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चीनी कैसे बनती है?

मीठा खाने का शौक तो बहुत से लोगों को होता है। ऐसे लोग चाय से लेकर कॉफी में ज्यादा शुगर लेना पसंद करते है। चाय और कॉफी की ही सिर्फ बात क्यों की जाए, जब मीठा खाने वालों के लिए बाज़ार में हजारों options available है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह मीठा यानि शुगर कैसे बनती है। तो चलिये हम आपको चीनी बनाने की पूरी process के बारे में बताते है।

दोस्तों, मीठा खाने का शौक तो बहुत से लोगों को होता है। ऐसे लोग चाय से लेकर कॉफी में ज्यादा शुगर लेना पसंद करते है। चाय और कॉफी की ही सिर्फ बात क्यों की जाए, जब मीठा खाने वालों के लिए बाज़ार में हजारों options available है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह मीठा यानि शुगर कैसे बनती है। तो चलिये हम आपको चीनी बनाने की पूरी process के बारे में बताते है।

इतना तो हर कोई जानता है कि चीनी गन्ने से बनती है। वैसे इसे चुकन्दर से भी तैयार किया जा सकता है। गन्ने की पोरियों की लाखों-करोडों कोशिकाओं में जो रस भरा होता है, उसी को निकाल चीनी बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है। किसान लोग अपने-अपने खेतों से गन्ने की फसल को काटकर शुगर मील तक पहुंचा देते है। जहां आगे की प्रक्रिया शुरू होती है।

पहले तेज धारदार फरसों से गन्नों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। फिर इनको लोहे के बड़े बेलनों द्वारा पेरा जाता है। जिससे इसके अंदर से रस निकल जाता है और सारा रस एक बड़े से container में जमा कर लिया जाता है। इसके बाद उसे छानकर साफ कर लिया जाता है। फिर गन्ने के रस में सल्फर डाई आक्साइड, फोस्फोरिक एसिड या फिर कार्बन डाईआक्साइड मिलाकार उसे रिफाइन किया जाता है

ऐसा इसलिए भी किया जाता है ताकि चीनी को transparent जैसा सफ़ेद रंग दिया जा सके। सफ़ेद रंग के अलावा चीनी को फिर थोड़ा चमकदार भी बनाना होता है। तो गन्ने के रस को साफ करने के लिए पहले उसे चूने के घोल से treat किया जाता है, ताकि उसके P-H को 8 से 8.4 तक पहुंचाया जा सके। उसके बाद रस को थोड़ा गरम किया जाता है। इसके बाद रस में मौजूद ऐसे elements जो घुल नहीं पाते वो रस से फटकर अलग हो जाते हैं। रस के ठंडा होने पर यह elements नीचे बैठ जाते है।

साफ रस को अलग कर लिया जाता है और फिर उसे गाढा किया जाता है। पहले 15 Birx/ ब्रिक्स वाले रस को 60 बिक्स होने तक गाढा किया जाता है। फिर दूसरे लेवेल पर उसे और गाढा करके 93 से 100 ब्रिक्स तक पहुंचाया जाता है। यह प्रोसैस एक वैक्यूम पैन में होती है। रस को एक लेवेल तक गाढा बनाने के बाद उसे दानेदार रूप में लाया जाता है। जो रस इस स्तर तक गाढा नहीं हो पाता है उसे फिर शीरे के रूप में बाहर निकाल लिया जाता है। जिस शीरे को मोलासिस नाम से जाना जाता हैं

तो दोस्तों, कुछ इस तरह गन्ने के रस को साफ करके और उसे गाढ़ा करके दानेदार रूप में लाया जाता है। जिसका रंग सफ़ेद होता है। इतनी लंबी process से गुजरने के बाद तब जाकर हमे दानेदार रूप में चीनी उपलब्ध हो पाती है। हालांकि शुगर सेहत के लिए कोई बहुत अच्छी चीज़ नहीं है। तो ज़रूरी है कि आप मीठा खाए लेकिन एक हिसाब से और अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए इसकी एक उचित मात्रा ही ले।

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