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कैसे बनाई जाती है पेंसिल?

पेंसिल एक ऐसी चीज है जो आपको हर जगह घर और दुकान में मिल जाएगी. 5 साल से 50 साल यानी हर उम्र के लोग पेंसिल का खूब इस्तेमाल करते हैं. पेंसिल को लिखने, ड्राइंग करने जैसे बहुत से काम के लिए इस्तेमाल किया जाता है. पेंसिल ही एक ऐसी चीज है जो लगभग सभी के बचपन में एक जैसी ही रहती है. लेकिन दोस्तों, क्या आपको पता है कि पेंसिल बनाई कैसी जाती है? चलिए जानते हैं.

पेंसिल बनाने के लिए तीन चीजें बेसिक जरूरत में शामिल है. वह है लकड़ी, गोंद और ग्रेफाइट... पेंसिल बनाने वाली कंपनियों द्वारा इन चीजों को अलग से मार्केट से खरीदा जाता है. कंपनियां लकड़ियों की 20 सेंटीमीटर की प्लेट, 20 सेमी ग्रेफाइट और ग्लू यानी चिपकाने लायक पदार्थ को मार्केट से खरीदते हैं.

पेंसिल बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहले लकड़ियों को मशीन के अंदर डाल कर उसमें रोलर द्वारा लाइन नुमा गड्ढे बनाए जाते है. गड्ढे बनाए जाने के बाद गोंद की मदद से उस लकड़ी की लाइनों में ग्रेफाइट को चिपकाया जाता है. इसके बाद सेम साइज की दूसरी लकड़ी की प्लेट को ग्रेफाइट वाली प्लेट पर गोंद की मदद से चिपकाया जाता है. लकड़ियों को चिपकने कि इस प्रक्रिया को आप ऐसे समझ सकते है जैसे कि आप सैंडविच बना रहे हो.

पेंसिल बनाने की अगली प्रक्रिया में इन लकड़ी की प्लेटों को एक साथ रखकर चिपकाने के लिए इन पर प्रेसर डाला जाता है. इसके बाद कटर की मदद से लकड़ियों को अलग कर लिया जाता है. लकड़ियों को काटते हुए मशीन द्वारा उसे हेक्सागोनल शेप दी जाती है. काटकर अलग करने के बाद पेंसिल तैयार हो चुकी होती है. दोस्तों, एक प्लेट से लगभग 6-7 पेंसिल बनती हैं. पेंसिल बनाने के बाद उस पर कलर किया जाता है. बाद में पेंसिल की टेस्टिंग भी होती है. वहीं ब्रांडिंग करके उसे मार्केट में उतारा जाता है.

दोस्तों, पेंसिल के बनने के बाद उससे कलर किया जाता है. मशीन द्वारा उसको कलर में डूबा कर उस पर पॉलिश की जाती है. कलर करने के बाद पेंसिल की टेस्टिंग होती है. टेस्टिंग के दौरान यह चेक किया जाता है कि लिखते समय पेंसिल टूट ना जाए साथ ही किसी उपभोक्ता द्वारा पेंसिल को हाथ में जोर से दबाने पर पेंसिल टूट ना जाए. इसके लिए पेंसिल पर 2 किलो तक का प्रेशर डाला जाता है. टेस्टिंग में पास होने के बाद पेंसिल को पैकिंग और ब्रांडिंग के लिए भेज दिया जाता है. इसमें कंपनियों द्वारा अपने ब्रांड को पेंसिल पर लिखा जाता है. इसके बाद पेंसिल को ब्रांड के बॉक्स में डालकर मार्केट में भेज दिया जाता है.

तो दोस्तों, कुछ इस तरह मार्केट में आती है पेंसिल. एक पेंसिल को बनाने में लगभग 30 घंटे का समय लगता है. पेंसिल में ग्रेफाइट की निब को इस्तेमाल किया जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रेफाइट मजबूत होता है. साथ ही वह समान ब्लैक कलर लिखते हुए देता है. दोस्तों, यह थी पेंसिल बनाने की पूरी प्रक्रिया. दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर बताएं कि पेंसिल की नोक का रंग कैसा होता है.