कम्प्यूटर चलाते हो तो सावधान हो जाओ, मोदी सरकार करवा रही है जासूसी, हो गया बड़ा खुलासा, डेटा में हो सकती है सेंधमारी

इंटेलिजेंस ब्यूरो से लेकर NIA तक 10 केंद्रीय एजेंसियों को अब जासूसी करने का लाइसेंस मिल गया है. ये एजेंसियां अब किसी भी कंप्यूटर में मौजूद, रिसीव और स्टोर्ड डेटा समेत अन्य जानकारियों की निगरानी, इंटरसेप्ट और डिक्रिप्ट कर सकती हैं. गृह मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि खुफिया ब्यूरो, मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, राजस्व खुफिया निदेशालय, सीबीआई, एनआईए, रॉ, डायरेक्टरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस और दिल्ली के पुलिस आयुक्त के पास देश में चलने वाले सभी कंप्यूटरों की कथित तौर पर निगरानी करने का अधिकार होगा.

गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आदेश के मुताबिक, 10 एजेंसियों के पास अधिकार है कि वे किसी भी कंप्यूटर के डेटा को चेक कर सकती हैं. गृह मंत्रालय ने आईटी एक्ट, 2000 के 69 (1) के तहत यह आदेश दिया है, जिसमें कहा गया है कि भारत की एकता और अखंडता के अलावा देश की रक्षा और शासन व्यवस्था बनाए रखने के लिहाज से जरूरी लगे तो केंद्र सरकार किसी एजेंसी को जांच के लिए आपके कंप्यूटर को एक्सेस करने की इजाजत दे सकती है.

लेकिन सरकार के इस फैसले के बाद विपक्ष हमलावर हो चुका है. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने निजी कंप्यूटरों को जांच एजेंसियों की निगरानी के दायरे में लाने के सरकार के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि यह नागरिकों की निजी आजादी और निजता पर सीधा हमला है. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस आदेश के दुरुपयोग की आशंका जताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार देश को सर्विलेंस स्टेट में तब्दील कर रही है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने संसद भवन परिसर में कई विपक्षी दलों के नेताओं की मौजूदगी में कहा, ‘यह बहुत गंभीर घटनाक्रम है. इस आदेश के जरिए भाजपा सरकार भारत को निगरानी राज में तब्दील कर रही है. यह नागरिकों की निजी स्वतंत्रता पर सीधा हमला है और सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का प्रत्यक्ष उल्लंघन है जिसमें कहा गया था कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है.’ उन्होंने कहा, ‘हम साथ मिलकर आदेश का विरोध करते हैं. यह हमारे लोकतंत्र में अस्वीकार्य है.’ इस मौके पर आरजेडी के मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेयर रॉय, सपा के रामगोपाल यादव और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह मौजूद थे.

जल्द निपटा लें जरूरी काम, 5 दिन बंद रहने वाले हैं बैंक, ग्राहकों को हो सकता है घाटा

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, ‘अबकी बार, निजता पर वार. मोदी सरकार ने निजता के मौलिक अधिकार का मजाक बनाया है. चुनाव हारने के बाद मोदी सरकार आपके कंप्यूटर की जासूसी कराना चाहती है.’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने ट्वीट कर कहा, ‘इलेक्ट्रॉनिक निगरानी की अनुमति देने का सरकार का आदेश नागरिक स्वतंत्रता एवं लोगों की निजी स्वतंत्रता पर सीधा हमला है.’ उन्होंने कहा, ‘एजेंसियों को फोन कॉल एवं कंप्यूटरों की बिना किसी जांच के जासूसी करने का एकमुश्त अधिकार देना बहुत ही चिंताजनक है. इसके दुरुपयोग की आशंका है.’

इसी विषय पर कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार बताया है. भारत सरकार 20 दिसंबर की मध्यरात्रि में आदेश जारी कर कहती है कि पुलिस आयुक्त, सीबीडीटी, डीआरआई, ईडी आदि के पास यह मौलिक अधिकार होगा कि वे हमारी निजता में दखल दे सकें. देश बदल रहा है.’ इस आदेश पर माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने ट्वीट कर कहा ‘प्रत्येक भारतीय के साथ अपराधी की तरह व्यवहार क्यों किया जा रहा है? यह आदेश असंवैधानिक है. यह सरकार द्वारा पारित किया गया है जो प्रत्येक भारतीय पर निगरानी रखना चाहती है.’ येचुरी ने इसके असंवैधानिक होने की दलील देते हुए कहा कि यह टेलीफोन टैपिंग संबंधी दिशानिर्देशों, निजता और आधार पर अदालती फैसले का उल्लंघन करता है.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि सरकार के इस फैसले से आप सहमत है या नहीं?

(Visited 56 times, 1 visits today)

सुझाव कॉमेंट करें

About The Author

आपके लिए :