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आउट ऑफ द बॉक्स कैसे सोचें?

अक्सर थोड़े पढ़े-लिखे ज्ञानी लोगों का मानना है कि काम के दौरान या कुछ करते वक्त सोना नहीं चाहिए. लेकिन अगर आप आउट ऑफ द बॉक्स सोचना चाहते हैं तो आपको एक झपकी तो लेनी होगी

अल्बर्ट आईंस्टाइन की एक प्रसिद्ध कहावत है, "रचनात्मकता वह सब देखना है जो हर किसी ने नहीं देखा है, और वह सब सोचना है जो किसी अन्य व्यक्ति ने नहीं सोचा है." किसी भी चीज को ऐसे तरीके से देखने की क्षमता, जिस तरीके से उस चीज को ज्यादातर लोग नहीं देख पाते हैं, वास्तव में यही रचनात्मकता है. हालांकि आजकल के दौर में ज्यादातर लोग क्रिएटिव नहीं है क्योंकि वो लीक से हटकर नहीं सोच पाते हैं. ऐसे लोग एक ही बने बनाए ढर्रे पर हमेशा चलते रहते है. हालांकि आउट ऑफ द बॉक्स सोचने वाले हमेशा कुछ न कुछ नया ही करते हैं. लेकिन आखिर ये ऑउट ऑफ द बॉक्स सोचना यानी लीक से हटकर सोचना आखिर क्या है??? और स्टूडेंट्स कैसे ऑउट ऑफ द बॉक्स सोच सकते हैं...आइए जानते हैं...

दोस्तों, सबसे पहले आपको एक बात की गांठ बांध लेनी होगी कि आउट ऑफ द बॉक्स सोचना या क्रिएटिव थिंकिंग का किताबी ज्ञान से कोई लेना देना नहीं है. आप भले ही हर परीक्षा में अच्छे नंबरों से पास होते होंगे, भले ही आप टॉपर की कैटेगरी में आते होंगे, भले ही आपको अपने सिलेबस की किताबों में लिखी हर बात के बारे में पता हो... लेकिन.... इसका मतलब ये नहीं कि आप क्रिएटिव सोच सकते हैं. बल्कि क्लास में फेल होने वाला स्टूडेंट भी एक क्रिएटिव थिंकर हो सकता है.

दोस्तों, कई बार परेशानियां आने पर अक्सर होता यह है कि हम सबसे पहले दिमाग में आने वाले हल को ही बेस्ट मानकर बैठ जाते हैं. लेकिन होना तो यह चाहिए कि जो पहला थॉट आए, सबसे पहले उसे रिजेक्ट कीजिए, ताकि आप आगे सोच सकें. दोस्तों, जैसे शतरंज में, आप एक छलांग लगाने के लिए कभी-कभी कुछ कदम पीछे की तरफ उठाते हैं, वैसे ही क्रिएटिव थिंकिंग को लेकर भी है. अगर आपको लगता है कि आप कोई भी नया विचार सोच नहीं पा रहे हैं तो फिर, आपके लिए नए सिरे से शुरुआत करना सबसे अच्छा रहेगा. 

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दोस्तों, अक्सर थोड़े पढ़े-लिखे ज्ञानी लोगों का मानना है कि काम के दौरान या कुछ करते वक्त सोना नहीं चाहिए. लेकिन अगर आप आउट ऑफ द बॉक्स सोचना चाहते हैं तो आपको एक झपकी तो लेनी होगी. इससे आपके दिमाग को आराम मिलेगा. अगर आप काफी वक्त से कुछ काम कर रहे हैं और बेहतर आउट पुट नहीं दे पा रहे हैं तो आपको एक छोटी नींद जरूर ले लेनी चाहिए. इससे आपका दिमाग फ्रेश हो जाएगा और आप कुछ नया सोच पाएंगे और बेहतर नजरिए से हालात को देख पाएंगे.

अब जब आपने आउट ऑफ द बॉक्स सोचने की ठान ही ली है तो मैं आपको एक खास बात यह भी बता दूं कि जब आप सोचना शुरू करेंगे तो आपके दिमाग में कई तरह के विचार आएंगे. कुछ विचार आपके काम के होंगे तो कुछ विचार बस आपका रास्ता भटकाने के लिए आएंगे. ऐसी सिचुएशन में आपको बस इतना करना है कि आपके मन में जब भी कोई विचार आए तो उसे लिख जरूर लें. ऐसे में आपको सबसे बेहतर और सबसे यूजलेस विचारों के बारे में पता चलता रहेगा और अपने विचारों को लिख लेने से आप उन्हें भूल भी नहीं पाएंगे और आसनी से दोबार रिमाइंड भी हो जाएंगे.