सेवाओं में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है. यह बात टेलिकॉम सेक्टर के एक्सपर्ट्स और ऐनालिस्ट्स ने कही है.

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उन्होंने कहा कि जियो आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु सहित अहम बाजारों में प्रीमियम 800 मेगाहर्ट्ज बैंड में पांच यूनिट्स का निरंतरता वाला स्पेक्ट्रम ब्लॉक बनाने के लिए आरकॉम पर निर्भर है. यह बैंड 4जी एलटीई सेवाओं के लिए बहुत जरूरी है. इनमें से हर सर्कल में जियो के पास 800 मेगाहर्ट्ज बैंड में 4जी एयरवेव्स की 3.8 यूनिट्स हैं और इस बैंड में निर्बाध एलटीई कवरेज के लिए वह आरकॉम के स्पेक्ट्रम पर निर्भर है. ऐनालिसिस मैसन के पार्टनर और हेड रोहन धमीजा ने कहा कि स्पेक्ट्रम ट्रेडिंग डील का जल्द से जल्द क्लियर होना अहम है क्योंकि इससे जियो को आरकॉम का 4जी स्पेक्ट्रम मिलेगा. इससे जियो को 800 मेगाहर्ट्ज बैंड में कंटीगुअस ब्लॉक्स बनाने में मदद मिलेगी, जो एलटीई कवरेज के लिए जरूरी होते हैं ताकि अहम बाजारों में सेवाओं में बाधा न पड़े. स्पेक्ट्रम ट्रेडिंग अग्रीमेंट पर साल 2017 में दस्तखत किए गए थे. इसे मंजूरी मिलने पर आरकॉम 4जी एयरवेव्स की 112.4 यूनिट्स जियो को बेच सकती है. इसमें 800 मेगाहर्ट्ज बैंड एलटीई स्पेक्ट्रम शामिल है जिसे आरकॉम ने सिस्टेमा श्याम टेलिसर्विसेज से खरीदा था. इसका वैलिडिटी पीरियड ज्यादा है. आरकॉम पर 46000 करोड़ रुपए का कर्ज है. यह स्पेक्ट्रम बेचने से आरकॉम को 18000 करोड़ रुपए का कर्ज कम करने में मदद मिलेगी.

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यह डील आरकॉम के लिए अहम है तो जियो के लिए भी है. यह स्पेक्ट्रम न मिला तो मुंबई, गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, बिहार, ओडिशा, असम और पूर्वोत्तर जैसे अहम बाजारों में जियो की 4जी एलटीई कवरेज की क्वॉलिटी प्रभावित हो सकती है. इन सर्कल्स में आरकॉम की एयरवेव्स का एक्सेस न मिलने पर इस 4जी बैंड में जियो की स्टैंडअलोन होल्डिंग्स एक तरह से दोनों कंपनियों की कंबाइंड होल्डिंग्स की आधी रह जाएगी. एक सीनियर इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव का कहना है कि जियो की एलटीई कवरेज की ओवरऑल क्वॉलिटी मुंबई, गुजरात, मध्य प्रदेश और ईस्टर्न सर्कल्स में निश्चित तौर पर कम होगी क्योंकि उपलब्ध 800 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के आधा रह जाने से नेटवर्क की कैपेसिटी ऑटोमैटिकली कम हो जाएगी. पिछले सप्ताह दूरसंचार विभाग ने आरकॉम-जियो स्पेक्ट्रम ट्रेडिंग डील को मंजूरी देने से मना कर दिया था. विभाग ने कहा था कि यह डील सरकारी नियमों के मुताबिक नहीं है. ऐसे में अगर ये डील नहीं होती है तो इसका सीधा असर जियो के ग्राहकों पर पड़ने वाला है.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि आप कौन कौनसी कंपनी का सिम इस्तेमाल में लेते हैं.

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