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सिंगापुर कम वक्त में कैसे अमीर बना?

सिंगापुर की सूरत बदलने में इसकी भौगोलिक स्थिति का भी एक बड़ा योगदान है. ये देश मलक्का जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित है जहां से दुनिया का 40 फीसदी समुद्री व्यापार होकर गुजरता है

आप कब गरीब से अमीर बन जाए, ये कहा नहीं जा सकता है. वहीं कोई देश कब गरीबी को दरकिनार कर दुनिया में अमीर देशों में शुमार हो जाए, ये भी कहना मुश्किल है. हालांकि दुनिया में कई ऐसे देश है जिन्होंने अपने देश में मौजूद चुनौतियों से हार नहीं मानी और आज वो विश्व में काफी विकसित देशों की सूची में गिने जाते हैं. दोस्तों, हम आज बात सिंगापुर की कर रहे हैं, जो क्षेत्रफल के लिहाज से दिल्ली से भी छोटा है. सिंगापुर एक ऐसा देश है जिसने पूरी दुनिया में बहुत छोटे वक्त में विकास की बेमिसाल गाथा लिखी है. सिंगापुर का विकास देखकर हर कोई चौंक जाता है. लेकिन दोस्तों क्या आपको पता है कि सिंगापुर इतनी अमीर कैसे है? आइए जानते हैं लेकिन दोस्तों अगर आपने हमारे चैनल को अभी तक सब्सक्राइब नहीं किया तो जल्द ही कर लें...

दोस्तों, आजादी के वक्त सिंगापुर काफी गरीब देश था. सिंगापुर के पास न तो खेती योग्य जमीन थी और न ही खनिज संपदा थी. इस देश की ज्यादातर जनसंख्या भी झुग्गी बस्तियों में रहा करती थी. 9 अगस्त 1965 को सिंगापुर एक स्वतंत्र गणराज्य बना. उस दौरान सिंगापुर में विकास के नाम पर कुछ नहीं था. लेकिन आज अगर इस देश की बात करें तो सिंगापुर वो मुल्क है जहां लोगों की औसत तनख्वाह दुनिया में तीसरे नंबर की है. यही नहीं, मोबिलिटी, सेहत, सुरक्षा और प्रोडक्टिविटी के मामले में भी सिंगापुर दुनिया में सबसे आगे है.

लेकिन एक समय ऐसा था जब भारत, ऑस्ट्रेलिया और म्यांमार की तरह सिंगापुर भी एक ब्रिटेन उप-निवेश हुआ करता था. ये बात दूसरे विश्व युद्ध के दिनों की है. सिंगापुर को 'जिब्राल्टर ऑफ द ईस्ट' कहा जाता था क्योंकि सिंगापुर में ब्रिटेन की सेनाओं की भारी मौजूदगी हुआ करती थी. लेकिन साल 1942 में जापान ने ब्रिटेन को शर्मनाक अंदाज में हरा दिया.

तब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने इस हार को ब्रिटेन इतिहास का सबसे बुरा नुकसान और सबसे बड़ा आत्म-समर्पण बताया था. लेकिन 1944-45 में अमरीकी विमानों ने जापान के कब्जे वाले सिंगापुर पर हमला बोल दिया. इस हमले में सिंगापुर पर जोरदार बमबारी की गई जिससे यहां के व्यापारिक बंदरगाहों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा. लेकिन इसके बाद सिंगापुर ने अपने लिए एक नई कहानी गढ़ना शुरू कर दिया.

जापान के कब्जे वाले दिनों में सिंगापुर की आबादी को तमाम प्रताड़नाओं का सामना करना पड़ा. 16 सितंबर 1923 को जन्म लेने वाले ली कुआन यी एक चीनी अप्रवासी परिवार की तीसरी पीढ़ी के बेटे थे. सिंगापुर के अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ने वाले ली कुआन यी का अंदाज भी अंग्रेज़ों जैसा ही था. तभी बचपन में उन्हें 'हैरी ली' कहकर पुकारा जाता था. जापानी कब्ज़े के दौरान ली की पढ़ाई काफी प्रभावित हुई. लेकिन जब युद्ध खत्म हो गया तो उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पढ़ाई की.

छात्र जीवन से ही समर्पित समाजवादी रहे ली सिंगापुर लौटकर एक प्रमुख ट्रेड यूनियन वकील बन गए. साल 1954 में ली ने पीपुल्स एक्शन पार्टी (पीएपी) की स्थापना की. इसके बाद ली इस पार्टी के महासचिव बने और अगले 40 सालों तक इस पद पर रहे. साल 1959 के चुनावों में पीएपी ने बहुमत हासिल किया. इस तरह सिंगापुर पूरी तरह से अंग्रेजों के नियंत्रण से निकलकर स्वशासित राज्य बन गया.

1965 में वैचारिक रस्साकशी और जातीय समूहों के बीच हिंसक संघर्ष के बाद सिंगापुर संघ से निकलकर स्वतंत्र देश बन गया. ली के लिए यह एक मुश्किल कदम था जिनके लिए मलेशिया से संधि सिंगापुर के औपनिवेशिक अतीत से दूर फेंकने की एक कोशिश थी. उन्होंने इसे एक खराब दौर बताया. बरसों तक पहले ब्रिटेन का राज, जापानी कब्जे और फिर मलेशिया के प्रभुत्व से आजाद होकर सिंगापुर एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में सांस ले रहा था. लेकिन इस देश के पास ऐसी कोई चीज नहीं थी जो इसे विकास के रास्ते पर ईंधन देने का काम कर सके. ज्यादातर लोग कच्चे झोपड़ी नुमा घरों में रहने को मजबूर थे.

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दोस्तों, वर्ल्ड बैंक के मुताबिक 1965 में सिंगापुर की प्रति व्यक्ति जीडीपी 516 अमरीकी डॉलर थी और करीब आधी जनसंख्या अशिक्षित थी. लेकिन इसके बावजूद सिंगापुर ने 1960 से 1980 तक प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय उत्पाद में 15 गुना की वृद्धि करने जैसा कीर्तिमान बनाया है. सिंगापुर के पूर्व प्रधानमंत्री ली कुआन यी मानते थे कि इजराइल की तरह सिंगापुर को भी छलांग लगाकर आसपास के क्षेत्र के अन्य देशों को पीछे छोड़ना है और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित करना है.

हालांकि, एक बर्बाद और छोटे से देश से चमचमाती इमारतों का मुल्क बनने की प्रक्रिया में सिंगापुर के लोगों ने एक बड़ी क़ीमत भी चुकाई है. सिंगापुर की सरकार ने आबादी को निंयत्रण में लाने के लिए दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले लोगों पर कर लगाना शुरू कर दिया. यही नहीं, भ्रष्टाचार की समस्या से निपटने के लिए सिंगापुर में ऐसे कड़े कानून बनाए गए जिनकी वजह से भ्रष्टाचार में कमी देखी गई. सिंगापुर में शानदार सड़कें और हाइवे निर्माण पर जोर दिया गया जिससे आधारभूत ढांचे का विकास किया जा सके. 

सिंगापुर की सूरत बदलने में इसकी भौगोलिक स्थिति का भी एक बड़ा योगदान है. ये देश मलक्का जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित है जहां से दुनिया का 40 फीसदी समुद्री व्यापार होकर गुज़रता है जिससे इस देश को भारी कमाई होती है. इसकी 190 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा पर कई गहरे पानी वाले बंदरगाह हैं. यही नहीं, ली कुआन यी की सरकार ने शुरुआत से ही सिंगापुर में रहने वाली मिश्रित आबादी को शिक्षित करने और मानव संसाधन पर पैसा खर्च किया.

फिलहाल, सिंगापुर को दुनिया का आर्थिक अड्डा माना जाता है क्योंकि सिंगापुर के बैंक वैश्विक स्तर की सेवाएं देने में सक्षम हैं. सिंगापुर को साल 2017 की ग्लोबल फाइनेंस सेंटर इंडेक्स में लंदन और न्यूयॉर्क के बाद तीसरे सबसे प्रतिस्पर्धी आर्थिक केंद्र का दर्जा दिया गया. सिंगापुर सरकार के मुताबिक, साल 2017 में एक करोड़ 74 लाख अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों ने सिंगापुर का भ्रमण किया था जो कि सिंगापुर की कुल जनसंख्या की तीन गुना है.

सिंगापुर में रहने वाले कई प्रवासी इस देश के महंगाई स्तर से ख़ुद को इतना प्रभावित नहीं मानते हैं क्योंकि सिंगापुर में लोगों की आमदनी दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर है. सिंगापुर में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए ली ने नए उपाय किए और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कम लागत के आवास और औद्योगीकरण के कार्यक्रम की शुरूआत की.