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नागरिकता कानून पर भारत उबल रहा है, कौन है इसके लिए जिम्मेदार?

सबसे पहले तो हमें यह समझना जरूरी है कि यह विरोध हो क्यों रहा है? दोस्तों, देश के ज्यादातर हिस्सों में वह लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं जिनको असल में इसकी जानकारी कम है.

नागरिकता संशोधन कानून 2019 देश में आ चुका है. भारत के अलग-अलग राज्यों में इस कानून को लेकर बवाल मचा हुआ है. हाल ही में दिल्ली पुलिस और छात्रों के बीच हुए विवाद के बाद इस कानून को लेकर विरोध और भी ज्यादा बढ़ गया है. देश के 22 विश्वविद्यालयों में इस कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन किए गए. इस विरोध से पूरा देश उबल रहा है. ऐसे में कई सारे सवाल हैं जिनका जवाब जानना बेहद जरूरी है. पहला, सरकार को इस विरोध को रोकने के लिए क्या करना चाहिए? दूसरा, क्या मोदी सरकार कानून व्यवस्था संभालने में असफल रही है? और तीसरा यह कि आखिर कौन से नेता इस विरोध को बढ़ावा दे रहे हैं? आइए जानते हैं...

दोस्तो, सबसे पहले तो हमें यह समझना जरूरी है कि यह विरोध हो क्यों रहा है? दोस्तों, देश के ज्यादातर हिस्सों में वह लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं जिनको असल में इसकी जानकारी कम है. कुछ ऐसे विरोधी आपको सड़कों पर भी मिल जाएंगे जो NRC का विरोध कर रहे हैं, जबकि NRC और CAA 2019 दोनों अलग चीजें है. हालांकि कुछ दल के नेता कार्यकर्ता तो सिर्फ सियासी बवाल मचाने के लिए इस कानून का विरोध कर रहे हैं.

मोदी सरकार को इस बिल को लाने से पहले लोगों को इसके प्रति जागरूक करना चाहिए था. हालांकि अभी भी सरकार के जरिए इसकी असली जानकारी देकर प्रदर्शनकारियों को शांत किया जा सकता है. बस उन्हें किसी भी तरह लोगों तक इस कानून की सही जानकारी को पहुचाना होगा. इससे लोगों को सच्चाई पता चलेगी और विरोध कम हो जाएगा.

इसके अलावा सरकार इस कानून के मूल विरोध को खत्म करने के लिए थोड़े से बदलाव कर सकती है. मूल विरोध मुस्लिम समुदाय को अलग रखकर 6 धर्मों को एक तय समय से पहले देश में रहने पर नागरिकता देने को लेकर है. ऐसे में सरकार इसको बदलकर हर समुदाय के लिए एक जैसा कानून भी बना सकती है यानि जो भी गैरकानूनी तरीके से हमारे देश में आए हैं उन्हें सरकार के जरिए बाहर किया जा सकता है.

इस नए कानून को लेकर हो रहे विरोध और विरोध सवरूप जल रहे देश को देखकर पहली नजर में तो यही लगता है कि मोदी सरकार कानून व्यवस्था संभालने में असफल रही है. लेकिन ऐसा नहीं है. मोदी सरकार ने देश में कानून व्यवस्था संभाले रखी है, नहीं तो विरोध का नतीजा और भी ज्यादा भयानक हो सकता था. अभी तो देश के कुछ इलाकों से आगजनी और तोड़फोड़ की खबर आई है. अगर कानून व्यवस्था सही नहीं रखी गयी होती तो हर राज्य से विरोध और आगजनी की खबर सुनाई पड़ती.

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हो रहे विरोध में लगभग सभी विपक्षी दलों के नेताओं का समर्थन मिला हुआ है. सभी राजनीतिक दल इसे मोदी सरकार के खिलाफ इस्तेमाल करने का अच्छा मौका समझ रहे हैं. ऐसे में पीछे के दरवाजे से सभी विपक्षी पार्टियां विरोध में हो रही हिंसा को हवा दे रही हैं. कांग्रेस, सपा, बसपा समेत प्रमुख विपक्षी पार्टियां इस बिल के विरोध में है.

दोस्तों, ऐसे वक्त में सबसे ज्यादा जरूरी है कि देश को जागरूक किया जाए. तभी विरोध रूक सकता है. दोस्तों, कमेंट कर जरूर बताएं कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया किस शहर में है?