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आखिर ‘मोर’ को क्यों चुना गया राष्ट्रीय पक्षी? जाने इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य

आपने कभी सोचा है कि आखिर मोर ही राष्ट्रीय पक्षी क्यों है? दूसरे पंछी क्यों नहीं? तो चलिए एक नज़र डालते है इस सवाल पर और जानते है इसके पीछे छिपे कारण को।

दोस्तों, ये तो हम सब जानते है कि हमारा राष्ट्रीय पक्षी मोर है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर मोर ही राष्ट्रीय पक्षी क्यों है? दूसरे पंछी क्यों नहीं? तो चलिए एक नज़र डालते है इस सवाल पर और जानते है इसके पीछे छिपे कारण को।

अद्भुत रंगो को अपने में समेटे ‘मोर’ इतना खूबसूरत लगता है कि इसके आगे बड़े से बड़े चित्रकार की कला मात खा जाए। जब मोर अपने पंखों को खोल नाचता है, तो नज़ारा देखते ही बनता है। मोर सिर्फ राष्ट्रीय पक्षी ही नहीं है, बल्कि इसका पंख भगवान श्री कृष्ण को भी बेहद प्रिय है। जब मोर पंख को श्री कृष्ण अपने मुकुट पर धारण करते है, तो यह और खूबसूरत लगने लगता है। इतना ही नहीं मोर भगवान कार्तिकेय का वाहन भी हैं। तो देखा आपने कैसे मोर का एक धार्मिक पहलू भी है।

धार्मिक पहलू के अलावा अगर सम्राट अशोक के काल में कदम रखा जाए, तो बादशाह शाहजहां जिस सिंहासन पर बैठता था, उसका नाम 'तख्त--ताऊस' था। जिसपर हीरे-मोतियों जड़ी हुई थी। अरबी के इस 'ताऊस' शब्द का अर्थ है ‘मोर’।

अब आगे बढ़ते है। दोस्तों, बता दें कि भारत सरकार ने 26 जनवरी 1963 को मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया था। मोर के साथ कई और पक्षियों जैसे सारस क्रैन, ब्राह्मि‍णी काइट, बस्‍टार्ड, और हंस के नामों पर भी चर्चा हुई थी। लेकिन winner निकला मोर। 

मोर सिर्फ अपने अद्भुत सौंदर्य के कारण ही नहीं चुना गया था। दरअसल, राष्ट्रीय पक्षी बनने के लिए इसे भारत सरकार की guideline से गुजरना पड़ा था। क्या थी guideline?

  • इस guideline के अनुसार राष्‍ट्रीय पक्षी का देश के सभी हिस्‍सों में होना जरूरी है।
  • राष्‍ट्रीय पक्षी का भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ा होना भी ज़रूरी था। तो अब आप ऊपर बताए भगवान श्री कृष्ण वाले पॉइंट को यहां जोड़कर समझ सकते है।
  • पक्षी की सुंदरता भी सरकार के पैमाने में शामिल थी।
  • राष्ट्रीय पक्षी चुनने के लिए यह भी बात थी कि लोग उसे आम व्यक्ति आसानी से पहचान सके।

तो इस guideline को देखकर आसानी से समझता जा सकता है कि आखिर कैसे मोर ने बाकी सभी  पक्षियों को मात देकर राष्ट्रीय पक्षी का खिताब जीता। यह म्यांमार का भी राष्ट्रीय पक्षी है।

दोस्तों, अब एक नज़र डालते है ‘मोर’ से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों पर, जो इसे बाकी पक्षियों से अलग बनाते है।

  • मोर 6-7 फीट लम्बे होने के साथ करीबन 4-6 किलो वज़न के होते है। मोर 15 से 20  साल तक ज़िंदा रहते है।
  • अगस्त महीने में इनके पंख पूरी तरह झड़ जाते है और गर्मियों का मौसम आने तक दुबारा उग आते है।
  • मोर किसी भी प्रकार का खतरा महसूस होने पर काफी शोर मचाते है। शोर के अलावा जब मोर गाते है तो उससे बारिश आने का संकेत मिलता है।
  • मोर की नज़र ही नहीं बल्कि इनके सूंघने की शक्ति भी तेज होती है। जिस कारण यह जंगली जानवर की आहट को बड़ी जल्दी पहचान लेते हैं।
  • मोर सफेद, नीले व हरे रंग के भी होते है। लेकिन नीले रंग वाले मोर ही बहुसंख्या में नज़र आते है।
  • मोर तैर नहीं सकते, लेकिन उड़ सकत है। पर वो भी ज्यादा दूर तक नहीं। कई बार आपने इन्हें एक पेड़ की डाल से दूसरे पेड़ की डाल तक उड़कर जाते देखा होगा।
  • हमने बारिश के मौसम में मोर के नाचने की बात सुनी है। वास्तव में मोर उस समय नाचने के अलावा इसके माध्यम से मोरनी को रिझाते भी है।
  • मोर रात के समय पेड़ पर सो जाते है और दिन होते ही जमीन पर उतार आते है। जमीन पर ही यह अपना घोंसला बनाते है। जो घनी झाड़ियो व पत्तों के बीच छिपा होता है।  
  • भारत सरकार द्वारा वन्य जीव अधिनियम 1972 के तहत मोर को संरक्षण मिला है और अब इसका शिकार करने पर पूरी तरह से पाबंधी है।

तो दोस्तों, खूबसूरत मोर से जुड़ी इन बातों को जानकर आप भी समझ गए होंगे कि आखिर यह इतना खास क्यों है कि भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय पक्षी ही घोषित कर दिया।

 

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