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इस चौंकाने वाले तरीके से बनता है गुड़

सर्दियों का मौसम आते ही कई प्रकार के व्यंजन और मिठाईयां हमारे जहन में आने लगती हैं. जिसमें गर्म गर्म चाय, कॉफी, गाजर का हलवा, मूंगफली, गजक के साथ गुड़ को भी बेहद पसंद किया जाता है. शहर हो या गांव हर जगह के लोग सर्दियों में गुड़ खाना पसंद करते हैं. लेकिन भारत में गुड़ सभी मौसम में खाया जाता है. दरअसल गुड़ हमारे शरीर के लिए बेहद लाभकारी भी होता है. इसके साथ ही गुड़ से कई सारे पकवान और मिठाईयां बनाने का काम किया जाता है. हालांकि इन सब बातों के बीच क्या आपने कभी सोचा है कि गुड़ आखिर बनाया कैसे जाता है. इसके लिए हमें क्या-क्या चाहिए, और हम गुड़ को कितने समय में बनाकर तैयार कर सकते हैं. चलिए तो आज हम आपको विभिन्न प्रकार का गुड़ बनाने की विधि के बारे में बताते हैं.

गुड़ बनाने की विधि...
गुड़ बनाने के लिए हमें सबसे पहले गन्ने की जरुरत पड़ती है. आपने सड़क किनारे गन्ने का रस निकलते हुए देखा होगा. ठीक उसी प्रकार गुड़ बनाने के लिए भी हमें गन्ने का रस निकालने की आवश्यकता होती है. क्रेशर मशीन जिसे हम कोलू भी कहते हैं उसकी सहायता से हम सर्वप्रथम गन्ने का रस निकालकर एक बड़े बर्तन, ड्रम इत्यादि में इकठ्ठा कर लेते हैं. इसके बाद हमें उस रस को आग पर पकाना होता है. इसके बाद आग जलाने के लिए चूल्हा तैयार किया जाता है. उसमें तेज गति में आग जलाई जाती है. जिसके ऊपर एक कढाई रखी जाती है. उसमें हम क्रेशर मशीन के द्वारा निकाले गए गन्ने के रस को डालते हैं. जिसे आग पर काफी देर पकाया जाता है. गुड़ को बनाते समय हमें उसकी गुणवत्ता का बेहद ध्यान रखना आवश्यक है. गुड़ की पहली क्वालिटी इसका साफ सुथरा होना है. गुड़ देखने में जितना साफ लगता है खाने में उतना ही अधिक पसंद किया जाता है. इसके लिए सुखलाई के पौधे के जड़ या तने के रस का प्रयोग किया जाता है. इसे आमतौर पर जंगली भिन्डी के नाम से भी पुकारा जाता है. आप स्वयं गन्ने की खेती करके गन्ने के साथ इसके बीज भी रोप सकते हैं, ताकि गुड़ बनाते समय इसे ढूंढने की जरुरत नहीं पड़े.

गन्ने के रस को उबालते वक्त इसमें सुखलाई के पौधे के तने और जड़ का रस डाला जाता है. इसकी सहायता से रस के अंदर मिला हुआ मैल और कूडा झाग के साथ उबलते हुए रस में ऊपर आ जाते हैं. जिसके बाद उसे बाहर निकाल दिया जाता है. इसके साथ ही रस को काफी देर तक पकने के लिए छोड़ दिया जाता है. जिससे गन्ने का रस गाढ़ा होने लगता है. साथ ही ध्यान रहे की रस को पकाते वक्त लगातार चलाते रहें. उचित मात्रा में रस को गाढ़ा होने पर उसे एक बड़े बर्तन में डाल लें. कुछ देर तक रस को ठंडा होने के लिए छोड़ दें. जब रस जमना शुरू हो जाए तो इसे मन मुताबिक आकार देने के लिए उसी प्रकार के सांचे में डालकर छोड़ दें. काफी देर तक ठंडा होने पर यह काफी कड़क हो जाता है. इसके बाद यह खाने योग्य बन जाता है. गुड़ को हम लड्डू या पारी के शेप में बनाकर तैयार करते हैं.

दोस्तों, गुड़ के कई प्रकार भी होते हैं. आइए इन प्रकारों के बारे में भी जान लेते हैं. दरअसल आपने बहुत ही कम तरीके का गुड़ देखा और खाया होगा लेकिन आपको हम और भी कई प्रकार के गुड़ के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसमें ईख का गुड़ यानी देसी गुड़ प्रमुख होता है. जिसे आम तौर पर देखा जाता है और खाया जाता है. इसके अलावा ताड़ का गुड़ जिसे बनाने की विधि लगभग ईख के रस से गुड़ बनाने की तरह ही है. ईख के गुड़ की अपेक्षा इसमें ग्लूकोज की मात्रा ज्यादा होती हैं और चीनी की कम. विटामिन भी इसमें अधिक रहता हैं. ऐसे में स्वास्थ्य की दृष्टि से यह ईख के गुड़ से ज्यादा लाभकारी है. इसलिए ही कई प्रकार की बीमारियों में भी दवाई के लिए गुड़ का प्रयोग किया जाता है.

खजूर का गुड़ बनाने के लिए खजूर के पेड़ को छील दिया जाता है. जिससे पेड़ से रस निकलता है. छीले पेड़ में एक नली लगाकर फिर घड़ा बांधते है. जिससे उसमें रस भर जाता है. खजूर के रस को कढ़ाही में पकाते हैं फिर जमीन में छोटे-छोटे गड्ढ़े करके उसमें पके रस को डाल देते है. इस तरह गुड़ तैयार हो जाता है. खजूर का गुड़ ज्यादातर पश्चिम बंगाल या फिर इससे सटी हुई सीमा वाले इलाकों में बनाया जाता है. इसके अलावा मसाले वाले गुड़ के बारे में भी आपने सुना होगा. मसाले वाला गुड़-गुड़ को बनाते समय इसमें कई तरह के मसाले डाल कर मसाले वाला गुड़ तैयार किया जाता है. मसालों में प्रमुख रूप से इलायची, सौंफ, काली मिर्च, मूँगफली और कसा हुआ नारियल मिलाया जाता है. इसे आम तौर पर भोजन के बाद हाजमा दुरुस्त करने के लिए खाया जाता है. इसके अलावा हम जैविक तरीके से भी गुड़ तैयार करते हैं जो कि बेहद लाभकारी और शुद्ध होता है.

दोस्तों, गुड़ बनाने के लिए कई कच्ची सामग्री की भी जरूरत पड़ती है. बिना कच्चे सामान के गुड़ की बनाना इतना आसान नहीं होता है. गुड़ बनाने के लिए मुख्य तौर पर हमें गन्ने की आवश्यकता होती है, इसलिए गुड़ अधिकतर उन स्थानों पर बनाया जाता है जहां गन्ने की पैदावर अधिक होती है. हालांकि कम या अधिक मात्रा में गुड़ देश के लगभग हरेक हिस्से में तैयार किया जाता है. लेकिन भारत में सबसे अधिक अच्छी गुणवत्ता वाला गुड़ पंजाब में तैयार किया जाता है. इसके अलावा देश के काफी हिस्सों में गन्ने की पैदावर होती है. गुड़ बनाने के लिए आप किसान से सीधे तौर पर गन्ना खरीद सकते हैं, इसके अलावा यदि आपको किसान से गन्ना नहीं मिल पा रहा है तो आप गन्ना मंड़ी से भी गन्ना हासिल करके गुड़ बना सकते हैं. यदि हम गन्ने की कीमत की बात करें तो गन्ने के अलग-अलग जगहों पर मूल्यों में फर्क हो सकता है.

गुड़ बनाने के लिए उपयुक्त होने वाली अन्य सामग्री में आपको मशीन के अलावा कढाई, चम्मच, रस संचय करने के लिए ड्रम, गुड़ जमाने के लिए सांचे,आग जलाने के लिए लकड़ी आदि साम्रगी की आवश्यकता होती है. इसके साथ ही हमें गुड़ बनाने के लिए पर्याप्त स्थान की भी आवश्यकता होती है. जिसमें हम आग जालने के लिए चूल्हा बना सकें. इसके अलावा हमें गुड़ को ठंडा करने के लिए एक चौड़े बरतन जैसे परात आदि की आवश्यकत होती है.

दोस्तों, आज के जमाने में मशीनों का इस्तेमाल ज्यादा होता है. ऐसे में गुड़ बनाने के लिए भी कई प्रकार की मशीनों का प्रयोग किया जाता है. जिसमें बिजली से चलने वाली मशीनें और हाथ से चलने वाली मशीनों भी इस्तेमाल किया जाता है. अगर हम मशीनों के मूल्य की बात करें तो एक स्वचलित मशीन की कीमत लगभग 1 लाख रूपये से शुरू होती है. इसके अलावा हस्तचलित मशीन हस्तचालित मशीन का 10,000 रुपये में भी मिल जाती है. गन्ने से रस हासिल करने के लिए अगर क्रशर की जगह कोल्हू या हस्तचालित मशीन को उपयोग में लिया जाता है, तो रस कम मात्रा मिलने के साथ समय भी अधिक लगता है. गन्ने से इसकी कटाई के 12 घंटे के अन्दर रस निकाल लेने से ज्यादा मात्रा में रस प्राप्त मिल जाता है.

दोस्तों, गुड़ हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है. गुड़ का सेवन करना शरीर को कई पोषक तत्व भी मिलते हैं. दरअसल गुड़ का प्रयोग हम सर्दियों में ज्यादा करते हैं. गुड़ से कई प्रकार की बीमारी भी दूर हो सकती हैं. इसलिए गुड़ की गुणवत्ता बढाने के लिए अक्सर गुड़ बनाते समय गन्ने के रस में आंवला, सौंफ, अदरक मिक्स किया जाता है. इस प्रक्रिया से बना गुड़ सर्दी जुकाम के उपचार के लिए भी काम में लाया जाता है. इसके साथ ही पेट की समस्याओं से निपटने के लिए गुड़ एक बेहद आसान और फायदेमंद उपाय है. यह पेट में गैस बनना और पाचन क्रिया से जुड़ी अन्य समस्याओं को हल करने में बेहद लाभदायक है. खाना खाने के बाद गुड़ का सेवन करने से पाचन में सहयोग करता है. इसके अलावा सर्दी के दिनों में या सर्दी होने पर गुड़ का प्रयोग आपके लिए अमृत के समान होगा. इसकी तासीर गर्म होने के कारण यह सर्दी, जुकाम और खास तौर से कफ से आपको राहत देने में मदद करेगा. इसके लिए दूध या चाय में गुड़ का प्रयोग किया जा सकता है, और आप इसका काढ़ा भी बनाकर ले सकते हैं.

दोस्तों, गुड़ कोई ऐसी वैसी चीज नहीं है. इसमें काई सारे ऐसे तत्व मौजूद हैं जो हमें एनर्जी देते हैं. गन्ने के रस से ही गुड़ और चीनी दोनों ही बनाए जाते हैं लेकिन इनकी प्रक्रिया और उपयोग में काफी फर्क रहता है. लेकिन चीनी बनाने की प्रक्रिया में लौह तत्व, पोटेशियम, गंधक, फासफोरस और कैल्शियम जैसे कई तत्व नष्ट हो जाते है. इससे इसकी गुणवत्ता कम हो जाती है. जबकि गुड़ बनाने की प्रक्रिया में ये सारे तत्व पूरी तरह से मौजूद होते है. क्योंकि गुड़ को हम बिल्कुल प्राकृतिक रूप से तैयार करते हैं. इसे बनाने में किसी भी तरह के रसायन का प्रयोग नहीं होता. जिस कारण इसे अपने मूल गुणों को खोना भी नही पड़ता. गुड़ लवण, मैग्नेशियम, आयरन और विटामिन-ए,बी का बेहतर स्त्रोत है. इसलिए सेहत के आधार पर चीनी की जगह पर गुड़ बढ़िया विकल्प है. क्योंकि गुड़ चीनी का ही एक कच्चा प्रकार ही है, इस लिहाज से इसका सेवन भी लाभप्रद है. इसकी तासीर गर्म होती है. इसलिए सर्दियों के मौसम में गुड़ के फायदे अधिक है, वैसे तो गुड़ का सेवन पूरे साल किया जा सकता है.

गुड़ से कई फायदे भई होते हैं. गुड़ में कई प्रकार के गुण होते हैं जो इंसानी शरीर के लिए बेहद जरुर होते हैं. गुड़ खाने से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ती है. गुड़ आयरन का एक अच्छा और सुलभ स्रोत है. एनिमिया के रोगियों के लिए भी गुड़ बेहद फायदेमंद होता है. इसके अलावा त्वचा की सेहत के लिए भी गुड़ आपके लिए बहुत काम की चीज है. गुड़ खून के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है. गुड़ रक्त से हानिकारक टॉक्स‍िन्स को बाहर कर, त्वचा की सफाई में मदद करता है और रक्त संचार भी बेहतर करता है. इससे अलावा गुड़ खाने से मुंहासों की समस्या नहीं होती और त्वचा में चमक आती है. यह आपकी त्वचा की समस्याओं को आंतरिक रूप से ठीक करने में मदद करता है. अगर आप बहुत अधि‍क थकान या कमजोरी महसूस कर रहे हैं, तब भी गुड़ आपकी मदद कर सकता है. क्योंकि यह आपके शरीर में उर्जा के स्तर को बढ़ा देता है, और आपको थकान महसूस नहीं होती.

सर्दी के मौसम में गुड़ को खाना बेहद लाभकारी माना जाता है, डॉक्टर भी कई तरह की बीमारी में गुड़ खाने की सलाह देते हैं. गुड़ सर्दी, जुकाम और खास तौर से कफ से आपको राहत देने में मदद करेगा. इसके लिए दूध या चाय में गुड़ का प्रयोग किया जा सकता है, और आप इसका काढ़ा भी बनाकर ले सकते हैं. जोड़ों में दर्द की समस्या होने पर गुड़ का अदरक के साथ प्रयोग काफी लाभदायक माना जाता है. हर रोज गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है. गुड़ को अदरक के साथ गर्म कर, इसे गुनगुना खाने से गले की खराश और जलन में राहत मिलती है. इससे आवाज भी काफी बेहतर हो जाती है.  

दोस्तों, महिलाओं के लिए भी गुड़ काफी फायदेमंद माना जाता है. महिलाओं को मासिकधर्म की समस्याओं में राहत देने के लिए भी गुड़ काफी फायदेमंद साबित होता है. उन दिनों में गुड़ का सेवन करने से हर तरह की तकलीफ में राहत मिलेगी. इसके अलावा स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए भी गुड़ बहुत फायदेमंद है. इसके नियमित सेवन से याददाश्त बढ़ती है और दिमाग कमजोर नहीं होता. इसके अलावा अगर आपको कम भूख लगती है,तो आपकी इस समस्या का इलाज गुड़ के पास है. गुड़ खाने से आपकी भूख खुलेगी और पाचनक्रिया दुरूस्त होगी.
 
दोस्तों, गुड़ से कई मिठाई भी बनती है. सर्दियों में तिल, गुड़ और सूखे मेवे से बने बर्फी या लड्डू पारंपरिक रूप से बनाये जाते रहे हैं. तिल गुड़ की बर्फी को बहुत कम समय में और बहुत थोड़े से इन्ग्रेडियेन्ट्स से बनाया जा सकता है. इसमें आटे गुड़ की बर्फी, ड्राइफूट्स और गुड़ के लड्डू, गुड़ के मखाने, गुड़ की रोटी, गुड़ की चिक्की, गुड़ की नरम चिक्की, चौलाई के लडडू, गुड़ पोली आदि प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं. जिसे लोग काफी पसंद करते हैं. गुड़ का विश्व का सबसे बड़ा बाजार उत्तर प्रदेश का सीतापुर जिला है. इसके अतिरिक्त विश्व का गुड़ का दूसरा बड़ा बाजार भी भारत के आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम जिले में है.

दोस्तों, गुड़ कैसे बनता है और गुड़ के क्या-क्या फायदे हैं इन सब के बारे में आज आप जान चुके हैं. तो दोस्तों, अब पूरे साल भर आप गुड़ खाइए और मस्त रहिए. दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि गुड़ का रंग कैसा होता है.