Home Facts इस हार्मोन के कारण स्टूडेंट का पढ़ाई में नहीं लगता मन

इस हार्मोन के कारण स्टूडेंट का पढ़ाई में नहीं लगता मन

by Gwriter

सोशल मीडिया और इंटरनेट के दौर में ज्यादातर लोग घंटों तक फेसबुक, इंस्टाग्राम, गेम्स और दूसरे ऐप से चिपके रहते हैं. खासकर बच्चों की बात करें तो उनका तो लगभग पूरा दिन ऑनलाइन गेम्स और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर ही बीतता है. यह सभी एक्टिविटी हम दिमाग में मौजूद एक हार्मोन के कारण करते है. डोपामाइन नाम का यह हार्मोन हमें खुशी का अनुभव कराते हुए हम में डिसायर यानी इच्छा पैदा करता है. गेम्स खेलने, सोशल मीडिया पर स्क्रोल करने से डोपामाइन ज्यादा मात्रा में पैदा होता है. इसलिए हमारी इच्छा होती है कि हम यह सभी काम ज्यादा से ज्यादा समय तक करें. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इसमें हमें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती और हमारा दिमाग रिलेक्स होकर हमें खुशी महसूस कराता रहता है.

जब भी हम इंटरनेट ब्राउज करते हैं या गेम्स खेल रहे होते हैं तो हमारे दिमाग में मौजूद डोपामाइन इस सब एक्टिविटी को मॉनीटर कर रहा होता है. जब भी हमें गेम्स में जीत या हार मिलती है तो डोपामाइन ज्यादा रिलीज होता है और दिमाग हमें और खेलने के लिए कहता है. जिससे गेम्स और इंटरनेट ब्राउज करते हुए कब घंटों बीत जाते हैं हमें पता भी नहीं चलता. हमारे शरीर में डोपामाइन किसी भी एक्टिविटी के करने से पैदा होता है. अगर किसी एक्टिविटी को करके ज्यादा मात्रा में डोपामाइन पैदा होता है तो हम वह एक्टिविटी करने के लिए ज्यादा मोटीवेट होते हैं. अगर किसी एक्टिविटी से कम डोपामाइन पैदा होता है तो हम उससे बचने या दूर भागने की कोशिश करते हैं. ठीक ऐसा ही बच्चों के पढ़ाई के केस में होता है. बच्चे जब पढ़ाई करते हैं तब कम मात्रा में डोपामाइन रिलीज होता है. वहीं जब गेम, टीवी या इंटरनेट ब्राउज करते हैं तो बहुत ज्यादा मात्रा में डोपामाइन पैदा होता है.

दिमाग में डोपामाइन रिलीज करने में तुरंत मिलने वाले इनाम का सबसे अहम रोल होता है. हम गेम खेलने या पार्न देखने जैसी एक्टिविटी को करते हैं तो उससे हमें खुशी के तौर पर तुरंत रिवार्ड मिलता है. वहीं पढ़ाई और एक्सरसाइज करने जैसी एक्टिविटी, जिनका थोड़ा समय के बाद रिजल्ट आता है. वह कम मात्रा में डोपामाइन हार्मोन पैदा कर पाती है. डोपाइन के रिलीज होने से किसी भी काम को करने के लिए हमारी इच्छा शक्ति काफी प्रबल हो जाती है. लेकिन यह भी सच है कि अगर डोपामाइन रिलीज ही नहीं होगा तो हम किसी भी काम को नहीं कर पाएंगे. क्योंकि करने की इच्छा ही नहीं होगी. इसीलिए कई बच्चों का गेम खेलने के अलावा किसी ओर चीज में मन ही नहीं लगता है. पढ़ाई जैसी एक्टिविटी जिससे कम मात्रा में डोपामाइन रिलीज होता है, वह गेम जैसी हाई डोपामाइन एक्टिविटी के कारण पीछे छूट जाती है.

स्टूडेंट्स का पढ़ाई में मन लगाने और डोपामाइन को कंट्रोल करने के दो तरीके हैं. पहला यह कि हमें हफ्ते के हिसाब से एक दिन सभी हाई डोपामाइन एक्टिविटी को पूरी तरह से बंद कर दें, जिससे डोपामाइन हार्मोन के कारण हमें गलत जगह मोटीवेट करने वाली इंद्रिया कमजोर पड़ जाएं और उस एक्टिविटी को लेकर हमारी डोपामाइन लेवल कम हो जाए. दूसरा, हम यह भी कर सकते हैं कि हाई डोपामाइन वाली एक्टिविटी को एक इनाम के तौर पर इस्तेमाल करें. यानी अगर बच्चे का गेम्स में ज्यादा मन लगता है तो हम उसको 1 घंटे पढ़ाई के बाद 15 मिनट गेम्स खेलने दे. जिससे हाई डोपामाइन एक्टिविटी को पाने के चक्कर में वह कम डोपामाइन वाली एक्टिविटी को भी आसानी से कर सकें. इससे उसका दिमाग उससे पढ़ाई करके गेम खेलने के लिए मोटीवेट करेगा. डोपामाइन सभी उम्र के लोगों के लिए मोटीवेट करने जैसा अच्छा हौ तो कई मामलों में हमारी सहनशीलता बढ़ाकर हमें नुकसान भी पहुंचाता है. गेम्स और पॉर्न देखने जैसी एक्टिविटी ज्यादा मात्रा में डोपामाइन रिलीज करती है. हालांकि यह ज्यादा करने से हमारी शरीर को नुकसान होता है. लेकिन फिर भी हम करते हैं. डोपामाइन के कारण हम घंटों तक गेम और सोशल नेटवर्किंग साइट देखते रहते हैं. जबकि पढ़ाई और कई जरूरी चीजों का साथ छूट जाता है. ऐसे में डोपामाइन पर कंट्रोल करना बेहद जरूरी है.

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