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क्या शरणार्थियों को रोजगार और घर दे पाएगी सरकार?

नागरिकता संशोधन कानून 2019 को लेकर पूरे देश में सियासत, समर्थन और विरोध प्रदर्शन चल रहा है. देश के कई इलाके ऐसे हैं जहां इस कानून के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं. इसके साथ ही लोग इस कानून के विरोध के लिए हिंसा का भी सहारा ले रहे हैं. इन सभी चीज़ों के बीच यह भी जानना बेहद जरूरी है कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इस नए कानून के बाद देश की आर्थिक स्थिति कैसी होगी? मंदी और बेरोजगारी के दौर में क्या शरणार्थियों को घर और नौकरियां दे पाएगी भारत सरकार? आइए जानते हैं.

दोस्तो, सबसे पहले तो हमें यह समझना होगा कि यह कानून आखिर है किसके लिए. दोस्तों यह कानून उन भारतीयों के लिए है जो 1947 के विभाजन के समय भारत से पाकिस्तान चले गए थे. साथ ही मुस्लिम बहुल पड़ोसी देश जिनमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश शामिल है उनमें अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न होता है उनकी घर वापसी करारकर उन्हें भारत का नागरिक बनाना है.

दोस्तों, अगर इन देशों से शरणार्थी भारत में आते हैं तो बेशक भारत को काफी मुश्किलें उठानी पड़ सकती है. सरकार को भारत के नए नागरिकों को अधिकार के साथ रोजगार और रहने की जगह मोहिया करनी होगी. फिलहाल तो देश में कुछ ऐसा माहौल है जो शरणार्थियों के पक्ष में तो बिल्कुल नहीं है. देश में बेरोजगारी का आलम तो सबको पता है. ऐसे में सरकार को या तो नई इंडस्ट्रीज के दरवाजे खोलने होंगे या फिर रोजगार के कुछ नए मौके बनाने होंगे. लेकिन ऐसा करने के बाद भी आखिर कितनों को रोजगार मिल सकेगा? ये अपने आप में एक बड़ा सवाल है.

दोस्तों, सरकार कितने भी रोजगार मुहैया करवा दे लेकिन भारत की जनसंख्या को देखते हुए यह भी नाकाफी साबित होते हैं. अगर सरकार फेल होती है तो लोगों के पास मजदूरी और ठेलों का सहारा लेकर ही अपना रोजगार ढूंढ़ना होगा.

रोजगार की बात तो ठीक है लेकिन दुनिया के दूसरे नंबर के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश में शरणार्थियों को रहने की जगह देना सरकार के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगा. ऐसे में एक चीज और काम कर सकती है, जो मुस्लिम समुदाय के लोग इस कानून के दायरे में नहीं आएंगे और जिन्हें देश के बाहर जाना होगा उनके स्थान पर नए नागरिकों को जगह दी जा सकती है. अगर ऐसा नहीं होता है तो एक बार फिर जनसंख्या के चलते प्रकृति को नुकसान पहुंचाया जाएगा. जो ना तो देश और ना ही नई पीढ़ी के लिए ठीक है.

दोस्तों, देश के आर्थिक हालात कुछ ठीक नहीं है. सरकार को नए नागरिकों को देश में बुलाने से पहले उन्हें रोजगार और घर देने की जगह देनी होगी. हालांकि भारत सरकार इसके लिए तैयार है या नहीं इसके बारे में कुछ खुलासा नहीं हुआ है. समय आने पर आने वाली स्थितियां भी साफ हो जाएगा. दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरू बताएं कि मंदी के इस दौर में दूसरे देशों के नागरिकों को अपने देश में नागरिकता देना ठीक होगा या नहीं?