इस तरह डाली जाती है पटाखों में रोशनी, सेहत को पहुंचाते हैं काफी नुकसान

अक्सर खुशी के मौके पर पटाखे फोड़े जाते हैं. भारत में दिवाली पर सबसे ज्यादा पटाखे फोड़े जाते हैं. बिना पटाखों के दिवाली फीकी नजर आती है. दिवाली की रात पूरे भारत में पटाखों का शोर सुनाई देता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन पटाखों में रोशमी कैसे डाली जाती है और इन पटाखों का हम पर कैसा असर पड़ता है? आइए जानते हैं…

पटाखे बनाने के लिए प्रमुख रसायन शोरा है जिसको पोटेशियम नाईट्रेट भी कहा जाता है. इसके अंदर नमक का खार होता है. आजकल यह सोडियम नाईट्रेट और सोडियम क्लोराईड से बनाया जाता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक बारूद एक ऐसी चीज है जोकि बिना ऑक्सीजन के जल सकती है. कोयले के चूरन को जलाने के लिए ऑक्सीजन शोरा से मिलती है. बारूद 3 रसायनों के मिश्रण से बनता है. जब गंधक, शोरा और लकड़ी के कोयले के चूरे को आपस में मिलाया जाता है तो बारूद बनता है.

वहीं पटाखों के अंदर रंगबिरंगी रोशनी देखी जाती है. इस रोशनी को पटाखों के अंदर डालने के लिए कई तरह के रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें सोडियम नाईट्रेट को पटाखा बारूद के साथ मिलाया जाता है. जब पटाखें फूटते हैं तो हल्का पीला रंग नजर आता है. वह सोडियम नाईट्रेट की वजह से ही बनता है. पटाखे के अंदर हरी रोशनी पैदा करने के लिए बोरियम नाईट्रेट का प्रयोग किया जाता है. इसका प्रयोग ज्यादातर अतिशाबाजी के अंदर होता है. वहीं जब हम पटाखे फोड़ते हैं तो हमें लाल रंग दिखाई देता है. यह सीजिएम नाईट्रेट की वजह से होता है.

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इन पटाखों से हमारे शरीर पर कई बुरे प्रभाव भी पड़ते हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में…

सांस की समस्या
पटाखों के धुएं की वजह से अस्थमा या दमा का अटैक आ सकता है. हानिकारक जहरीले कणों के फेफड़ों में पहुंचने से ऐसा हो सकता है, जिससे व्यक्ति को जान का खतरा भी हो सकता है. ऐसे में जिन लोगों को सांस की समस्याएं हों, उन्हें अपने आप को प्रदूषित हवा से बचाकर रखना चाहिए. पटाखों के धुएं से हार्टअटैक और स्ट्रोक का खतरा भी पैदा हो सकता है. पटाखों में मौजूद लैड सेहत के लिए खतरनाक है, इसके कारण हार्टअटैक और स्ट्रोक की आशंका बढ़ जाती है. जब पटाखों से निकलने वाला धुंआ सांस के साथ शरीर में जाता है तो खून के प्रवाह में रुकावट आने लगती है. दिमाग को पर्याप्त मात्रा में खून न पहुंचने के कारण व्यक्ति स्ट्रोक का शिकार हो सकता है.

गर्भपात का खतरा
पटाखों से निकलने वाला खतरनाक कार्बन डाइ ऑक्साइड गैस सांस में घुलकर गर्भवती स्त्री को नुकसान पहुंचाता है. कई बार इससे होने वाले बच्चे पर उल्टा असर पड़ता है और गर्भपात भी हो सकता है.

आंखों की समस्या
दिवाली के पटाखों से होने वाले प्रदूषण से ऐसे टॉक्सिस बनते हैं जो आंखों में जलन, पानी निकलने जैसी समस्याएं पैदा करते हैं. इससे बचने के लिए बीच बीच में पानी से आंखों को साफ करते रहें.

बहरापन
पटाखों का तेज आवाज से कई बार बहरापन भी हो सकता है. कई बार ये कान के पर्दे तक को नुकसान पहुंचाता है.

हार्मोनल डिसआर्डर
पटाखों में नीली रोशनी के लिए तांबे का प्रयोग होता है जोकि हवा में घुलकर कैंसर के खतरे का बढ़ाता है. इसके अलावा ये हार्मोनल डिसआर्डर के खतरे को दोगुना कर देता है जिससे बच्चों की लंबाई और सेहत पर प्रभाव पड़ता है.

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